विधानसभा में महिलाएं बन रही मुद्दा

विधानसभा में महिलाएं बन रही मुद्दा

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक दलों का

JagranMon, 08 Mar 2021 10:42 PM (IST)

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक दलों का महिलाओं के मुद्दों पर जोर बढता जा रहा है । महिला दिवस के अवसर पर सिलीगुड़ी में माकपा और कांग्रेस की महिला संगठनों ने राज्य में महिलाओं की स्थिति और सुरक्षा को लेकर सड़क पर प्रदर्शन किया। इसके अलावा सत्तारूढ़ तृणमूल काग्रेस इस बार अब तक की सर्वाधिक 50 महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारने जा रही है , हालाकि भाजपा ने इस सब के बीच आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी सरकार के शासन तले महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ गए हैं।

महिलाओं को लुभाने के लिए तृणमूल अपने चुनाव अभियान में स्वास्थ्य साथीऔर कन्याश्री जैसी योजनाओं का जोर शोर से प्रचार कर रही है । उसका चुनावी नारा भी बंगाल को अपनी बेटी चाहिए है। तृणमूल ेनेता रंजन सरकार उर्फ राणा के अनुसार मुताबिक इस बार मतदाता देखेंगे कि अकेली महिला बंगाल के सम्मान की खातिर बाहर के लोगों से लड़ रही है। उन्होंने कहा,1998 में जब तृणमूल बनी थी तब से ममता बनर्जी ने हमेशा कोशिश की है कि पंचायत, नगर निकाय, राज्य या लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा महिला उम्मीदवारों को खड़ा किया जाए।महिलाओं को लुभाने के लिए तृणमूल अपने चुनाव अभियान में स्वास्थ्य साथी और कन्याश्री जैसी योजनाओं का जोर शोर से प्रचार कर रही है। उसका चुनावी नारा भी च्बंगाल को अपनी बेटी चाहिए है। इस बार मतदाता देखेंगे कि अकेली महिला बंगाल के सम्मान की खातिर बाहर के लोगों से लड़ रही है। वहीं भाजपा की

भाजपा की जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष जुली तमांग और माकपा महिला नेत्री स्दिग्धा हाजरा ने कहा कि चुनावी नारे का महिलाओं पर शायद की कोई प्रभाव पड़े क्योंकि ममता बनर्जी की सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है। उन्होंने दावा किया, बलात्कार तथा अन्य अपराधों के बढ़ते मामले बताते हैं कि पश्चिम बंगाल में कोई महिला सुरक्षित नहीं है। बीते दस वर्षो में महिलाओं की सुरक्षा में विफल रहने के बाद मैं बंगाल की बेटी हूं नारे का कोई कोई फायदा नहीं मिलने वाला। यूं तो भाजपा ने भी उम्मीदवारों की सूची में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने का वादा किया था लेकिन पहले दो चरण के चुनाव के लिए उसने केवल छह महिला उम्मीदवार उतारी हैं। बलात्कार के मामलों तथा उत्तर बंगाल एवं आदिवासी क्षेत्रों से तस्करी के मामलों को उठाकर महिलाओं का ध्यान आकíषत करने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई बार यह दावा किया है कि तृणमूल का च्मा, माटी, मानुष का नारा अब च्महिलाओं के खिलाफ अत्याचार, अवैध वसूली और तुष्टिकरण रह गया है।

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