चुनाव के पहले ममता बनर्जी को एक और झटका

चुनाव के पहले ममता बनर्जी को एक और झटका

-भाजपा ने बताया न्याय की जीत तृणमूल कांग्रेस खेमा में मायूसी जागरण संवाददाता सिलीगुड़ी

JagranMon, 01 Mar 2021 01:31 PM (IST)

-भाजपा ने बताया न्याय की जीत, तृणमूल कांग्रेस खेमा में मायूसी

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी :

मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को लेकर उच्चतम न्यायालय में मामला दर्ज कर चुनौती दिया था। सोमवार को वह इस याचिका को खारिज कर दिया गया। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बंगाल निवासी अबु साहेल की याचिका को खारिज कर दिया है। बताया गया कि दिसंबर में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यक्रम में हमले के बाद पश्चिम बंगाल के तीन आइपीएस अधिकारियों भोलानाथ पांडेय, प्रवीण त्रिपाठी और राजीव मिश्रा को केंद्रीय

प्रतिनियुक्ति पर बुला लिया गया था। बंगाल सरकार इसका विरोध करते हुए कहा था कि वह अपने अधिकारियों को रिलीज नहीं करेगी। हालांकि नियमों के का पलड़ा केंद्र की तरह ही झुका हुआ था। बताया गया कि भारतीय पुलिस सेवा एक अखिल भारतीय सेवा है। इंडियन पुलिस सर्विस कैंडर रुल्स 1954 के नियम छह के तहत केंद्र सरकार राज्य की सहमति के बिना ही आइपीएस अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर बुला सकती है। राज्य की सहमति मांगी जाती है परंतु यह नियम नहीं है। इसको लेकर गृहमंत्रालय काफी सख्त था। लेकिन राज्य सरकार इस मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। अब मामला खारिज होने के कारण इन अधिकारियों को जाना ही पड़ेगा। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव व बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि वे और उनकी पार्टी न्याय का सम्मान करते है। बंगाल में जिस प्रकार

पुलिस का राजनीतिकरण किया गया है लेकिन चुनाव निकट आते देख अब इसका अपराधीकरण कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि क्या ममता जी के राज में भाजपा के लिए काम करना अपराध है? सिंडिकेट राज का सरगना कौन है पूछने पर सभी बताएंगें। पूरे प्रदेश में आराजकता का माहौल है। उन्होंने कहा कि इस फैसला से यह निश्चित हो गया कि भाजपा कोई भी कदम राजनीतिक से प्रेरित होकर नहीं उठाती। उन्होंने राज्य सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि बंगाल जादू के लिए काफी चर्चित है। इन दिनों बंगाल में जादू पुलिस दिखाती है। यहां भाजपा के विधायक की हत्या कर दी जाती है लेकिन पुलिस के आला अधिकारी कहते है यह तो आत्महत्या है। इससे बढ़कर और जादू क्या हो सकता है। शर्म की बात है कि जिस चक्रवाती तुफान में लाखों परिवार पीडि़त हो गये और प्रधानमंत्री ने पहुंचकर हजार करोड़ रुपया दिया,लेकिन उसमें भी भ्रष्टाचार हुआ है। इसकी जांच होगी तो तृणमूल कांग्रेस कहेगी कि यह राजनीति है। वही दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस की ओर से कहा गया कि सभी जानते है कि केंद्र सरकार कैसे अपने पावर का दुरुपयोग कर रही है।

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