पेट्रो पदार्थ कीमत नियंत्रित करने को केंद्र सरकार नहीं उठा रही कदम : मित्रा

-पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री ने कहा, केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क में की है नौ गुना वृद्धि

-पेट्रोल, डीजल में एक रुपये की कटौती सहानुभूतिपूर्ण कदम जागरण संवाददाता, कोलकाता : पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है और कहा है कि केंद्र सरकार पेट्रो पदार्थ की कीमत में बढ़ोतरी को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क में नौ गुना वृद्धि की है। पेट्रोल के लिए 9.48 रुपये प्रति लीटर से उत्पाद शुल्क बढ़ाकर 19.48 रुपये यानि इस सरकार ने अपने कार्यकाल में 10 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। वहीं, डीजल के लिए 11.77 रुपये बिक्री कर कर दी गई है लेकिन विशेष रूप से पश्चिम बंगाल जैसी राज्य सरकारों ने अपने बिक्री कर को नहीं बदला। उन्होंने कहा कि इन बातों को जनता को जानना चाहिए। श्री मित्रा बुधवार को बंगाल चेंबर आफ कामर्स की सालाना आम बैठक को संबोधित कर रहे थे।

बता दें कि मंगलवार को ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 1 रुपये प्रति लीटर की कटौती की घोषणा की। डाक्टर मित्रा ने कहा कि राज्य में कोई चुनाव नहीं है फिर भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डीजल, पेट्रोल की कीमतों में 1 रुपये प्रति लीटर की कमी की है। उन्होंने कहा कि 1 रुपये की कटौती कोई बड़ा नहीं है लेकिन यह सहानुभूतिपूर्ण कदम है जो यह दर्शाता है कि हम आम उपभोक्ता के साथ हैं। उन्होंने आगे कहा कि राज्य में कोई वैट नहीं है। यहां बिक्री कर और सेस एक साथ है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 104 रुपये प्रति बैरल से 33 रुपये प्रति बैरल हो गई तब भी केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक बनाने के लिए साहस नहीं दिखाया। उन्होंने ईंधन मूल्य स्थिरीकरण निधि नहीं बनाया। यह किस तरह की केंद्र सरकार है? वित्त मंत्री ने कहा कि इतना ही नहीं रुपया डॉलर की तुलना में कमजोर हो रहा है। यह सब दर्शाता है कि सरकार कुछ भी नियंत्रित नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि मैं और देश के लोग यह जानना चाहते हैं कि मोदी सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण निधि क्यों नहीं बनाया? ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें कोई ज्ञान नहीं है, शासन की कोई समझ नहीं है।

वहीं, बंगाल सरकार द्वारा इस साल पूजा समितियों को 28 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने के बारे में बोलेत हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इसे किसी समुदाय विशेष से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए क्योंकि दुर्गापूजा राज्य में एक सामाजिक त्योहार है। इसमें सभी समुदाय के लोग शामिल होते हैं।

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