विदेश से कॉल डायवर्ट,भला कैसे पकड़ पाएगी पुलिस

-सिलीगुड़ी साइबर थाने में मुकदमों का अंबार -कुछ मामलों में गिरफ्तारी तो कुछ की जांच जारी

JagranFri, 30 Jul 2021 08:26 PM (IST)
विदेश से कॉल डायवर्ट,भला कैसे पकड़ पाएगी पुलिस

-सिलीगुड़ी साइबर थाने में मुकदमों का अंबार

-कुछ मामलों में गिरफ्तारी तो कुछ की जांच जारी

-किंगपिन संतू दास अभी भी राडार से बाहर -मुख्य आरोपित संतू दास के नेपाल में रहने की संभावना

-वहीं से पूरे उत्तर बंगाल में नेटवर्क कर रहा है संचालित मोहन झा, सिलीगुड़ी : ऑनलाइन फ्रॉड के मामले पूरे देश की पुलिस के साथ ही सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के साईबर क्राइम थाने में भी ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों का अंबार लगा हुआ है। जबकि अधिकतर मामलों की जांच इंटरनेट मीडिया और मोबाइल नंबरों के महाजाल में उलझ कर रह गई है। ऐसे ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों की जांच में पुलिस जुटी हुई है, लेकिन अभी सतर्कता ही बचने का सबसे बड़ा हथियार है।

फ्रेंड्स क्लब और फर्जी कॉल सेंटर की आड़ में ऑनलाइन सेक्स के जाल में फांसकर ठगी के कई मामलों में सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस की साईबर क्राइम थाने को सफलता मिली है। बल्कि सुरागों के आधार पर सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस ने छापेमारी कर सिलीगुड़ी में चल रहे कई फर्जी कॉल सेंटर और फ्रेंड्स क्लब को बंद भी कराया। फ्रेंड्स क्लब और फर्जी कॉल सेंटर की आड़ में ऑनलाइन सेक्स का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह के कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। हालांकि अब तक इस गिरोह का किंगपिन माना जाने वाला संटू दास पुलिस के हाथ नहीं लगा है। पुलिस सूत्रों की मानें तो वह पड़ोसी देश नेपाल में बैठकर सिलीगुड़ी और आस-पास के इलाकों में फर्जी कॉल सेंटर व फ्रेंड्स क्लब के नेटवर्क को चला रहा है। लेकिन इसके बाद भी ऑनलाइन सेक्स के चक्कर में लूट के कई मामलों में पुलिस के हाथ अभी भी खाली है।

इसके अतिरिक्त सोशल साइटों पर फर्जी अकाउंट के जरिए लोगों को झांसे में डालकर ठगी, ऑनलाइन जॉब, वर्क फ्रॉम होम आदि मामलों में पुलिस की जांच मोबाइल नंबरों के महाजाल में उलझी हुई है। साइबर क्राइम थाना पुलिस की मानें तो शिकार के मोबाइल नंबर पर ठगों के द्वारा की गई फोन कॉल इंटरनेट के मार्फत की जाती है। इंटरनेट के सहारे कॉल को हागकांग, मलेशिया, दुबई आदि देशों से डाइवर्ट कर किया जाता है। जिसकी वजह से मोबाइल नंबर और इंटरनेट का आईपी एड्रेस को ट्रेस कर पाना काफी कठिन हो जाता है। जबकि फेसबुक व अन्य सोशल साइटों के मार्फत किए गए ऑडियो व वीडियो कॉल और फर्जी अकाउंट का आईपी एड्रेस आदि कंपनी की ओर से पुलिस को दी ही नहीं जाती है। बार-बार ई-मेल के मार्फत सहायता की गुहार लगाने के बाद भी सोशल साइट प्रबंधन के लोग जानकारी देने से पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि कई मामलों में तो सोशल साइट व एप को ही बंद कर दिया जाता है। फ्रॉड रोकने के लिए क्या आवश्यक

1.सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के साइबर एक्सपर्ट का मानना है कि ऑनलाइन फ्रॉड को नियंत्रित करने में सोशल साइट जैसे फेसबुक आदि के प्रबंधन की भागीदारी काफी अहम है। इंटरनेट की सहायता से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों को सोशल प्लेटफॉर्म मुहैया कराने वाली इन संस्थाओं को भी तकनीक और टर्म एंड कंडीशन में काफी सुधार लाने की जरुरत है।

2. फेसबुक पर फर्जी अकाउंट व फर्जी प्रचार करने वालों पर लगाम लगाने की व्यवस्था करनी चाहिए। बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक मोबाइल नंबर, एक आईपी एड्रेस और एक व्यक्ति के फोटो से एक ही अकाउंट खोलने की व्यवस्था की जानी चाहिए। ताकि किसी और का फोटो व नाम इस्तेमाल कर फर्जी अकाउंट खोलने की प्रक्रिया ही बंद हो सके।

3.साथ ही फ्रॉड के मामलों में पुलिस की जांच में सहायता करने के लिए सोशल साइट प्रबंधन को एक सेल के गठन करने की जरुरत है। इसके साथ ही इंटरनेट के मार्फत कई देशों से डाइवर्ट होकर किए जाने वाले कॉल को ट्रेस करने के लिए पुलिस प्रशासन को भी अपनी तकनीक में इजाफा करने की आवश्यकता है।

देश के कई बड़े मेट्रोपोलिटन शहरों की भांति सिलीगुड़ी पुलिस ने भी अपनी तकनीक में इजाफा किया है। कई साइबर एक्सपर्ट अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। साथ ही साइबर से जुड़े मामलों की जांच के लिए पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। साइबर क्राइम के मामलों की जांच की पुलिस हर संभव कोशिश कर रही है। सोशल साइट प्रबंधन की ओर से हमेशा ही पल्ला झाड़ने की कोशिश होती है लेकिन पुलिस अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही है। ऑनलाइन फ्रॉड के कई मामलों को निपटाने में भले ही देर हो रही हो, लेकिन पुलिस लगातार कोशिश में जुटी हुई है।

-गौरव शर्मा,पुलिस कमिश्नर,सिलीगुड़ी

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