आज पहुंचेगी ब्रह्मपुत्र हिलसा की पहली खेप

-बांग्लादेश के पदमा नदी से आवक नहीं के बराबर -कोलकाता के आयातकों के दबदबे से बढ़ी परे

JagranThu, 21 Oct 2021 09:00 PM (IST)
आज पहुंचेगी ब्रह्मपुत्र हिलसा की पहली खेप

-बांग्लादेश के पदमा नदी से आवक नहीं के बराबर

-कोलकाता के आयातकों के दबदबे से बढ़ी परेशानी

-मछली की कीमत आसमान पर रहने की संभावना एक्सक्लूसिव

12

सौ रुपये प्रति किग्रा दाम रहने की संभावना

15

दिनों तक बाजार में उपलब्ध रहेगी हिलसा मछली

02

हजार तक प्रति किग्रा कीमत पदमा हिलसा की

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : बांग्लादेश में पदमा नदी से आवक कम होने से सिलीगुड़ी के व्यापारी अब ब्रह्मपुत्र की हिलसा मछली पर आस लगाए हुए हैं। शुक्रवार को ब्रह्मपुत्र हिलसा की पहली खेप सिलीगुड़ी रेगूलेटेड मार्केट पहुंचेगी। स्वाद में पदमा की बराबरी भले ही ना हो लेकिन कीमत 12 सौ प्रतिकिलो के पार ही होगी। अगले 15 दिनों तक सिलीगुड़ी समेत आस-पास के बाजारों में ब्रह्मपुत्र के हिलसा मछली की भरमार रहेगी।

पश्चिम बंगाल का प्रधान भोजन ही मछली-भात है। लाजवाब स्वाद की वजह से हिलसा मछलियों को स्वाद का राजा माना जाता है। जबकि बांग्लादेश में पदमा के नाम से बहने वाली गंगा नदी की हिलसा मछली स्वाद में सर्वोपरी है। बांग्लादेश की सीमा सटे होने की वजह से सिलीगुड़ी में भी पदमा के हिलसा की काफी मांग है। हालांकि बांग्लादेश से आयात होने वाली हिलसा वाया कोलकाता होकर सिलीगुड़ी पहुंचती है। यहां बताते चलें कि सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट पूर्वोत्तर भारत में कच्चे माल की सबसे बड़ी मंडी है। इसके बावजूद सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट के मछली मंडी में बांग्लादेश से सीधे हिलसा मछली आयात करने वाले एक भी व्यापारी नहीं हैं। बल्कि कोलकाता के आयातकों से पदमा की हिलसा सिलीगुड़ी मंगाई जाती है। जबकि सिलीगुड़ी व आस-पास पदमा के हिलसा की मांग काफी अधिक है। सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट के मछली मंडी व्यापारियों की मानें तो पदमा के हिलसा की मांग किसी भी वर्ष पूरी नहीं हो पाती है। जिसकी वजह से प्रतिवर्ष पदमा के हिलसा की कीमत आसमान पर चढ़ी रहती है। बल्कि इस बार भी पदमा की हिलसा खुदरा बाजारों में 15 से दो हजार रुपए प्रति किलो बिकी है। क्या कहते हैं मछली व्यापारी बापी चौधरी

सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट के मछली व्यापारी बापी चौधरी ने बताया कि हिलसा का सीजन होली से लेकर दुर्गा पूजा के पहले तक ही रहता है। उसी बीच बांग्लादेश से पदमा नदी के हिलसा की भी आवक होती है। स्वाद के लिए पदमा की हिलसा काफी विख्यात है। लेकिन आयातक के अभाव की वजह से सिलीगुड़ी में मांग के मुताबिक पदमा की हिलसा आयात नहीं हो पाती है। कोलकाता के आयातक दक्षिण बंगाल की मांग पूर्ति के बाद सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट में थोड़ा-बहुत पदमा की हिलसा भेजते हैं। जबकि बांग्लादेश से हिल्सा 15 से 20 दिनों तक ही निर्यात किया जाता है। इस बार बंग्लादेश सरकार के निर्देशानुसार भारी मात्रा में हिलसा मछली कोलकाता निर्यात की गई। जबकि सिलीगुड़ी में मुश्किल से दस टन मछली पहुंची। इसके बाद कोलकाता के डायमंड हार्बर और फरक्का के हिलसा की आवक सिलीगुड़ी होती है। दुर्गा पूजा के बाद असम के ब्रह्मपुत्र नदी से हिलसा निकाली जाती है। करीब दस दिनों तक ब्रह्मपुत्र से हिलसा की उपज होती है। लेकिन ब्रह्मपुत्र की हिलसा का स्वाद पदमा की तुलना में नगण्य है। फिर भी हिलसा प्रेमियों के लिए तो नाम ही काफी है। क्या कहते हैं आयातक सुमित अनेजा

ओमान से मछलियों का आयात करने वाले सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट मछली मंडी के व्यापारी सुमित अनेजा ने बताया कोलकाता के मार्फत बांग्लादेश की हिलसा मंगाई जाती है। हालांकि वे ओमान की डॉटेड लिजार्ड व अन्य मछलियों का आयात करते हैं। वहीं म्यांमार से फ्रोजन हिलसा का आयात करते हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार से सिलीगुड़ी में ब्रह्मपुत्र की हिलसा पहुंचेगी। अगले दस दिनों तक बाजार में ब्रह्मपुत्र की हिल्सा रहेगी। जिसकी कीमत 12 सौ से अधिक होने के आसार हैं।

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