अगले 15 दिनों के बीच कार्यकाल होगा समाप्त, अब सवाल उठा कि क्या सिलीगुड़ी महकमा परिषद में भी बैठेगा प्रशासक?

वहीं माकपा बोर्ड के सभाधिपति प्रशासकीय मंडली या चुनाव कराने का निर्णय राज्य सरकार पीआर छोड़ दिया है।
Publish Date:Fri, 30 Oct 2020 05:26 PM (IST) Author: Vijay Kumar

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : पाँच वर्ष पहले ग्रामीणो द्वारा चयनित सिलीगुड़ी महकमा परिषद बोर्ड, पंचायत समिति और प्रधान का कार्यकाल समाप्त होने को है। लेकिन चुनाव की हलचल दूर-दूर तक नहीं है। कार्यकाल समाप्त होने पर सिलीगुड़ी महकमा परिषद में भी प्रशासक बैठाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। बल्कि सिलीगुड़ी महकमा परिषद की विरोधी दल तृणमूल भी माकपा संचालित वर्तमान बोर्ड को ही प्रशासक नियुक्त करने के पक्ष मे है। वहीं माकपा बोर्ड के सभाधिपति प्रशासकीय मंडली या चुनाव कराने का निर्णय राज्य सरकार पीआर छोड़ दिया है। 

चुनाव की हलचल दूर-दूर तक सुनाई नहीं दे रही है

सिलीगुड़ी महकमा परिषद के वर्तमान माकपा बोर्ड का कार्यकाल अगले 15 नवंबर को समाप्त हो रहा है। वहीं 9 नवंबर सिलीगुड़ी महकमा परिषद के अधीन पंचायत समिति और 7 नवंबर को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। अर्थात अगले 15 दिनों के बीच त्रिस्तरीय सिलीगुड़ी महकमा परिषद का कार्यकाल पूरा होने को है। लेकिन चुनाव की हलचल दूर-दूर तक सुनाई नहीं दे रही है। जबकि करीब दो महीना पहले सिलीगुड़ी महकमा परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों के सीट आरक्षण की तालिका राज्य सरकार जारी कर चुकी है। 

प्रशासक बैठाने का निर्णय राज्य सरकार का होगा

राजनीतिक धाकड़ सिलीगुड़ी नगर निगम की भांति ही सिलीगुड़ी महकमा परिषद मे भी प्रशासकीय मंडली बिठाये जाने की संभावना जता रहे हैं। इस संबंध मे सिलीगुड़ी महकमा परिषद के सभाधिपति तापस सरकार ने बताया कि कार्यकाल पूरा होने के बाद चुनाव कराया जाएगा या प्रशासक बैठाने का निर्णय राज्य सरकार का होगा। अगले एक दो दिनों मे इस विषय पर सरकार कि मंशा भी साफ हो जाएगी। 

राजनीतिक विरोधाभास का असर विकास कार्यों पर

उन्होने आगे कहा कि राज्य कि सत्ताधारी पार्टी कि विरोधी दल माकपा संचालित बोर्ड होने कि वजह से सिलीगुड़ी महकमा परिषद को आर्थिक संकट का सामना करना परा है। बल्कि कार्यकाल के बीच मे तृणमूल ने माकपा के हाथ से बोर्ड छीनने का भी काफी प्रयास किया। इन राजनीतिक विरोधाभाष का असर विकास कार्यों पर परा है। इधर करीब डेढ़ वर्षों से केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मुहैया फंड से कई आवश्यक कार्य को पूरा करना संभव हो पाया है। सहायता कि यही क्रम शुरुआत मे मिलने से बीते पाँच वर्षों मे कई और विकासमूलक कार्य संभव होता। 

ग्रामीण इलाको के हालतों से भी अच्छी तरह वाकिफ

वहीं सिलीगुड़ी महकमा परिषद के विरोधी डाक नेता काजल सरकार ने कहा कि बीते पाँच वर्षों से जो लोग बोर्ड का संचालन करते आ रहे हैं, वे ग्रामीण इलाको के हालतों से भी अच्छी तरह वाकिफ हैं। इसलिए प्रशासक कि ज़िम्मेदारी उन्हे ही सौंपा जाना चाहिए। बल्कि वर्तमान माकपा बोर्ड को ही प्रशासक कि ज़िम्मेदारी सौंपने को लेकर तृणमूल की ओर से राज्य सरकार को आवेदन किया गया है।

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