सरकार किसी की भी निशाने पर इंट्री माफिया

सरकार किसी की भी निशाने पर इंट्री माफिया

-सिंडिकेट माफिया की सूची पहले है हो गयी है तैयार -चुनाव के दौरान भी नेताओं के नाम प

JagranTue, 20 Apr 2021 03:20 PM (IST)

-सिंडिकेट माफिया की सूची पहले है हो गयी है तैयार

-चुनाव के दौरान भी नेताओं के नाम पर जमकर वसूला धन

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी :सूबे में विधान सभा चुनाव के तीन चरण चुनाव अभी होने बाकी है। सरकार बनाने के लिए सभी पार्टियां अपने अपने अंक के जोड़-घटाव करने में लगे है। सभी पार्टियों के नेता और प्रत्याशी अपने अपने जीत के दावे करने में पीछे नहीं है। इस सब के बीच जो सबसे मजे की बात है कि निशाने पर इंट्री माफिया होंगे। जहां तक सिंडिकेट माफिया की बात है इसकी सूची पहले से ही पक्ष और विपक्ष दोनों के पास है। चुनाव के पांचवे चरण में ऐसे सिंडिकेट माफिया से जुड़े कई लोगों ने नेताओं के नाम पर सिलीगुड़ी समेत आसपास के जिलों के व्यापारियों का जमकर दोहन किया है। हजार नहीं सीधे लाख रुपये से अपनी बातें ऐसे लोग करते थे। कई व्यापारियों ने तो पैसे दिए तो कुछ ने तो कह दिया जो करना है कर लेना पैसा नहीं देंगे? ऐसे व्यापारियों को आने वाले समय में देख लेने की धमकी भी दी जा रही है। बंगाल में बचे चरणों के चुनाव में विपक्ष सिंडिकेट राज के नाम पर हल्ला बोलते हुए वोट मांग रही है। यूं कहें की बंगाल का चुनाव सीमावर्ती क्षेत्र में इंट्री व सिंडिकेट राज के केंद्र में राष्ट्रवाद और तुष्टिकरण के बीच का चुनाव द्वंद्व लड़ रहा है। उत्तर बंगाल सीमावर्ती क्षेत्र में चुनाव को लेकर सभी अपने अपने चुनावी अस्त्र छोड़ने से पीछे नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार ने जो बोया है वे उन्हें ही काटना पड़ेगा। जिस प्रकार इंट्री माफिया, चिटफंड और सिंडिकेट माफिया से आम जनता त्रस्त है। सिंडिकेट राज क्या है इसको जानकार भी हैरानी होगी? यह वह राज है जिसके तहत जूता सिलाई से चंडीपाठ क्यों ना हो इस सिंडिकेट के बिना व्यक्तिगत रुप से लोग कुछ नहीं कर सकते। उत्तर बंगाल के किसी भी जिले की बात करें उद्योग लगाने वाले ज्यादातर व्यापारी इस प्रकार के अवैध गतिविधियों से परेशान है। सरकार को इसकी शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती। यह उत्तर बंगाल के दो चरण के चुनाव में स्पष्ट हो गया है। यहां भी सक्रिय इंट्री माफिया को लेकर मतदाताओं में रोष था। कहीं न कहीं इससे सत्ता पक्ष के लोगों के जुड़े होने की बात प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से कही जा रही थी। कहते है कि इस खेल में जहां सरकार को एवज में इंट्री माफिया ट्रक मालिकों से प्रतिमाह एक बंधी मोटी रकम लेते हैं। इसमें विभागीय कर्मी और पदाधिकारियों से साठ-गाठ होती है। इसका तार सीमावर्ती कई राज्यों तक फैला हुआ है। उत्तर बंगाल में इंट्री माफिया का जाल एक साथ कई जिलों में फैला है।

क्या है या खेल :रुपये लेने वाले ओवरलोडेड वाहनों को गंतव्य तक बिना रोक टोक पहुंचने की गारंटी इंट्री टैक्स माफिया देते हैं। इस खेल में अवैध रुप से कोयले की ट्रक भी शामिल होती है। इस खेल में सरकार का राजस्व का चूना लगने के साथ सड़कों की दुर्दशा होती है। क्षमता से कई गुणा अधिक ढोए जाते हैं क्षमता से तीन गुणा अधिक भार लेकर चलने वाले ट्रकों के कारण सड़कें भी जजर्र हो रही है। जानकारी अनुसार 12 चक्के वाली ट्रक को 20 टन ढ़ोने की अनुमति रहती है। लेकिन वो 50 टन तक भार की ढ़ुलाई करती है। इसी प्रकार 10 चक्के वाली ट्रक अपनी क्षमता 16 टन के बदले 40 टन तक के वजन का माल ढ़ोती है। वहीं 6 चक्के वाली ट्रक की क्षमता नौ टन होती है, जो 15 टन वजन का माल ढ़लाई करती है। इसका ताजा उदाहरण राष्ट्रीय राजमार्ग 31, 31ए और बिहार के किशनगंज से सिलीगुड़ी आने वाली ईट के ट्रकों को देखा जा सकता है। इसकी परवाह न तो सरकार को है और न ही प्रशासन को ही है।

नदियों का हो रहा दोहन : महानंदा, बालासन, मेंची, चेंगा या तीस्ता नदी ही क्यों न हो यहां गिट्टी बालू के ट्रकों में यह खेल जमकर चलता है। स्थिति यह है कि इंट्री माफिया को रुपये दिए जाने के बाद ट्रक चालक बेखौफ होकर कई गुणा अधिक लोड लेकर चलते हैं। इसके लिए ये सभी एक बड़ा सेंडिकेट तैयार कर रखा है। ट्रक मालिक, माफिया को जिन-जिन जिलों की जवाबदेही देंगे राशि उसी अनुसार तय होती है। बालुरघाट, इस्लामपुर, मालदा, दालकोला, सिलीगुड़ी, खोरीबाड़ी, गलललिया, विधाननगर, देवीगंज, नक्सलबाड़ी, बागडोगरा,माटीगाड़ा, भक्तिनगर, एनजेपी, डाबग्राम, फूलबाड़ी आदि क्षेत्रों से बालू लाने वाले ट्रकों से एक माह का 12 से 15 हजार रुपये तक लिया जाता है। दबे जुबान से कहा जाता है कि इस खेल में विभागीय कर्मी और पदाधिकारी के ऊपर भी अंगुली उठती रही है परंतु इसकी ओर किसी का ध्यान नहीं है डर है कहीं वोटबैंक प्रभावित नहीं हो?

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