एक बार फिर हिम्मत पुलिस रिमांड पर, आज से करेंगे अनशन

-दी चेतावनी अन्न जल के साथ छोड़ देंगे दबा भी लेना -कोर्ट में पुलिस पर लगाया आरोप रिमांड लेकर पुलिस नहीं करती कोई कार्रवाई

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के प्रधाननगर थाना की पुलिस द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा के आरोप में तीन अगस्त को गिरफ्तार टीएमसी नेता हिम्मत सिंह चौहान को बुधवार को एकबार फिर पुलिस ने कोर्ट से तीन दिनों के रिमांड पर लिया है। कोर्ट में पेशी के दौरान बार-बार नये मामले डालकर रिमांड पर लिए जाने को लेकर आरोपित हिम्मत सिंह चौहान कोर्ट में खिन्न दिखें। उन्होंने कोर्ट परिसर में मीडिया से कहा कि उन्हें लगता है कि उनकी हत्या की साजिश तो नहीं है। कई गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने के बाद भी उन्हें पुलिस रिमांड लेकर हाजत में बैठाए रहती है। पुलिस के इस रवैया से आज से ही वे अन्न जल के साथ दवा लेना भी छोड़ देंगे। उनके इस घोषणा के बाद परिवार वालों ने भी उनके साथ अनशन करने का एलान किया है। कोर्ट में बुधवार को हिम्मत ने अपने बचाव के लिए किसी वकील को भी नहीं रखा था। उन्होंने स्वयं ही अपना बहस करते हुए कहा कि वे कई बीमारियां से ग्रस्त है। इस बात को पुलिस जानती है। बार-बार झूठे मामले में उसे रिमांड पर लिया जाता है। रिमांड को लेकर उनका विरोध नहीं है। विरोध है कि उनसे न तो संबंधित मामले में पूछताछ की जाती है और ना ही उसके खिलाफ कोई साक्ष्य ही अबतक पुलिस को मिला है। अनाप शनाप बातें पूछकर उन्हें पुलिस उनकी बीमारी को बढ़ाने में लगी है। क्यों उन्हें पिछले एक माह से रिमांड पर लेकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। क्या हिंदीभाषी होने की सजा वे भोग रहे है। उन्हीं की तरह कभी राजनीति में आगे बढ़ रहे बीडी सिंह के साथ भी पुलिस के द्वारा ऐसा ही किया गया था। हिम्मत ने एक बार फिर दाबा किया कि उन्हें जमीन माफिया के नाम से दुष्प्रचारित किया गया। मेरे खिलाफ जो भी मामला है उसे एक बार सामने लाकर पुलिस जांच करें। अगर वे दोषी पाए जाते है तो कार्रवाई करें। कोर्ट से प्रधाननगर थाना की पुलिस ने छठी बार हिम्मत को पुलिस रिमांड लिया है। इसी प्रकार के मामले में पुलिस कमिश्नरेट से कई लोगों को जेल भेजा गया है। प्रधाननगर थाना कांड संख्या 453, कांड संख्या 431 और कांड संख्या 193 दर्ज किया गया है। इसमें आइपीएस की धारा 442, 468, 421, 420 और 120 बी के अलावा 'द प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट तथा वेस्ट बंगाल लैंड रिफॉर्म एक्ट के तहत कार्रवाई की गयी है। सरकारी जमीन को खरीद बिक्री के लिए दोषी है तो बीएलआरओ व राजस्व कर्मचारी। उसके खिलाफ क्यों एक्शन कोर्ट और पुलिस नहीं लेती। इसको लेकर लोगों में रोष देखा जा रहा है।

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