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प्रेमिका की हत्या करने वाले सिरफिरे आशिक को उम्र कैद

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गवाहों के बयान दर्ज

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-कोर्ट ने पचास हजार का जुर्माना भी लगाया

-पिछले 14 साल से जेल में बंद है दोषी

-प्यार और फिर धोखा देने का है मामला

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : 14 वर्ष जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद एक सिरफिरे आशिक को अतिरिक्त न्यायिक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही पचास हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अपनी प्रेमिका की हत्या का वह दोषी पाया गया है। अपराधी का नाम सुब्रत माइती है। वर्ष 2006 के फरवरी से ही उस पर एक महिला की हत्या का मुकदमा चल रहा था। बीते 14 वर्षो मे 44 गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी सुब्रत माइती को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। अपराधी ने सिलीगुड़ी फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले को चुनौती देने का मन बनाया है। कब और कैसे हुई हत्या

यहां बताते चले कि वर्ष 20016 के 20 फरवरी को सिलीगुड़ी के प्रधान नगर इलाके के एक होटल के शौचालय से एक महिला का शव बरामद हुआ था। मृतका की पहचान गीता पटनायक दास के रूप हुई। होटल के मैनेजर प्रफुल्ल बरुआ ने ही घटना कि शिकायत पुलिस से की थी। जानकारी के मुताबिक 19 फरवरी 2006 की शाम सुब्रत माइती ने गीता को अपनी पत्नी बताकर होटल आया था। अगली सुबह कमरे का दरवाजा बंद होने की वजह से होटल प्रबंधन को संदेह हुआ और पुलिस को बुलाया गया। पुलिस ने खिड़की से भीतर प्रवेश किया तो शौचालय मे गीता का शव बरामद हुआ। गीता के मुंह मे कपड़ा ठूंसा हुआ था और गले मे गमछा लपेटा हुआ था। बाद मे पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। वहीं सुब्रत का कुछ पता नहीं चला। बाद मे पुलिस ने इस मामले के मुख्य संदिग्ध सुब्रत माइती को पूर्व मेदिनीपुर से गिरफ्तार कर लिया और सिलीगुड़ी अदालत मे पेश किया। तब से सुब्रत माइती जेल की सलाखों के पीछे ही रहा। हालाकि कि जमानत के लिए उसने कई बार कलकत्ता हाइकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सीआईडी को सौंपी गई थी जांच की जिम्मेदारी

मामले कि संगीनता को देखते हुए इस मामले की छानबीन सीआईडी को सौंपी गई। सीआईडी द्वारा कोर्ट को दी गई जानकारी के मुताबिक सुब्रत माइती पूर्व मेदिनीपुर के बागुड़ इलाके का निवासी है। वह पेशे से बीमा कंपनी का कर्मचारी है। वहीं मृतका गीता पटनायक दास उसके बड़े भाई की साली थी। इन दोनों के बीच प्रेम पनपा और शारीरिक संबंध भी स्थापित हुआ। लेकिन सुब्रत के परिवार ने उसकी शादी दूसरी लड़की से तय की। हालाकि सुब्रत ने गीता से विवाह के लिए रजिस्ट्रार के यहां भी गया था, लेकिन किसी कारण से दोनों की शादी नहीं हो पाई। इसके बाद सुब्रत ने गीता को छोड़ने का मन बनाया। इसी उद्देश्य से वह गीता को घुमाने के बहाने दाíजलिंग ले गया। वहां से सिलीगुड़ी के प्रधान नगर स्थित उस होटल मे ठहरा। 19 फरवरी 2006 की रात को गीता को मौत के घाट उतार कर फरार हो गया। गीता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मुंह मे कपड़ा ठूंस कर गमछे से गला घोट कर उसकी हत्या की गई। सीआईडी द्वारा पेश की गई चार्ज शीट और 44 गवाहों के बयान के आधार पर सिलीगुड़ी फास्ट ट्रैक कोर्ट की अतिरिक्त जिला न्यायाधीश डॉ. मौमिता भट्टाचार्य ने भारतीय दंड विधान की धारा 302 के तहत दोषी करार दिया और शनिवार को सजा सुनाई।

क्या कहते हैं सरकारी वकील

सरकारी पक्ष के वकील अमिताभ मुखर्जी ने बताया कि गीता से छुटकारा पाने के लिए ही सुब्रत ने इस वारदात को अंजाम दिया था। अदालत ने बीते शुक्रवार सुब्रत माइती को दोषी करार दिया। शनिवार को सजा सुनाई। बीते 14 वर्ष मामला विचाराधीन रहने के दौरान सुब्रत जेल मे था। यह मामला कई अदालत मे स्थानातरित हुआ। इसके बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन हुआ। इन्ही कारणो कि वजह से इनती देर हुई। वहीं अपराधी सुब्रत माईती ने अपराध को अस्वीकार करते हुए कहा कि वह पिछले 14 वर्ष से जेल में है। उसने सिलीगुड़ी फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले को कलकत्ता हाइकोर्ट मे चुनौती देने कि बात कही है।

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