कैसे करें छठ-महानंदा नदी की अब तक साफ-सफाई नहीं ,घाट बनाने में भी डर

-पूरे साल साफ सफाई की नहीं की गई कोई पहल

-इस साल भी एनजीटी के निर्देश से होगी परेशानी

-विभिन्न पूजा आयोजन कमेटियों की उड़ी नींद

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : छठ पूजा के बस कुछ ही दिन बचे हुए हैं,लेकिन महानंदा नदी की साफ-सफाई के लिए अबतक कोई पहल नहीं की गई है। अगर जल्द सिलीगुड़ी नगर निगम और प्रशासन की ओर से नदी की साफ-सफाई नहीं कराई गई तो छठ पूजा के आयोजन में भारी परेशानी होगी। क्योंकि एनजीटी के निर्देश के कारण विभिन्न पूजा कमेटियों के सदस्य चाह कर भी नदी और घाट की साफ-सफाई नहीं कर पा रहे हैं। पिछले साल एनजीटी के दिशा निर्देशों के कारण छठ व्रतियों,पूजा आयोजक कमेटियों और प्रशासन के बीच काफी खींचतान हुई थी। प्रशासन ने एनजीटी के निर्देशों का उल्लंघन करने पर जेल भेजने तक की बात कही थी। इसी कारण पूजा आयोजन कमेटी के सदस्य अपने स्तर पर घाट बनाने या फिर नदी की साफ-सफाई के लिए सामने नहीें आए थे। इस साल भी कमोवेश यही स्थिति है। यहां उल्लेखनीय है कि सिलीगुड़ी महानंदा तट पर बड़े पैमाने पर छठ पूजा का आयोजन होता है। दो दिनों पहला अ‌र्घ्य और दूसरे अ‌र्घ्य के दिन लाखों लोगों की भीड़ लगती है। इस साल पहला अ‌र्घ्य 2 नवंबर को है। जाहिर है छठ पूजा के आयोजन में करीब 15 दिन ही बचे हैं। जबकि महानंदा नदी किनारे ना तो छठ घाट बनाने और ना ही नदी की साफ सफाई की दिशा में कोई पहल की जा रही है। इससे ना केवल छठ व्रतियों बल्कि विभिन्न छठ पूजा आयोजन कमेटी के सदस्यों में भी रोष है। ऐसा नहीं है कि छठ पूजा आयोजन कमेटी के सदस्य एनजीटी के निर्देशों का पालन नहीं करना चाहते हैं। इन लोगों का कहना है कि एनजीटी का जो भी दिशा निर्देश हो उसके अनुसार प्रशासन की ओर से ही नदी की साफ-सफाई एवं छठ घाट बनाने का काम होना चाहिए। क्योंकि आम लोगों को इस बात का डर है कि कहीं वह छठ घाट बनाते समय एनजीटी के निर्देश का अनजाने में उल्लंघन तो नहीं कर रहे हैं। इसी डर से कोई भी स्वयं छठ घाट बनाने सामने नहीं आ रहा है। पूजा आयोजन कमेटियों का कहना है कि सिलीगुड़ी में महानंदा नदी के किनारे समर नगर से लेकर गंगा नगर, संतोषी नगर, नौका घाट तक बड़ी संख्या में लोग छठ पूजा में शामिल होते हैं। नदी में छठ घाटों को सुंदर तरीके से सजाया संवारा जाता है। इस साल भी सभी पूजा आयोजन की तैयारी में सभी लगे हुए हैं। बस एक ही डर है कि कहीं एनजीटी के किसी निर्देश का उल्लंघन ना हो जाए। कई छठ व्रतियों का कहना है कि नदी की साफ-सफाई सिर्फ छठ पूजा के समय करने से नहीं होगी। बल्कि पूरे साल नदी की साफ-सफाई की जानी चाहिए। जबकि ऐसा नहीं हो रहा है। छठ पूजा के आयोजन के समय ही महानंदा नदी की साफ-सफाई एवं एनजीटी के निर्देशों की बात सामने आ जाती है। ऐसे समस्या का समाधान नहीं होगा। दरअसल पूरे साल महानंदा नदी की साफ सफाई होनी चाहिए। नदी में गंदगी न फैले इसके लिए आम लोगों के साथ-साथ सिलीगुड़ी नगर निगम और प्रशासन को भी पहल करनी चाहिए। इस संबंध में धर्मनगर हनुमान घाट छठ पूजा कमेटी के अध्यक्ष विश्वजीत राय उर्फ चुन्नू राय का कहना है कि एनजीटी के निर्देशों के विरोध में नहीं हैं। इस साल भी हनुमान घाट में छठ घाटों का निर्माण एनजीटी के निर्देश के अनुसार ही किया जाएगा। महानंदा नदी की साफ सफाई नियमित रूप से होनी चाहिए। कुछ इसी तरह की बातें नंबर वन मा संतोषी छठ पूजा सेवा समिति के धनंजय गुप्ता ने कही। उन्होंने कहा कि एनजीटी के निर्देशों से पूजा के आयोजन में जरूर परेशानी होती है। सिर्फ छठ पूजा के समय ही सबको एनजीटी का निर्देश याद आता है। जबकि महानंदा नदी की साफ सफाई नियमित रूप से की जानी चाहिए। इधर तृणमूल काग्रेस के जिला अध्यक्ष तथा सिलीगुड़ी नगर निगम में विपक्ष के नेता रंजन सरकार उर्फ राणा का भी कहना है कि महानंदा नदी की नियमित रूप से साफ सफाई नहीं हो रही है। उन्होंने इसके लिए सिलीगुड़ी नगर निगम के वाम मोर्चा बोर्ड तथा मेयर अशोक भट्टाचार्य को घेरा है। रंजन सरकार का कहना है कि एनजीटी के निर्देश के अनुसार महानंदा नदी में छठ पूजा के समय होने वाली समस्या के स्थाई समाधान की जरूरत है। इसीलिए राज्य सरकार ने ग्रीन मिशन के तहत पांच करोड़ रुपये सिलीगुड़ी नगर निगम को दिए हैं। इस पैसे से छठ घाट का निर्माण हो सकता था। लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए हैं। उन्होंने माना है कि इस साल भी एनजीटी के निर्देशों के कारण छठ पूजा के आयोजन में परेशानी होगी। रंजन सरकार के अनुसार इस समस्या को दूर करने के लिए इस साल वह स्वयं विभिन्न छठ घाटों के दौरे पर निकलेंगे।

