इनलैंड कंटेनर डिपो और टी पार्क खुलने का रास्ता साफ

- पूर्वोत्तर भारत में व्यापार को मिलेगा नया आयाम -रेलवे ने भी जारी किया अनापत्ति प्रमाण पत्र

JagranSat, 05 Dec 2020 07:39 PM (IST)
इनलैंड कंटेनर डिपो और टी पार्क खुलने का रास्ता साफ

- पूर्वोत्तर भारत में व्यापार को मिलेगा नया आयाम

-रेलवे ने भी जारी किया अनापत्ति प्रमाण पत्र जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल सहित पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न राज्य और पड़ोसी देश नेपाल व भूटान के व्यापारियों के लिए मानो समुद्री तट या बन्दरगाह सिलीगुड़ी आ पहुंचा है। बीते 12 वर्षो से सिलीगुड़ी टी पार्क और इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) का फंसा पेंच सुलझ गया है। अगले दो महीने में सिलीगुड़ी टी पार्क और आईसीडी चालू होने की पूरी संभावना जताई गई है। टी पार्क और आईसीडी पूर्वोत्तर भारत के व्यापार को एक नया आयाम प्रदान करेगा।

जानकारी के मुताबिक बीते बारह वर्ष पहले सिलीगुड़ी-जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (एसजेडीए) ने पूर्वोत्तर भारत के दूसरे सबसे बड़े रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी के निकट 35 एकड़ रेलवे की जमीन लीज पर लेकर सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल के करीब तीन सौ व्यापारियों को आवंटित किया था। दो-चार व्यापारियों ने तो अपने बलबूते पर टी पार्क में कारोबार शुरु किया। लेकिन रेलवे से एक अनापत्ति प्रमाण पत्र को लेकर कर्ज देने में बैंकों ने पेंच फंसा रखा था। वहीं एक स्टेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं करने की वजह से आईसीडी भी चालू नहीं हो पा रहा था। लेकिन एक युग के बाद राज्य और केंद्र सरकार के अलावा रेलवे ने तालमेल बनाकर सभी झझटो का निपटारा कर दिया है। इसमें दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने भी मदद की। आईसीडी के लिए रेलवे ने एक स्टेशन कोड जारी कर दिया है। वहीं आवंटित जमीन पर बैंक से कर्ज के लिए रेलवे ने अनापत्ति प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया है। जिससे टी पार्क और आईसीडी चालू करने मे व्यापारियों के समक्ष कोई व्यवधान नहीं रहा।

आईसीडी चालू होने से पूर्वोत्तर के व्यापारियों मे खुशी का माहौल है। आखिर हो भी क्यों न, उनके लिए तो समुद्री तट या बन्दरगाह अब सिलीगुड़ी पहुंच गया है। व्यापारी अब सिलीगुड़ी आईसीडी के जरिए ही अपना उत्पाद विश्व बाजार मे उपलब्ध करा सकेंगे। मुनाफा के साथ परिवहन खर्च मे भी व्यापारियों को करीब 60 से 70 प्रतिशत तक की कमी आएगी। शनिवार को कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (सीआईआई) के उत्तर बंगाल जोनल कार्यालय मे पत्रकारों को संबोधित करते हुए सीआईआई के नॉर्थ बंगाल जोनल काउंसिल के चेयरमैन संजित साहा और वाइस चेयरमैन संजय टिबरेवाल ने बताया कि उत्तर बंगाल समेत पूर्वोत्तर के अधिकाश राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल, भूटान का निकटतम बन्दरगाह कोलकाता है। आयात और निर्यात की कागजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए व्यापारियों को कोलकाता जाना पड़ता था। इसके अतिरिक्त निर्यात के लिए कोलकाता से कंटेनर को सड़क मार्ग द्वारा सिलीगुड़ी लाकर फिर वापस कोलकाता भेजना पड़ता था। वहीं आयात माल से लड़े कंटेनर को सड़क मार्ग से सिलीगुड़ी तक लाना और फिर खाली कंटेनर को वापस कोलकाता पोर्ट तक भेजना होता था। इस प्रक्रिया मे आयात माल उतार कर खाली कंटेनर को वापस कोलकाता भेजना और निर्यात के लिए खाली कंटेनर को कोलकाता से सिलीगुड़ी मंगाने के खर्च की वजह से कीमत प्रभावित होती थी। जिसका असर व्यापार पर होता था। वैसे भी सड़क मार्ग से परिवहन खर्च रेल मार्ग के मुकाबले अधिक है। सिलीगुड़ी मे आईसीडी चालू होने से आयात कंटेनर कोलकाता बन्दरगाह से सिलीगुड़ी और निर्यात कंटेनर सिलीगुड़ी से कोलकाता पोर्ट रेल द्वारा ले जाया जाएगा। इससे परिवहन खर्च मे 60 से 70 प्रतिशत तक की कमी आएगी। इससे व्यापारी को लाभ के साथ विश्व बाजार मे पूर्वोत्तर के उत्पादों की कीमत भी कमी आने से माग बढ्ने की संभावना है। इसके साथ ही टी पार्क और आईसीडी चालू होने से पाच हजार से अधिक रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

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