कोरोना का खौफ नहीं,भीड़ अनियंत्रित

-विसर्जन में प्रोटोकॉल की उड़ी धज्जियां -लोगों की गहमा-गहमी में पुलिस भी लाचार -दूसरे दिन

JagranSat, 16 Oct 2021 08:14 PM (IST)
कोरोना का खौफ नहीं,भीड़ अनियंत्रित

-विसर्जन में प्रोटोकॉल की उड़ी धज्जियां

-लोगों की गहमा-गहमी में पुलिस भी लाचार

-दूसरे दिन भी महानंदा घाट पर मां को विदाई

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी। दुर्गाेत्सव की समाप्ति के बाद इस बात की चर्चा जोर-शोर से हो रही है कि कही प्रतिमा विसर्जन के दौरान होने वाली अनियंत्रित भीड़ भविष्य के लिए खतरे की घंटी न बन जाए। जी हां, जिस तरह से प्रतिमा विसर्जन के दौरान हिलकार्ट रोड इलाके में लाखों की भीड़ उमड़ी थी, उसे देखते हुए तो यही अंदेशा जताया जा सकता है। कोविड की परिस्थितियों को देखते हुए पूजा का आयोजन तय नियमों के अनुसार करने की अनुमति दी गयी थी। पूजा मंडपों में भी भक्तों की भीड़ रही, लेकिन हद तब हो गयी जब विसर्जन के दौरान सभी नियमों को ताक पर रख दिया गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए काफी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रही, लेकिन भीड़ के सामने इनकी एक न चली। पुलिस भी इतनी अधिक संख्या में लोगों की गहमा-गहमी देखकर लाचार नजर आई। हालांकि देर रात तक पुलिस बल को काफी मुस्तैदी के साथ अपनी जिम्मेवारियों का निर्वहन करते देखा गया। लेकिन भीड़ पर इनकी एक नहीं चली। विशेषज्ञों की ओर से बार-बार कहा जा रहा है कि कोविड अभी गया नहीं है, इसलिए लापरवाही भारी पड़ सकती है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि कोरोना की तीसरी लहर को लेकर एक अंदेशा अब भी बना हुआ है।

दूसरी ओर सिंदूरदान के साथ मां दुर्गा को विदाई दी गई। हांलाकि शनिवार को दूसरे दिन भी देवी की प्रतिमाओं का विसर्जन धूमधाम से किया गया। सुबह से ही श्रद्धालु देवी की प्रतिमा करने घाटों पर पहुंचने लगे थे। वहीं विसर्जन के दौरान कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ती देखी गई। ना ही लोग मास्क पहने नजर आए ना ही शारीरिक दूरी का पालन किया गया। भीड़ को देख लग रहा था कि कोरोना जैसी बीमारी खत्म हो गई है। विसर्जन के समय भी खूब भीड़ हुई। किसी प्रकार की गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा था। ऐसे कुछ स्थानों पर श्रद्धालु कोरोना महामारी से स्वयं को बचाते हुए नजर आए। मास्क पहनने के साथ बार-बार हाथों को सैनेटाइज करते हुए नजर रहे थे। जबकि अवसर को लेकर पूजा पंडालों में चहल-पहल देखी गई। सुहागिनों के द्वारा देवी दुर्गा को सिंदूर लगाकर सुहाग दीर्घायु की कामना की गई। मिठाई, फल, सुपारी सहित अन्य पूजन सामग्री के साथ देवी को सिंदूर लगाया गया। इसको लेकर महिलाओं का उत्साह देखने लायक था। एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर पर्व की बधाई दी। सिंदूर खेला हुआ। इसी क्रम में घरों और मंडपों में स्थापित मां की प्रतिमा का पूजन कर विसर्जन किया गया। कोरोना की वजह से कई पूजा पंडालों में बहुत ही सादगी के साथ देवी की आराधना की गई। जगह-जगह पर लगे चाट-पुचकों और अन्य स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद लेते दिखे लोग।

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