स्टाल आवंटन प्रक्रिया अभी से ही सवालों के घेरे में

-मोटा माल कमाने के लिए दलाल राज से जुड़े लोग हुए सक्रिय -एक व्यापारी से आठ लाख तक वसूली क

JagranThu, 23 Sep 2021 08:41 PM (IST)
स्टाल आवंटन प्रक्रिया अभी से ही सवालों के घेरे में

-मोटा माल कमाने के लिए दलाल राज से जुड़े लोग हुए सक्रिय

-एक व्यापारी से आठ लाख तक वसूली की तैयारी

-वेट ब्रिज के लिए तो ऑफर लेटर तक जारी

सुपर मार्केट में सुपर घोटाला-1

एक्सक्लूसिव 02

लाख रुपये आधार कीमत रेगुलेटेड मार्केट में

64

स्टालों की होनी है नीलामी प्रिंसिपल यार्ड में

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लाख रुपये स्टाल की कीमत सालबाड़ी में जागरण संवाददाता, मोहन झा : सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट या कहें सुपर मार्केट में स्टाल आवंटन की प्रक्रिया शुरु होते ही दलाल राज ने फिर से फन फैला लिया है। स्टाल मुहैया कराने के लिए इच्छुक व्यापारियों से आठ लाख रुपये प्रति स्टाल के हिसाब से उगाही भी कर ली गई है। जबकि रेगुलेटेड मार्केट प्रबंधन ने अधिकतम आधार कीमत दो लाख रुपया ही निर्धारित किया है। वहीं दूसरी ओर स्टाल आवंटन को लेकर विभागीय मंत्री और मार्केट सचिव के कथनी और करनी में काफी विरोधाभास दिख रहा है। जबकि व्यापारियों की नजर में आवंटन की पूरी प्रक्रिया संदिग्ध है। जानकारी के मुताबिक सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट के प्रिंसिपल यार्ड मे 64, सालबाड़ी किसान मंडी मे 7 और फंसीदेवा किसान मंडी मे 20 स्टाल अनुपयोगी पड़े हैं। इन सभी स्टाल की आवंटन प्रक्रिया शुरु की गई है। बीते 18 सितंबर को राज्य के कृषि-विपणन मंत्री ने बैठक के बाद विभाग के मुख्य सचिव राजेश कुमार सिन्हा और सीईओ जयदीप दत्ता गुप्ता की उपस्थिति मे पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया था कि स्टाल और सालबाड़ी व फासीदेवा किसान मंडी मे वेट ब्रिज (वजन पुल) खुली नीलामी प्रक्रिया के तहत आवंटित किए जाएंगे। वहीं दूसरी ओर वेट ब्रिज के लिए ऑफर लेटर भी जारी कर दिया गया है।

सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट के सचिव तमाल दास से मिली जानकारी के अनुसार स्टाल लेने को इच्छुक व्यापारी को एक फॉर्म खरीद कर जमा करना होगा। सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट वाली स्टाल के लिए फॉर्म कि कीमत तीन हजार, सलबाड़ी के लिए दो हजार और फांसीदेवा के लिए एक हजार रखा गया है। साथ ही तीन हजार सात सौ रुपए का एक डिमाड ड्राफ्ट भी जमा कराना होगा। सभी आवेदन एक ड्रॉप बॉक्स में डाले जाएंगे। जो महालया के पहले सब के सामने खुलेगी। सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट मे स्टॉल की आधार कीमत डेढ़ लाख और दो लाख रुपये निर्धारित है। वहीं सालबाड़ी में एक लाख और फासीदेवा का पचास हजार रुपये तय है। फॉर्म में आधार कीमत से अधिक भरने वाले प्रथम 91 व्यापारियों को स्टाल आवंटित किया जाएगा। सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट के इतिहास मे पहली बार स्टाल आवंटन के लिए गुप्त नीलामी की प्रक्रिया अपनाई गई है। इसके पहले खुली नीलामी के तहत स्टाल आवंटित किए गए हैं। जारी किए फार्म की नियमावली संख्या में कहा गया है कि जिनका सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट के प्रिंसिपल यार्ड में दो स्टाल या गोडाउन है, उनका आवेदन रद्द हो जाएगा। बल्कि एक परिवार से एक ही फॉर्म मान्य होगा। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि प्रिंसिपल यार्ड मे स्टाल धारक सालबाड़ी और फासीदेवा किसान मंडी मे स्टाल के लिए आवेदन कर सकते हैं या नहीं। इसके अतिरिक्त आवेदकों मे किसका प्रिंसिपल यार्ड मे दो स्टाल या गोडाउन है, उसे चिन्हित किए जाने की प्रक्रिया भी स्पष्ट नहीं है। क्योंकि इस बार नीलामी टेंडर के अनुकूल गुप्त है। क्यों है पूरी प्रक्रिया संदिग्ध

