कोहरे और ओले का आलू की फसल पर प्रभाव

कोहरे और ओले का आलू की फसल पर प्रभाव

-किसानों को सताने लगी चिंता बचाव के किए जा रहे है उपाय -पशुपालक ले रहे एसएसबी व बीएसए

Publish Date:Sun, 17 Jan 2021 04:26 PM (IST) Author: Jagran

-किसानों को सताने लगी चिंता, बचाव के किए जा रहे है उपाय

-पशुपालक ले रहे एसएसबी व बीएसएफ से मदद

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : एक सप्ताह से लगातार पड़ रहे कोहरे और पाले ने आम जन-जीवन के साथ ही सरसों, गेंहू व आलू की फसलों पर भी विपरीत असर डाला है। उत्तर बंगाल इन दो फसलों के लिए बंगाल में काफी चर्चित है। यहां आलू के फसल पर हजारों परिवार आश्रित है। इस्लामपुर, चोपड़ा, फांसीदेवा, नक्सलबाड़ी, धूपगुड़ी, अलिपुरद्वार, मालदा और कूचबिहार में आलू के साथ दलहन की खेती हो रही है। कृषि विशेषज्ञ गेंहू के लिए इस मौसम को बेहद अच्छा मान रहे हैं। आने वाले दो-चार दिनों में हालातों में कोई बदलाव नहीं आया तो इन दोनों फसलों को काफी नुकसान हो सकता है। मौसम के इस मिजाज से आलू की फसल में झुलसा रोग लग सकता है, जिससे उसकी उपज में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी हो सकती है। इसके अलावा सरसों की फसल में भी रोग लगने से उत्पादन में कमी आ सकती है।

मौसम के इस मिजाज को लेकर जिले के किसान बेहद सशंकित नजर आए। किसानों में उनकी फसलों को लेकर चिंता का सबब कोहरा बनता जा रहा है। कई किसानों का कहना है कि कोहरे के कारण आलू की फसल प्रभावित होनी शुरू हो गई है। ऐसे में रोगों से बचाव के लिए कई बार दवाई का छिड़काव करना पड़ रहा है। कहना है कि यदि आने वाले तीन-चार दिन और कोहरा रहा तो आलू की फसल को नुकसान होगा, सरसों की फसल में फली आ चुकी है। इसलिए च्यादा नुकसान की संभावना नहीं है। प्याज की फसल में भी नुकसान का अंदेशा है। गेहूं की फसल के लिए कोहरा वरदान है। वहीं दूसरी ओर सर्दी पड़ने से पालतू एवं वन्य जीव हाईपोथर्मिया से पीड़ित हो सकते हैं। श्वसन रोग, निमोनिया, शरीर में अकड़न-ऐंठन का शिकार हो जाते हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात एसएसबी और बीएसएफ के पशुपालन चिकित्सकों की ओर से ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को बताया जा रहा है कि पशुपालक पशुओं को शीत से बचाने के लिए पशुघर में तसले में आग जलाकर न रखें, न ही पशुघर में जलती अंगीठी रखे। पशुओं को गुनगुने पानी में गुड़ व सरसों का तेल डालकर पिलाएं। पशुओं पर कंबल या जूट का बोरा उढ़ा कर रखे। पशुघर को ठंडी हवा से बचाएं।

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