राज्य सरकार के इशारे पर काम कर रही जाप: क्रामाकपा

दार्जिलिंग, संवादसूत्र। न्यूनतम मजदूरी को लेकर चाय श्रमिकों के क्षेत्रीय संगठन ज्वाइंट फोरम के आंदोलन में जाप व क्रामाकपा एकजुट होकर काम कर रहे है। इसी क्रम में अब जाप प्रमुख डॉ हर्क बहादुर क्षेत्री द्वारा पूर्व सांसद आर बी राई के उपर क हमले के बीच अब जाप व क्रामाकपा आमने सामने आ गई है।

ज्वाइंट फोरम में जाप व क्रामाकपा एक साथ है। पर इस बीच जाप अध्यक्ष क्रामाकपा के उपर निशाना साधते हुए कहा कि चाय बागान का बेटा कहलाने वाले आर बी राई चाय श्रमिकों के हित में काम नहीं कर रहा है। न ही जाति के लिए और न ही अलग गोरखालैंड के लिए वह कुछ नहीं कर रहा है। इस दिन जाप प्रमुख के दिए गए बयान के जबाव में सोमवार को क्रामाकपा के क्रेंद्रीय प्रवक्ता गोविंद छेत्री ने कहा कि डॉ हर्क बहादुर क्षेत्री अब बंगाल सरकार के सूर में बात कर रहे है।

क्रामाकपा बंगाल से मिलकर गोरखालैंड की मांग नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि 2007 साल में आंदोलन के दौरान क्रामाकपा ने बिना शर्त विमल गुरूंग का समर्थन किया था। लेकिन फिर विमल गुरूंग के बंगाल सरकार से हाथ मिलाने के बाद क्रामाकपा ने बंगाल सरकार का साथ छोड़ दिया था। जाप प्रमुख द्वारा मुख्यमंत्री के आगे पीछे करने के बाद उन्हें पहाड़ में जनसभा की अनुमति करने दी गई।

उन्होंने कहा कि डॉ हर्क बहादुर क्षेत्री विधानसभा में पांच साल तक रहे। उन्होंने चाय श्रमिकों के लिए क्या किया। अब वे त्याग व बलिदान की बात करते है। विमल गुरूंग ने विधायक पद से इस्तीफा देने का निर्देश दिया था। लेकिन उसके बावजूद वे विधायक का अवकाश भत्ता ले रहे है।

क्रामाकपा अध्यक्ष आर बी आई ने सरकारी दल पद व सम्मान पूरी तरह से त्याग करके जाति के लिए 1998 साल में दिल्ली में पहली वार क्रामाकपा ने गोरखालैंड पर धरना दिया था। उन्होंने कहा कि आज ज्वाइंट फोरम के कारण सरकार और चाय बागान के उपर दबाव बन रहा है। लेकिन अब वे लोग चाहते है कि ज्वाइंट फोरम टूट जाए, इस मकसद वे डॉ छेत्री बंगाल सरकार के सूर में सूर मिलाकर बोल रहे है।

सरकार ने जाप को काम में लगाना शुरू कर दिया है। वन बस्तियों व चाय बागानों में भूमि का पर्चा-पट्टा देने की मांग शुरू में क्रामाकपा ने ही उठाया था। उन्होंने कहा कि प्रशासन जीएनएलएफ व क्रामाकपा को जनसभा करने की अनुमति नहीं दे रहा है, लेकिन वहीं जाप को सभा की अनुमति मिलना शुरू हो गया है।’ सरकार जाप के कंधे के सहारे ज्वाइंट फोरम को तोड़ना चाहती है।

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