बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा से मवेशियों की तस्करी मामले में बीएसएफ व कस्टम के 12 अधिकारी सीबीआइ की रडार पर

बीएसएफ के कमांडेंट सतीश कुमार ही नहीं बल्कि करीब एक दर्जन अधिकारी सीबीआइ की रडार पर हैं।
Publish Date:Thu, 24 Sep 2020 10:20 PM (IST) Author: Vijay Kumar

राज्य ब्यूरो, कोलकाता : बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा के जरिए मवेशियों की तस्करी मामले में अकेले बीएसएफ के कमांडेंट सतीश कुमार ही नहीं बल्कि करीब एक दर्जन अधिकारी सीबीआइ की रडार पर हैं। सूत्रों के अनुसार इनमें सात बीएसएफ के और पांच कस्टम विभाग के अधिकारी शामिल हैं, जिनके पशु तस्करों के साथ सांठगांठ को लेकर सीबीआइ सबूत खंगाल रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर सीबीआइ ने इन अधिकारियों के नाम का अभी खुलासा नहीं किया है। 

सरगना इनामुल हक व उसके दो साथियों पर केस दर्ज

सीबीआइ ने अभी इस मामले में बीएसएफ की 36वीं बटालियन के तत्कालीन कमांडेंट सतीश कुमार तथा मवेशी तस्करी के कथित सरगना इनामुल हक और उसके दो साथियों अनारूल और मोहम्मद गुलाम मुस्तफा के खिलाफ केस दर्ज किया है। 

सीबीआइ ने बुधवार बंगाल के कई स्थानों छापेमारी की

इन चारों के ठिकानों पर बुधवार को सीबीआइ ने बंगाल के कई स्थानों सहित देश के कई शहरों में करीब 15 जगहों पर छापेमारी की थी। इसी मामले में बीएसएफ व कस्टम के अधिकारी जांच के दायरे में हैं। 

जांच-अधिकारियों के खिलाफ अहम जानकारी हाथ लगी

सूत्रों का कहना है कि प्राथमिक जांच में इन अधिकारियों के खिलाफ सीबीआइ को कुछ अहम जानकारी हाथ लगी हैं। ऐसे में इनकी भूमिका का पता लगाया जा रहा है। 

गुरुवार को भी कोलकाता व मुर्शिदाबाद में छापेमारी की

वहीं, तस्करी के मामले में नामजद किए गए कथित सरगना इनामुल हक,  अनारूल और मोहम्मद गुलाम मुस्तफा के कुछ अन्य साथी भी जांच के घेरे में है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआइ ने गुरुवार को भी कोलकाता व मुर्शिदाबाद में छापेमारी की। 

कुमार बंगाल के मालदा जिले में बतौर कमांडेंट पदस्थ

इधर, सतीश कुमार के बारे में बता दें कि वह दिसंबर 2015 से अप्रैल 2017 तक बंगाल के मालदा जिले में बीएसएफ की दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के अंतर्गत 36वीं बटालियन के कमांडेंट के रूप में पदस्थ थे। उनके अधीन चार कंपनियां मुर्शिदाबाद में और दो कंपनियां मालदा में सीमा के पास तैनात थी।

आरोप-बांग्लादेश में मवेशियों की तस्करी में मदद की

कुमार फिलहाल छत्तीसगढ़ के रायपुर में पदस्थ हैं। उन पर आरोप है कि मालदा में पदस्थापना के दौरान उन्होंने बांग्लादेश में मवेशियों की तस्करी में मदद की। इसमें कुछ कस्टम के अधिकारी भी शामिल थे। 

मवेशियों की नीलामी के नाम रिश्वत लेने का आरोप

इसके बदले में बीएसएफ व कस्टम के अधिकारियों को प्रति मवेशी के हिसाब से मोटी रकम दिया जाता था। इसके साथ ही मवेशियों की नीलामी के नाम पर भी तस्करों से रिश्वत लेने का आरोप है। सीबीआइ पिछले करीब एक साल से इस मामले की जांच कर रही है।

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