यहां यह भी बता दें कि महानंदा नदी में सिर्फ छठ पूजा का आयोजन ही नहीं और भी सभी धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। कार्तिक पूर्णिमा में गंगा स्नान का विशेष महत्व है। महानंदा नदी को ही उत्तर बंगाल की गंगा नदी कहा जाता है। जबकि वर्तमान में इस नदी की हालत काफी खराब है। यहां लाल मोहन मौलिक निरंजन घाट को छोड़ दें तो और कोई ऐसा घाट नहीं है जहां श्रद्धालु अच्छी तरह स्नान कर पाएं। दुर्गापूजा विसर्जन के बाद यहां भी अब धीरे धीरे गंदगी जमा होने लगी है। मां संतोषी नगर में महानंदा घाट पर पानी इतना गंदा है कि इसमें श्रद्धालु कैसे स्नान कर सकेंगे। इसके साथ ही यहां आसपास भी गंदगी का अंबार है। इसकी ओर नगर निगम और जिला प्रशासन को ध्यान देना होगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश को लेकर छठ पूजा के समय तो जिला प्रशासन ने काफी शोर गुल मचाया। जबकि साल भर ना तो नगर निगम का ध्यान इस ओर गया है और ना ही जिला प्रशासन का। ऐसे में कैसे गंदगी से भरे इस नदी में व्रती महिलाएं स्नान कर पाएंगी? इतना ही नहीं छठ पूजा को लेकर भी नदी के अंदर घंटों खड़ा रहने वाली व्रतधारी महिलाओं के सामने मुश्किल की घड़ी आ गई है। कार्तिक पूर्णिमा का शास्त्रों में बहुत महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही देव दीपावली मनाने की प्रथा है। कहते है कि भगवान शंकर ने देवताओं की प्रार्थना पर सभी को उत्पीडि़त करने वाले राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया। उसके बाद देवताओं ने धरती पर पहुंचकर दीपावली मनाई थी। नदी की साफ-सफाई 22 के बाद- डिप्टी मेयर

इस संबंध में सिलीगुड़ी नगर निगम के डिप्टी मेयर राम भजन महतो का कहना है कि एनजीटी के निर्देश के आलोक में 22 तारीख को सिलीगुड़ी नगर निगम में एक उच्चस्तरीय बैठक होने वाली है। इसमें एनजीटी के निर्देशों के अनुसार महानंदा नदी में छठ पूजा के आयोजन की तैयारियों को लेकर चर्चा की जाएगी। 22 तारीख के बाद महानंदा नदी किनारे विभिन्न छठ घाटों की साफ-सफाई की जाएगी।

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