बाप को वापस मिलीं पांच साल पहले खोई बेटियां

बाप को वापस मिलीं पांच साल पहले खोई बेटियां

वार्ड पार्षद से लेकर थाने तक गुहार लगाई पर कोई फायदा नहीं हुआतब दार्जिलिंग डिस्ट्रिक्ट ल

JagranSat, 16 Jan 2021 07:41 PM (IST)

वार्ड पार्षद से लेकर थाने तक गुहार लगाई पर कोई फायदा नहीं हुआ,तब, दार्जिलिंग डिस्ट्रिक्ट लीगल एड फोरम की शरण ली

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : पांच वर्ष पहले खोई, एक मजदूर सानु दास की दो बेटियां बड़ी जद्दोजेहद के बाद अब उसे वापस मिल गई हैं। यह सब दार्जिलिंग डिस्ट्रिक्ट लीगल एड फोरम के सहयोग से ही संभव हो पाया। इसके प्रति मजदूर सानु दास ने फोरम का आभार व्यक्त किया है। दार्जिलिंग डिस्ट्रिक्ट लीगल एड फोरम के अध्यक्ष अमित सरकार ने इस बाबत शनिवार को सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट्स क्लब में संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर उक्त मजदूर की पांच वर्षो की पीड़ा सबसे साझा की। यह कहानी वर्ष 2016 से शुरू होती है। सिलीगुड़ी के मल्लागुड़ी स्थित थोक सब्जी मंडी रेगुलेटेड मार्केट में पलदार के बतौर पलदारी का काम यानी गाड़ी से गद्दी में माल उतारने का काम करने वाले सानु दास की तबीयत काफी खराब हो गई, जो कि अकेले अपनी चार संतानों को पालते थे। क्योंकि, उनकी पत्नी इस दुनिया में नहीं रही। तब, उन्होंने अपनी तीनों बेटियों व एक छोटे बेटे को अपनी बहन के घर रख दिया और अपना इलाज कराने को नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती हो गया। कुछ दिनों बाद वह वहां से जब चंपासारी के पोकाई जोत स्थित अपने किराये के घर में वापस लौटा तो अपने बच्चों की खबर ली। पता चला कि दो बेटियां जिनकी उम्र क्रमश: चार व छह वर्ष थी, लापता हैं। बहन ने बताया कि वह गरीबी के चलते उसे पाल नहीं पा रही थी सो एक व्यक्ति ने पालने के लिए मांगा तो उसे दे दिया। मगर, फिर न उस व्यक्ति का सुराग मिला न बच्चियों का ही कोई सुराग मिल पाया।

इसे लेकर सानु दास ने वार्ड पार्षद से लेकर थाने तक गुहार लगाई पर कोई फायदा नहीं हुआ। तब, उसने दार्जिलिंग डिस्ट्रिक्ट लीगल एड फोरम की शरण ली। फोरम ने भी अपनी ओर से एसडीओ, डीएम, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, राज्य सरकार के वरीय अधिकारियों सब तक गुहार लगाई पर कुछ भी नहीं हुआ। तब, 2018 में फोरम ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। फोरम की ओर से वकील डॉ. मधुसूदन रे व अनीष राय ने अदालत में पैरवी की। इस मामले पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए अदालत ने सीआइडी को तलब किया। सीआईडी की ओर से कहा गया कि बहुत तलाशा पर बच्चियां मिल नहीं रही है। तब, अदालत ने सीआइडी को फटकार लगाते हुए कहा कि एक दिन के अंदर में बच्चियों को प्रस्तुत करो वरना हमें जो करना होगा हम करेंगे। अदालत की इस फटकार पर सीआइडी ने दो घंटे के अंदर ही बच्चियों के बरामद हो जाने व दार्जिलिंग के एक होम में रहने की खबर संबंधित पक्ष को दे दी। यह भी बताया गया कि बच्चियों के बारे में पहले यह पता चला कि वे जलपाईगुड़ी के किसी होम में थीं। मगर, उक्त होम बंद मिला। उसके बाद एक बच्ची जलपाईगुड़ी के एक दूसरे होम में पाई गई। वहीं, दूसरी बच्ची एक अन्य परिवार के यहां थी। उन दोनों को बरामद कर दार्जिलिंग के होम में रखा गया। क्या था अदालत का आदेश

इस मामले में 20 जून 2018 के अदालत के आदेश में कहा गया था कि बच्चियों को बरामद किया जाए, उन पर उसके पिता के दावे का सत्यापन किया जाए, इसके साथ ही चूंकि बच्चियों की माता नहीं है, दिवंगत हो चुकी है, सो, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उनके पिता उन बच्चियों का सही से पालन-पोषण कर पाने में सक्षम हैं या नहीं और फिर संतुष्ट हो जाने पर प्रशासन की ओर से बच्चियों को उनके पिता के हवाले कर दिया जाए या फिर उनके जीवनयापन की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। इस बाबत लंबी कागजी व दस्तावेजी कार्यवाही, पड़ताल आदि के बाद बीते शुक्रवार को प्रशासन की ओर से दोनों बच्चियों को उनके पिता के हवाले कर दिया गया।

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