मार्केट सचिव तमाल दास ने बताया कि इस प्रक्रिया से राज्य सरकार को राजस्व का काफी लाभ होगा। इसके अलावा इस प्रक्रिया मे दलाल राज का दाल गलना संभव नहीं है। लेकिन आवेदन और ड्रॉप बॉक्स की सुरक्षा समझ के परे है। जन नीलामी गुप्त है तो लिफाफे मे बंद आवेदनों को शील्ड बॉक्स मे रखना आवश्यक है। जबकि आवेदनों को सचिव कार्यालय के एक कोने मे खुले ट्रे मे रखा गया है। उस कमरे मे सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट प्रिंसिपल यार्ड, फासीदेवा और सालबाड़ी के आवेदनों को तीन अलग-अलग ट्रे मे रखा गया है। जबकि सचिव का कमरा सीसीटीवी की निगरानी मे भी नहीं है। सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह है कि आवेदन फार्म पर प्रिंटेड मेमो नंबर और ना ही सीरियल नंबर दर्ज है। जेरोक्स फॉर्म पर हाथ से सीरियल नंबर बैठाया गया है। बल्कि हर सेक्शन के स्टाल के लिए अलग-अलग सीरियल नंबर फॉर्म पर दिया जा रहा है। जिसका लेखा-जोखा कार्यालय के एक अस्थाई कर्मचारी रख रहे हैं।

राजस्व बढ़ने का दावा कितना सही

सचिव के मुताबिक इस गुप्त नीलामी की प्रक्रिया मे सरकार को राजस्व का लाभ होगा। लेकिन गणना में राजस्व का काफी नुकसान दिख रहा है। बीस वर्ष पहले मई-2000 मे सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट प्रिंसिपल यार्ड के फल-सब्जी मंडी मे स्टाल की खुली नीलामी हुई थी। जिसमे स्टाल नंबर टीजी-19 करीब 12 लाख और टीजी-25 करीब 8 लाख रुपए मे बिकी थी। 600 वर्गफीट वाले इन स्टाल की प्रति वर्गफीट कीमत आज से बीस वर्ष पहले 2600 और 1400 रुपये से अधिक थी। जबकि इस बार आवंटित हो रहे 150 वर्गफीट वाले स्टालों की कीमत 1300 रुपया प्रति वर्गफीट निर्धारित किया गया है।

किस तरह से हो रही है उगाही की तैयारी

सिलीगुड़ी रेगूलेटेड मार्केट के प्रिंसिपल यार्ड में 64 स्टालों का आवंटन होना है। वहीं सालबाड़ी और फांसीदेवा किसान मंडी में स्टालों के साथ एक-एक वेट ब्रिज का भी आवंटन होगा। इन 64 स्टालों पर दो दलाल की नजर है। जबकि वेट ब्रिज पर एक दलाल टकटकी लगाए हुए है। स्टालों पर नजर टिकाये दोनों दलाल कहने को तो व्यापारी हैं,लेकिन धंधा कुछ और है। रेगुलेटेड मार्केट में इनका स्टाल भी है। लेकिन इनका मुख्य व्यापार अवैध रुप से स्टसलों की खरीद-बिक्री कराना, लाइसेंस बनवाना, ताला लगवाना और फिर खुलवाना है। ये लोग स्टालों की हेरा-फेरी से लेकर किसी भी प्रकार की समस्या को सुलझाने का ठेका लेते हैं। इनका सिलीगुड़ी रेगूलेटेड मार्केट कमेटी के कार्यालय में भी अड्डा जमता है। सूत्रों की माने तो इस गिरोह ने इच्छुक करीब चालीस व्यापारियों को स्टाल मुहैया कराने के लिए सात से आठ लाख रुपए प्रति स्टाल की वसूली की है और उनके नाम पर फॉर्म भी जमा कराया है। व्यापारियों का आरोप है कि गुप्त नीलामी की पूरी संदिग्ध प्रक्रिया दलालों को लाभ दिलाने के लिए ही बनाया गया है। क्योंकि खुले ड्राप बॉक्स (ट्रे) में रखे आवेदन के साथ छेड़छाड़ और जेरोक्स फॉर्म को बदलना कोई बड़ी बात नहीं है।

इस तरह की प्रक्रिया से धांधली होने की कोई संभावना नहीं है। काफी सोच-विचार कर पूरी प्रक्रिया बनाई गई है। आवंटन प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होगी। महालया के पहले ड्राप बॉक्स सभी के सामने खोलने का निर्णय लिया गया है। जल्द ही तिथि की घोषणा की जाएगी। -तमाल दास,सचिव,सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट कमेटी

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