एक और अस्पताल ने ममता सरकार पर बकाये का भुगतान नहीं करने का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट में किया मुकदमा

हावडा़ के फूलेश्वर स्थित एक निजी अस्पताल ने राज्य सरकार पर 59 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया है। अस्पताल प्रबंधन ने राज्य सरकार पर 59 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया है।

Priti JhaThu, 28 Oct 2021 02:28 PM (IST)
एक और अस्पताल ने ममता सरकार पर बकाये का भुगतान नहीं करने का आरोप लगाते हाई कोर्ट में किया मुकदमा

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। एक तरफ जहां ममता सरकार राज्य के निजी अस्पतालों को 'स्वास्थ्य साथी' योजना के तहत लोगों का निःशुल्क इलाज करने की हिदायत दे रही है, वहीं दूसरी तरफ निजी अस्पताल ममता सरकार पर इलाज के खर्च का भुगतान नहीं करने का आरोप लगाते हुए अदालत का रूख कर रहे हैं।

हावडा़ के उलबेरिया स्थित संजीवन अस्पताल के बाद अब फूलेश्वर स्थित एक निजी अस्पताल ने राज्य सरकार पर यह आरोप लगाते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अस्पताल प्रबंधन ने राज्य सरकार पर 59 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया है।

गौरतलब है कि पिछले साल कोरोना की गंभीर स्थिति के समय ममता सरकार की तरफ से इस निजी अस्पताल का अधिग्रहण किया गया था। अस्पताल प्रबंधन को कहा गया था कि वह सिर्फ राज्य सरकार की तरफ से भेजे जाने वाले को कोरोना के मरीजों को ही भर्ती ले। मरीजों से इलाज के रुपये नहीं लेने का निर्देश दिया गया था। राज्य सरकार की तरफ से बिल का पूरा भुगतान करने की बात कही गई थी।

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कुल 130 करोड़ रुपये का बिल बना, जिसमें से 59 करोड़ रुपये का राज्य सरकार की तरफ से भुगतान नहीं किया गया है। वह इससे इन्कार कर रही है। 300 बेड की क्षमता वाले इस निजी अस्पताल को राज्य सरकार ने पिछले साल 31 मार्च को अधिग्रहित किया था। बाद में कोरोना के ज्यादा से ज्यादा मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल में बेड की संख्या और 200 बढ़ाई गई थी। इससे पहले हावडा़ के ही उलबेरिया इलाके में स्थित संजीवन अस्पताल ने ममता सरकार पर 64 करोड़ रुपये के बकाए को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया है।

अस्पताल के प्रबंधन का आरोप है कि 'स्वास्थ्य साथी' योजना के तहत कोरोना के मरीजों का इलाज करने को लेकर उसके राज्य सरकार पर 64 करोड़ रुपये बकाया हैं। इस योजना के तहत अस्पताल में करीब छह हजार कोरोना के मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से अधिकांश के इलाज का खर्च का राज्य सरकार की ओर से अब तक उसे भुगतान नहीं किया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक हाई कोर्ट की तरफ से राज्य सरकार को इस मामले में सात दिनों के अंदर हलफनामा जमा करने का निर्देश दिया गया था लेकिन 21 दिन बीत जाने पर भी ऐसा नहीं किया गया है। 

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