कोरोना से ब्रेन स्ट्रोक व फेफरे की धमनी में अवरोध

-संक्रमण से उबर चुके लोगों के खून में भी डी-डाइमर बढ़ा हुआ पाया गया जागरण संवाददाता सिलीगुड़

JagranSun, 16 May 2021 06:48 PM (IST)
कोरोना से ब्रेन स्ट्रोक व फेफरे की धमनी में अवरोध

-संक्रमण से उबर चुके लोगों के खून में भी डी-डाइमर बढ़ा हुआ पाया गया

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : कोरोना महामारी की रफ्तार में कोई कमी नहीं आ रही है। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग लगातार इससे बचाव के तैयारी में जुटे है। समतल हो या पहाड़ हर तरफ कोरोना को लेकर आतंक का माहौल है। प्रशासन की ओर से डरने का नहीं लड़ने के लिए लोगों को सावधानी बरतने को कहा जा रहा है। ऐसे में कोरोना वायरस के शिकार के इलाज कर रहे एक चिकित्सक ने नाम नहीं छापने के नाम पर बताया कि कोरोना का वायरस फेफड़े को संक्रमित करने के साथ ही खून को गाढ़ा कर रहा है। संक्रमितों में डी-डाइमर प्रोटीन तेजी से बढ़ रहा है। इससे खून का थक्का बन रहा है। खून गाढ़ा होने पर बन रहे थक्के दिल का दौरा पड़ने की वजह बन सकते हैं। इससे ब्रेन स्ट्रोक व फेफड़े की धमनी में अवरोध समेत कई बीमारिया हो सकती हैं। गंभीर बात यह है कि संक्रमितों के साथ ही संक्रमण से उबर चुके लोगों के खून में भी डी-डाइमर बढ़ा हुआ मिला है।

पीड़ित व्यक्ति ने बतायी अपनी व्यथा

चंपासारी के एक कोरोना पीड़ित ने बताया कि कोरोना इन दिनों कहर बरपा रहा है। वायरस संक्रमण शरीर के अंदर उथल-पुथल कर रहा है। फेफड़े के बाद इसका सबसे ज्यादा असर खून पर हो रहा है।आमतौर पर होम आइसोलेशन में रहने वाले संक्रमित इसको लेकर अनजान होते हैं। वह खून की जाच नहीं कराते। ऐसे में निगेटिव होने बाद भी उनका ऑक्सीजन लेवल गिर जा रहा है।

असर छोड़ जाता है कोरोना

संक्रमण खत्म होते ही ज्यादातर लोग यह मान लेते हैं कि वे पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं। यह सही नहीं है। वायरस शरीर में कई दुष्प्रभाव छोड़ता है। यह खून को गाढ़ा कर देता है। इससे खून में थक्के बनते हैं। जो दिल का दौरा, लकवा, फेफड़े की धमनी में अवरोध समेत कई बीमारिया हो सकती हैं। थक्का बनने की पहचान खून में डी-डाइमर नामक प्रोटीन बढ़ने से होती है।

होम आइसोलेशन में 30 फीसदी मरीजों को होती है दरकार

चिकित्सा करने वाले डाक्टर का कहना है कि मध्यम या गंभीर रूप से कोरोना संक्रमित होने वाले 20 से 30 फीसद मरीजों में स्वस्थ होने के बाद भी डी-डाइमर प्रोटीन तय मात्रा से पाच गुना तक ज्यादा मिल रहा है। होम आइसोलेशन में रहने वाले 30 फीसदी संक्रमितों में ऐसा मिल रहा है। ओपीडी में हर दिन एक या दो मरीज इस तरह के आ रहे हैं। कई ऐसे मरीज भी मिल रहे हैं, जिन्हें कोई लक्षण नहीं हैं। फेफड़े का सीटी स्कैन सामान्य मिला लेकिन डी-डाइमर तीन से पाच गुना तक बढ़ा रहता है। ज्यादा थकान, मासपेशियों में दर्द और सास फूलना डी-डाइमर बढ़ने का संकेत हो सकता है। इलाज के लिए खून पतला करने की दवाएं दी जाती हैं।

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