मानव सेवा ही माधव सेवा,जरूरतमंदों को बांटी गई खाद्य सामग्री

संसू.मिरिक मानव सेवा ही माधव सेवा है।मानव को मानव के काम आना चाहिए। इसी उदेश्य के साथ अंतरराष्

JagranFri, 18 Jun 2021 11:11 PM (IST)
मानव सेवा ही माधव सेवा,जरूरतमंदों को बांटी गई खाद्य सामग्री

संसू.मिरिक :मानव सेवा ही माधव सेवा है।मानव को मानव के काम आना चाहिए। इसी उदेश्य के साथ अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार परिषद दाíजलिंग जिला बोर्ड के अध्यक्ष कृष्ण छेत्री, सचिव हेमन्ता काफ्ले व कोषाध्यक्ष अमृत सिन्चौरी की विशेष पहल पर शुक्रवार को तराई के नक्सलबारी क्षेत्र के देवमुनि बिकासनगर नन्दलाल गांव के जरुरतमंदो को जरूरी खाद्य सामग्री बांटी गई। परिषद की कोर कमेटी की ओर से उक्त गांव के 70 जरुरतमंदों को जरूरी खाद्य सामग्री प्रदान कर महामारी में खाद्य की कमी नहीं होने देने की कोशिश की गई। कोविड के संकटकालीन स्थिति में ग्रामीणों को खाद्य की किल्लत हो रही है। संकट में मानव ही मानव के काम आता है यह मंतव्य परिषद के अध्यक्ष कृष्ण छेत्री ने व्यक्त किया। आगामी दिनों मे अन्य गांव बस्ती के गरीब व जरुरतमंदों को भी खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। परिषदके महासचिव हेमन्ता काफ्ले ने कहा कि संकट में किसी के प्रति हमदर्दी होना बड़ी बात है इस दौर में सबके पास पैसा नहीं है। पैसा भी हो तो उनके पास खाद्यान्न की पूर्ति करने का कोइ जरिया नहीं है। गरीबों के समक्ष भोजन का संकट है। कोषाध्यक्ष अमृत सिन्चौरी ने भी इस तरह मानवीय सहयोग करने पर सन्तुष्टि मिलने की बात कही।

चित्र परिचय: खाद्य सामग्री वितरित करते परिषदके पदाधिकारी व खाद्यान्न पाने खुशी जताते ग्रामीण )

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लाकडाउन से पर्यटन व्यवसाय चौपट,

संसू. मिरिक: लाकडाउन ने पहाड के सभी आíथक श्रोत के रीड़ ही तोड दी। एकओर महामारी तो दूसरी ओर लोगों की लापरवाही आगामी दिनो में सबब बनने की संभावना है। यद्यपि , इस अदृश्य वायरस ने पहाड़ के आíथक मेरुदण्ड पर्यटन उद्योग व पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह से चौपट कर दिया है। मिरिक महकमा के मिरिक बजार सुबह तीन घंटा खुलने के बाद बंद हो जाता है। भारी बारिश से प्रभावित जनजीवन को लाकडाउन ने पूरी तरह से नीरस कर दिया है। स्थिति यह हो गई है कि लोग अकेले में ही रहने को विवश हो गए हैं। ना तो लोग किसी के घर जा रहे, ना ही किसी को आने दे रहे हैं। सतर्कता बरतते हुए शारीरिक दूरी बनाए हैं। गांव की हालत भी वैसी ही है। पर्यटन नगरी मिरिक मे कब रौनक लौटेगी और कब जनजीवन सामान्य होगी यह कहना जल्दबाजी होगी ।

(फोटो -मिरिक में पसरा सन्नाटा )

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संजीवन संघ ने डाकघर कर्मियों को प्रदान की कोविड किट्स

संसू.मिरिक: बढ़ते कोरोना संक्रमण के मद्देनजर रख सहयोग स्वरुप कíसयांग शहर के सुबेदार बस्ती संजीवनी संघ को डाकघर कर्मचारी संगठन फेडरेशन आफ न्यासनल पोस्टल आर्गनाइजेशन दाíजलिंग डिवीजन की ओर से कíसयांग पोस्टमास्टर और उनके सहयोगियों को कोविड किट्स प्रदान की गई। यह जानकारी संजीवनी संघ के सचिव सागर राज छेत्री ने देते हुए कहा कि डाकघर कर्मचारी संगठन के पक्ष से ग्लबस , मास्क सैनिटाइजआदि कोरोना सक्रमितों के परिवारों को देने के लिए और सामाजिक प्रयोग के लिए स्प्रे मशीन प्रदान की गई। डाककर्मी निरंकर थापा ने समाज ने दु:ख के समय में आम लोगों को कुछ हद तक सहयोग प्राप्त हो इसके लिए सामग्री प्रदान की।

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जल्द ही ओकेटी चाय बागान में होगा वैक्सीनेशन

संसू.मिरिक : कोविड फ्रंट लाइन वॉरियर्स मिरिक की मदद से शीघ्र ही ओकेटी चाय बागान और मिरिक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के तत्वावधान में वैक्सीनेशन शिविर संपन्न होने की जानकारी वारियर्स के प्रमुख लाडुप घीसिंग ने दी है। ओकेटी चाय बागान में रहने वाले लोगों को उनके स्वास्थ्य का ख्याल करते हुए महामारी के समय में वैक्सीन लगाना अनिवार्य है। घीसिंग ने बताया कि, महामारी के समय में आम नागरिको को वैक्सीन लगाना सबसे पहली प्राथमिकता होगी ।

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समय रहते मंजा नदी पर बांध न बना तो कृषि भूमि मैदान में होगी तब्दील

संसू. मिरिक: मिरिक महकमा के तराई स्थित सौरेनी ग्राम पंचायत दो अधीनस्थ कटहरे बस्ती की कृषि योग्य भूमि में हर वर्ष बाढ़ के कारण जमीन कटाव होता जा रहा है। इस कृषि योग्य जमीन के निकट से मंजा नदी बहने से और नदी किनारे अबतक कोइ ब्यवस्थित बाध न होने सेजमीन का कटाव तेजी से होकर नदी मे समा रहा है। यहां पर सभी प्रकार के साग सब्जी , धान को दो , बाजरा,तरोई समेत सभी प्रकार की साग सब्जियां,अन्नबाली उगाई जाती है लेकिन ,कृषि प्रदान जमिन मन्जा नदी में समाती जा रही है। कृषक काफी परेशान हैं कि आखिर क्या करें। अब तक लाखों रुपया का अनाज साग सब्जी मन्जा नदी की बाढ़ में बह चुके है। स्थानीय पीड़ित किसानों की ओर से स्थानीय युवक बिक्रम छेत्री ने कहा कि , मंजा नदी के किनारे अगर व्यवस्थित ढंग से बांध बनाया जाए तो जमीन का कटाव होने से रोका जा सकता है। इसके लिए जीटीए प्रशासक समेत विभिन्न राजनैतिक दलो एवं सचेत नागरिक समाज को ठोस पहल करने की जरुरत है। यदि समय रहते उचित ढंग से व्यवस्थित बांध का निर्माण नही होता है तो निश्चित ही कटहरे बस्ती की खेतिहर जमीन बगर ( मैदान)े में तब्दील होने मे अधिक समय नहीं लगेगा।

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