childrens day 2019: चार वर्षो में अवैध श्रम के चंगुल से आजाद हुए 53,986 बच्चे

हावड़ा, ओमप्रकाश सिंह। बच्चों के बचपन को लौटने व उनकी जिंदगी में खुशियां भरने के लिए सरकार द्वारा काफी प्रयास किया जा रहा है। यही कारण है कि पिछले चार वर्षो में सरकार ने 53,986 बच्चे व बच्चियों को श्रमजाल से मुक्त कराकर नई जिंदगी दी है। इसके बावजूद आज भी हजारों की संख्या में मासूमों की जिंदगी श्रमजाल में फंस कर कहर रही है। हावड़ा में श्रम निषेध कानून के तहत कार्रवाई के संबंध में आरटीआइ के तहत जो खुलासा हुआ है, उससे साफ है कि पुलिस इस क्षेत्र में निष्क्रिय रही है। वर्ष 2014 से लेकर वर्ष 2018 तक मिली शिकायत के आधार पर पुलिस ने 20 बच्चों को श्रमजाल से मुक्त कराया है।

बताया गया है कि वर्ष 2014 में पुलिस को शिकायत मिली थी कि दो बच्चों से काम लिया जा रहा है। पुलिस ने कार्रवाई करने हुये काम करा रहे लोगों को गिरफ्तार कर उन्हें मुक्त करा लिया। इसी प्रकार वर्ष 2015 में पुलिस को शिकायत मिली थी कि किसी व्यक्ति द्वारा गोदाम अथवा किसी गुप्त स्थान पर चल रहे काम में बच्चों को लगाया गया है।

पुलिस ने कार्रवाई करते काम करवाने के आरोप में 9 लोगों को गिरफ्तार करते हुये 18 बच्चों को मुक्त कराया है। लेकिन 2015 के बाद से अब तक एक भी बच्चों को उद्धार नही किया जा सका है। पश्चिम बंगाल सरकार ने भी बच्चों को बाल श्रम के जाल से मुक्त कराने के अहम कदम उठाते हुये हजारों बच्चों को मुक्त करा चुकी है।

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मिली रिपोर्ट के अनुसार राज्य में वर्ष 2016-17 में 13,953 बच्चों को, वर्ष 2017- 18 में 17,899 बच्चे व बच्चियों को और वर्ष 2018-19 अब तक 22,114 बच्चों व बच्चियों को काम से मुक्त करा कर उनके बचपन को लौटाने का प्रयास किया गया है। यानी पिछले चार वर्षो में राज्य सरकार द्वारा 53,986 बच्चे व बच्चियों को काम से मुक्त कराया गया है।

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