कूचबिहार से आने लगी है निजी बसें

- डबल किराया लेने से भी नहीं होगा कोई लाभ -एक बस में मात्र सात से आठ यात्रीमालिक टेंशन

JagranFri, 09 Jul 2021 10:11 PM (IST)
कूचबिहार से आने लगी है निजी बसें

- डबल किराया लेने से भी नहीं होगा कोई लाभ

-एक बस में मात्र सात से आठ यात्री,मालिक टेंशन में

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी: निजी बस मालिकों की समस्या दूर नहीं हो रही है। एक तो कोरोना काल और ऊपर से पेट्रोलियम पदार्थो की कीमत इतनी बढ़ गई है कि उन्हें बस चलाना मुश्किल हो रहा है। यही कारण है कि उत्तर बंगाल में यदि कूचबिहार को छोड़ दें तो कहीं भी निजी बसों की आवाजाही शुरू नहीं हुई हुई है। हांलाकि कूचबिहार से बचें चलने लगी है। पिछले दिनों वहा के बस मालिक संगठनों ने बैठक कर बस चलाने का निर्णय लिया था। इसी कड़ी में कूचबिहार से कई बसें आज सिलीगुड़ी भी पहुंची लेकिन बसों में यात्रियों की संख्या लगभग नहीं के बराबर थी। इससे निजी बस मालिक टेंशन में हैं। बस मालिकों का कहना है कि लगता है कि किराया बढ़ाने के बाद भी कोई फायदा नहीं होगा। यदि यात्रियों से डबल किराया भी लें तो भी बस चलाने के लिए जेब से ही पैसे लगाने पड़ेंगे। पता नहीं कितने दिनों तक यह स्थिति बनी रहेगी। दूसरी तरफ सिलीगुड़ी के निजी बस मालिक अभी भी बस चलाने के लिए तैयार नहीं हैं। एक तो वह किराया बढ़ाने की माग कर रहे हैं और दूसरा उन्हें भी इस बात की चिंता सताने लगी है कि यदि सड़क पर बस उतार भी दें तो यात्री भला कहा से आएंगे। ऐसे में बस चलाने में मुश्किल ही होगी। यह पूरी तरह से घाटे का सौदा होगा।

यहां बता दें कि किराया बढ़ने की उम्मीद पर पानी फिरने से निजी बस मालिकों का मनोबल भी टूट गया है। छूट मिलने के एक सप्ताह बाद भी इस मामले में कोई हल नहीं निकला है। शुक्रवार को भी इस मामले को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। सड़कों पर निजी बसें ने ही चल रही है। जबकि अधिकांश बस मालिक जेब से रुपया लगाकर सेवा देने के पक्ष में नहीं हैं। पूरे उत्तर बंगाल में कमोबेश यही स्थिति है। जिससे साफ हो जाता है कि बस मालिक भी बगैर किराया बढ़ाए बस चलाने के लिए तैयार नहीं हैं।

यहां बता दें कि आंशिक लाकडाउन में छूट देने के साथ राज्य सरकार ने प्रचास प्रतिशत यात्रियों के साथ यातायात शुरु करने का निर्देश दिया। राज्य सरकार के निर्देशानुसार एनबीएसटीसी ने परिसेवा शुरु कर दी। साथ ही राज्य के विभिन्न इलाकों के साथ पड़ोसी राज्य बिहार, उत्तर प्रदेश और असम के बीच चलने वाली नाइट सुपर निजी बस मालिकों ने भी रुट के अनुसार बारी-बारी से सेवा शुरु कर दी है। लेकिन सिलीगुड़ी से उत्तर बंगाल के विभिन्न इलाकों के बीच चलने वाली निजी बस के मालिकों ने सेवा शुरु नहीं की है। उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत में भारी वृद्धि के साथ क्षमता के आधी सवारी लेकर बस चलाने में उनका काफी नुकसान है। निजी बस मालिक संगठन ने किराये में बढ़ोत्तरी की मांग राज्य सरकार से किया है। किराया बढ़ोत्तरी को लेकर राज्य सरकार के साथ बीते सोमवार को हुई बैठक विफल रही। किराया बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार ने विचार-विमर्श करने के साथ बस सेवा शुरु करने की अपील बस मालिकों से की है। क्या कहना है बस मालिकों के संगठन का

