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इलेक्टेड नहीं सिलेक्टेड पर भरोसा करती है ममता बनर्जी, महामारी से लड़ने के लिए वह चुने हुए जनप्रतिनिधियों को महत्व नहीं देती: राजू बिष्ट

दार्जिलिंग के सांसद तथा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू बिष्ट

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इलेक्टेड नहीं बल्कि सिलेक्टेड लोगों पर विश्वास है। यही कारण है कि कोविड-19 जैसी महामारी से लड़ने के लिए वह चुने हुए जनप्रतिनिधियों को भी कोई महत्व नहीं देती। यह लोकतंत्र के लिए काफी खतरा है।

Vijay KumarWed, 12 May 2021 04:27 PM (IST)

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी: बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इलेक्टेड नहीं बल्कि सिलेक्टेड लोगों पर विश्वास है। यही कारण है कि कोविड-19 जैसी महामारी से लड़ने के लिए वह चुने हुए जनप्रतिनिधियों को भी कोई महत्व नहीं देती। आज भारतीय जनता पार्टी बंगाल में दो मोर्चे कोविड-19 के साथ चुनावी हिंसा के खिलाफ लड़ाई कर रही है। यह लोकतंत्र के लिए काफी खतरा है। यह कहना है दार्जिलिंग के सांसद तथा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू बिष्ट का। 

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों और नेताओं को चुनाव परिणाम के बाद डराया धमकाया जा रहा है। हमले हो रहे हैं,चाय बागानों पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। महिलाओं और बच्चों के अमानवीय व्यवहार हो रहा है। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। केंद्र सरकार को पता है कि बंगाल में ढाई करोड़ से अधिक मतदाताओं ने उन्हें अपना समर्थन दिया है। विरोधी दल होने के कारण बंगाल के सभी 10 करोड़ की जनता को सभी प्रकार की सुरक्षा देने के लिए हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी रहेगी। जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार सख्त से सख्त कदम उठाने को विवश होगी।

बुधवार को वे गुरुंग बस्ती में भाजपा एक नंबर मंडल के सचिव दीना गुप्ता के कोविड-19 दुखद मौत के बाद परिवार वालों से मिलने पहुंचे थे। परिवार को पार्टी की ओर से सभी प्रकार की सहायता का भरोसा दिलाया। उसके बाद चुनावी हिंसा में घायल भारतीय जनता युवा मोर्चा के महासचिव सौरव सरकार हाल-चाल लेने उनके घर पहुंचे थे। वहां से लौटकर सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में कोविड-19 और अन्य स्वास्थ्य मामलों की जानकारी लेने अस्पताल अधीक्षक से लंबी बातचीत की। सांसद के साथ सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष, जिला महासचिव राजू शाह और जिला सचिव कन्हैया पाठक मौजूद थे। पत्रकारों से बात करते हुए सांसद बिष्ट ने कहा कि पूरे देश में प्राकृतिक आपदा कोविड-19 लोगों को जिंदगी और मौत के बीच ला खड़ा किया है। बंगाल की स्थिति और भी खराब है। यह कोई आरोप नहीं बल्कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कहा जा रहा है। पिछले दिनों ही 62000 लोगों की जांच की गई जिसमें 30000 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जांच भी यहां तेजी से नहीं हो पा रहा है। जांच तेजी से करने पर हर दूसरा या तीसरा व्यक्ति यहां कोरोना पॉजिटिव पाया जाएगा। इसे हराने के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा जन जागरूकता जरूरी है।

सांसद ने कहा कि कोविड-19 के डेढ़ वर्ष और अपने संसदीय जीवन में 2 वर्ष से अधिक का समय बीत गया लेकिन कभी ममता सरकार  या जिला प्रशासन की ओर से विकास या स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कोई सलाह या बैठक नहीं की गई। दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कर यह सरकार आखिर क्या साबित करना चाहती है। अपने मनपसंद के लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठा कर वह लोकतंत्र का मजाक उड़ा रही है।

सांसद ने कहा कि बार-बार मुख्यमंत्री और पार्टी के नेता केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हैं कि उन्हें नहीं दी जाती जहां तक मेरी जानकारी है मई माह में एक करोड़ 25 लाख वैक्सीन दिए गए हैं। इतना ही नहीं कोविड-19 से लड़ने के लिए केंद्र सरकार ने 295 करोड़ राज्य सरकार को मुहैया कराए हैं। इन पैसों का कोविड-19 से लड़ने के लिए क्या उपयोग हुआ यह तो राज्य सरकार ही बता पाएगी। सांसद ने कहा कि जिला स्वास्थ्य अधीक्षक ने कहा कि यह 400 वर्ड है और सीमित संसाधन में सही चिकित्सा दी जा रही है। उन्हें आश्वासन दिया गया है कि जब भी किसी स्वास्थ्य संबंधित सुविधाओं की आवश्यकता हो वह उनसे संपर्क कर सकते हैं।

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