नर्सिग होम का एक ही फंडा,लूट सको तो लूट लो

-शहर में जारी है लाखों की वसूली का खेल -बड़े तो बड़े झोला छाप अस्पताल भी किसी से पीछे

JagranMon, 07 Jun 2021 06:54 PM (IST)
नर्सिग होम का एक ही फंडा,लूट सको तो लूट लो

-शहर में जारी है लाखों की वसूली का खेल

-बड़े तो बड़े झोला छाप अस्पताल भी किसी से पीछे नहीं

-टास्क फोर्स की भूमिका पर लगा सवालिया निशान इलाज के नाम पर लूट-1 सरकार चाहे जितने भी दावे कर ले,लेकिन वास्तविकता यह है कि शहर के नर्सिग होम बेलगाम हो गए हैं। कोरोना इलाज के नाम पर लाखों रुपये की वसूली की जा रही है और कोई भी इनको रोकने वाला नहीं है। हम आने वाले कुछ दिनों तक हम ऐसे ही कुछ नर्सिग होम की लूट का खुलासा करेंगे। जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : कोरोना वायरस महामारी के इस दौर में शहर के कुछ निजी अस्पतालों और नìसग होम प्रबंधन का इलाज के नाम पर मनमानी तरीके से पैसे वसूलने का क्रम जारी है। इन्होंने कोरोना मरीजों की चिकित्सा को अपना लूट का हथियार बना लिया है। ये बस एक ही मकसद पर काम कर रहे हैं,लूट सको तो लूट लो। जबकिउ जिला प्रशासन अभी भी पूरी तरह से मौन धारण किए हुए है। पिछले दिनों निजी अस्पतालों तथा निजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों की मनमानी की कई शिकायतें मिली। उसके बाद स्वास्थ विभाग की ओर से ऐसे निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही गई। टास्क फोर्स गठित किया गया। लेकिन यह सब मात्र दिखावा साबित हो रहा है। टास्क फोर्स कहां है,क्या कर रहा है किसी को पता नहीं है। लूट का आलम यह है कि क्या बड़े और क्या छोटे,सभी नर्सिग होम बहती गंगा में अपनी हाथ धो रहे हैं। इलाज के नाम पर दोनों हाथों से धन बटोरने में लगे हैं। सिलीगुड़ी व आसपास के क्षेत्रों में कुछ ऐसे ऐसे निजी नर्सिग होम और डायग्नोस्टिक सेंटर हैं,जिनका नाम कभी किसी ने नहीं सुना,ये लोग भी लाखों की बिल ठोक रहे हैंनाम सामने आ रहे हैं जो पहले कभी सुने नहीं जाते थे, कोरोनावायरस के इस दौर में वह भी मरीजों पर अपना हाथ साफ करने में पूरी तन्मयता से लगे हुए हैं। मरीजों व उनके परिजनों का आíथक व मानसिक रूप से जमकर शोषण कर रहे हैं। जबकि से देखने वाला तथा इस पर लगाम लगाने वाला कोई भी प्रशासनिक अधिकारी व स्वास्थ विभाग सामने नहीं आ रहा है। जिस तरह कोरोना वायरस महामारी से भारत समूत पूरी दुनिया जूझ रही है। इससे पश्चिम बंगाल तथा दाíजलिंग जिला भी अछूता नहीं है। पूरे राज्य की तरह दाíजलिंग जिले में भी हर दिन कोरोना के नए-नए मामले आ रहे हैं। कोरोना के दूसरे चरण में सैकड़ों लोग काल के गाल में समा गए। कोई करो ना से संक्रमित हो कर के मर रहा है तो कोई कोरोनावायरस जीतने के बावजूद नई मुसीबत ब्लैक फंगस से पीड़ित होकर जान गवा रहा है।

हालाकि कोरोना काल में सिलीगुड़ी के काफी संख्या में डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, सामाजिक संगठन व प्रशासन के लोग इस बीमारी से पीड़ित मरीजों व उनके परिजनों की सहायता में दिन-रात एक कर मानवता का परिचय दे रहे हैं। वहीं,दूसरी ओर शहर के कुछ निजी अस्पताल, निजी लैब व एंबुलेंस चालक इस आपदा को अपने व्यवसाय का साधन मानकर इलाज के नाम जिस तरह से मरीजों व उनके परिजनों को लूट रहे हैं, इससे वे पूरी मानवता को शर्मसार करने में भी पीछे नहीं रह रहे हैं।

पहले हमने बताया कि किस तरह से इलाज तथा मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के नाम पर शहर के कुछ निजी अस्पतालों तथा एंबुलेंस चालकों, निजी डायग्नोस्टिक सेंटर और लैबोरेट्री ने लूट मचा रखी है। इस तरह की लूट मचाने की हिम्मत ये निजी संस्थान कहा से लाते हैं, यह लोगों के मन में गंभीर सवाल बना हुआ है।

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