नॉर्थ बंगाल पैसेंजर ट्रांसपोर्ट ओनर को-ऑर्डिनेशन कमेटी के सचिव प्रणव मणि ने बताया कि डीजल की कीमत में 25 रुपए का इजाफा हुआ है। कोरोना के इस काल में क्षमता से आधी सवारी के बाद डबल सीट का किराया लेने पर भी रोक है। ऐसी स्थिति में बस चलाना नुकसान का सौदा है। उन्होंने आगे कहा कि बीते वर्ष लाकडाउन के बाद क्षमता से आधी सवारी के साथ डबल सीट का किराया यात्री से लेने की अनुमति थी। उसके बाद भी 80 प्रतिशत बस मालिकों ने हाथ खड़ा कर दिये थे। जबकि डीजल की कीमत भी 25 रुपए कम ही थी। अब सौ रुपए के करीब प्रति लीटर डीजल खरीद कर पुराने किराए पर क्षमता से आधी सवारी के साथ सेवा मुहैया कराना मुमकिन नहीं है। इसलिए बस चलाने या नहीं चलाने का निर्णय मालिकों पर छोड़ दिया है। कर्मचारी बुरी तरह से प्रभावित

जानकारी के मुताबिक सिलीगुड़ी से उत्तर बंगाल के विभिन्न इलाकों के बीच करीब छह हजार निजी बसें चलती थी। वो सभी बसें फिलहाल खड़ी हैं। छह हजार बस में से अधिकांश बसों में चालक व खलासी व कर्मचारी मिलाकर पांच कर्मचारी नियुक्त हैं। इस आधार पर बसों का संचालन बंद रहने से करीब तीन लाख कर्मचारी व उनके परिवार का भरण-पोषण राम भरोसे है।

यहां बता दें कि आंशिक लाकडाउन में छूट देने के साथ राज्य सरकार ने प्रचास प्रतिशत यात्रियों के साथ यातायात शुरु करने का निर्देश दिया। राज्य सरकार के निर्देशानुसार एनबीएसटीसी ने परिसेवा शुरु कर दी। साथ ही राज्य के विभिन्न इलाकों के साथ पड़ोसी राज्य बिहार, उत्तर प्रदेश और असम के बीच चलने वाली नाइट सुपर निजी बस मालिकों ने भी रुट के अनुसार बारी-बारी से सेवा शुरु कर दी है। लेकिन सिलीगुड़ी से उत्तर बंगाल के विभिन्न इलाकों के बीच चलने वाली निजी बस के मालिकों ने सेवा शुरु नहीं की है। उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत में भारी वृद्धि के साथ क्षमता के आधी सवारी लेकर बस चलाने में उनका काफी नुकसान है। निजी बस मालिक संगठन ने किराये में बढ़ोत्तरी की मांग राज्य सरकार से किया है। किराया बढ़ोत्तरी को लेकर राज्य सरकार के साथ बीते सोमवार को हुई बैठक विफल रही। किराया बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार ने विचार-विमर्श करने के साथ बस सेवा शुरु करने की अपील बस मालिकों से की है। क्या कहना है बस मालिकों के संगठन का

नॉर्थ बंगाल पैसेंजर ट्रांसपोर्ट ओनर को-ऑर्डिनेशन कमेटी के सचिव प्रणव मणि ने बताया कि डीजल की कीमत में 25 रुपए का इजाफा हुआ है। कोरोना के इस काल में क्षमता से आधी सवारी के बाद डबल सीट का किराया लेने पर भी रोक है। ऐसी स्थिति में बस चलाना नुकसान का सौदा है। उन्होंने आगे कहा कि बीते वर्ष लाकडाउन के बाद क्षमता से आधी सवारी के साथ डबल सीट का किराया यात्री से लेने की अनुमति थी। उसके बाद भी 80 प्रतिशत बस मालिकों ने हाथ खड़ा कर दिये थे। जबकि डीजल की कीमत भी 25 रुपए कम ही थी। अब सौ रुपए के करीब प्रति लीटर डीजल खरीद कर पुराने किराए पर क्षमता से आधी सवारी के साथ सेवा मुहैया कराना मुमकिन नहीं है। इसलिए बस चलाने या नहीं चलाने का निर्णय मालिकों पर छोड़ दिया है। कर्मचारी बुरी तरह से प्रभावित

जानकारी के मुताबिक सिलीगुड़ी से उत्तर बंगाल के विभिन्न इलाकों के बीच करीब छह हजार निजी बसें चलती थी। वो सभी बसें फिलहाल खड़ी हैं। छह हजार बस में से अधिकांश बसों में चालक व खलासी व कर्मचारी मिलाकर पांच कर्मचारी नियुक्त हैं। इस आधार पर बसों का संचालन बंद रहने से करीब तीन लाख कर्मचारी व उनके परिवार का भरण-पोषण राम भरोसे है।

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