सभी प्रकार के प्रदूषण की ओर ध्यान दे प्रशासन

-पर्यावरण प्रेमियों ने कहा उत्तर बंगाल में चलाए जाए अभियान

-विश्वकर्मा पूजा से से लेकर छठ तक विशेष निगरानी की मांग

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : जल, वायु व ध्वनि प्रदूषण से बीमार हो रहे लोगों और पर्यावरण पर पड़ रहे प्रतिकूल असर हो रहा है। इसकी ओर प्रशासन को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्था नैफ काफी चिंतित है। नैफ के सचिव शंकर मजुमदार ने कहा कि शहर में जिस प्रकार लगातार कंक्रीट के इमारत बनते जा रहे है उससे यहां का पर्यावरण लगातार प्रभावित हो रहा है। लगातार जाम के कारण घंटों वाहन के खड़ा रहने और निकलने वाले धुंआ से ध्वनि प्रदूषण फैल रहा है। चंपासारी समर नगर इलाके में आदा घाट में जल प्रदूषण लगातार फैल रहा है। उत्तर बंगाल में बहने वाली नदियों की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। इसपर विश्वकर्मा पूजा के साथ ही छठ पूजा तक विशेष निगरानी की जरूरत है। शहर में ऑटो समेत देश विदेश से इस क्षेत्र में लगातार बढ़ने वाली वाहनों की शोर ध्वनि प्रदूषण फैला रहा है। इसको लेकर चलाए जा रहे अभियान को लेकर राज्य प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड सिर्फ सख्ती की घोषणा करती है। इसपर सख्ती से अबतक कोई भी काम नहीं हो रहा है। उत्तर बंगाल के सभी जिला प्रशासन को हिदायत दी है कि वायु व ध्वनि प्रदूषण में विराम लगाएं। जो संस्थाएं या व्यक्ति प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियम का पालन न करें उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। विभिन्न क्षेत्र तथा आबादी क्षेत्र के निकट सडक के किनारे तमाम स्टोन क्रशर्स स्थापित तथा संचालित है। स्टोन क्रशर के चलने से उत्पन्न डस्ट से निकटवर्ती क्षेत्र मे वायु प्रदूषण, पब्लिक, न्यूसेंस एवं कृषि भूमि पर धूल की परत जमा होने की समस्या उत्पन्न हो रही है। तमाम लोग गंभीर बीमारी से भी ग्रसित हो रहे है। ऐसी स्थिति में क्रशर संचालकों के निर्देश दिए जाते है कि जो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियम है उनका अनुपालन सुनिश्चित कर लें। यदि स्टोन क्रशर्स संचालको ने डस्ट उत्सर्जन के प्रभावी नियंत्रण हेतु पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं की जाती है तो ऐसी स्थित में जिला प्रशासन एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आवश्यक कार्यवाही को बाध्य होगा। वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम की अवहेलना एवं उल्लंघन की दशा मे स्टोन ग्रिट एवं डस्ट उत्पादन कार्य स्वत: बंद किया जाना भी बाध्यकारी होगा।

यह करें व्यवस्था

-स्टोन क्रशर्स परिसर की चारों दिशाओं में भूतल से लगभग 4.0 मी ऊंची बाउण्ड्रीवाल

-परिसर की खुली भूमि पर बाउण्ड्रीवाल के किनारे किनारे चारो ओर संघन वृक्षारोपण

- ग्रिट एवं डस्ट कन्वेयर्स को अनिवार्य रुप से मैटल सीट से आच्छादित किया जाय।

रात 10 के बाद ध्वनि विस्तारक बजाया तो जाएंगे जेल

जिला प्रशासन को कहा गया है कि वर्तमान में यह देखा जा रहा है कि विभिन्न अवसरों पर रात्रि दस बजे के बाद भी ध्वनि विस्तारण यंत्रों तथा डीजे, बैण्ड, लाउडीस्पीकर आदि का प्रयोग होता है। जिससे मानव स्वास्थ्य पर गम्भीर प्रभाव पड रहा है। उच्च न्यायालय ने आदेश के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में हार्न, ध्वनि, विस्तारक यंत्र, पटाखे, बैंड बाजे आदि रात दस बजे से सुबह छह बजे तक प्रतिबंधित है। जिसके कडाई से अनुपालन हेतु निर्देश दिये गये है। ऐसा नहीं करने पर जुर्माने के साथ कारावास का दण्ड भी सम्मिलित है। परंतु वास्तव में कागज पर यह दिखाया तो जाता है परंतु धरातल पर यह नजर नहीं आता।

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