जानें क्या है सेवक रंगपो परियोजना, जिसकी रेल सुरंग में भूस्खलन में सात मजदूर दबे, दो ने दम तोड़ा, दो गंभीर

कालिंगपोंग जिले के सेवक-रंगपो सुरंग रेल परियोजना के भालूखोवा में बीती रात भूस्खलन के कारण 7 मजदूर दब गए थे। जिसे सुरक्षित निकालकर कालिमपोंग अस्पताल पहुंचाया गया। इसमें दो मजदूर काफी गंभीर थे। इलाज के दौरान देर रात 2 मजदूर ने दम तोड़ दिया।

Vijay KumarFri, 18 Jun 2021 04:17 PM (IST)
सेवक-रंगपो सुरंग रेल परियोजना के भालूखोवा में बीती रात भूस्खलन के कारण 7 मजदूर दब गए

अशोक झा, सिलीगुड़ी: कालिंगपोंग जिले के सेवक-रंगपो सुरंग रेल परियोजना के भालूखोवा में बीती रात भूस्खलन के कारण 7 मजदूर दब गए थे। जिसे सुरक्षित निकालकर कालिमपोंग अस्पताल पहुंचाया गया। इसमें दो मजदूर काफी गंभीर थे। इलाज के दौरान देर रात 2 मजदूर ने दम तोड़ दिया। मारे गए मजदूरों की पहचान 37 वर्षीय नरेश सोरेन, संगम टाटानगर जमशेदपुर तथा दूसरे की पहचान 31 वर्षीय शालको मुर्मू आस्था कोठीवर्ल्ड, सिंहभूम बताया गया है। इसके साथ ही दो और गंभीर रूप से घायल सुफल मुर्मू तथा ठाकुर दास को गहन चिकित्सा के लिए सिलीगुड़ी नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।

मेडिकल कॉलेज से दोनों को एक निजी नर्सिंग होम में ले जाया गया है। अन्य तीन घायलों अशोक सिंह, कुंदन सिंह तथा सुकेश्वर सिंह की चिकित्सा कालिमपोंग अस्पताल में ही की जा रही है। यह सभी झारखंड के रहने वाले हैं।कालिगपोंग थाने के आईसी संजय घोष ने बताया कि मृतकों का पोस्टमार्टम प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। पोस्टमार्टम के बाद मृतकों और घायलों में दोनों के परिवार वालों को सूचना देकर उन्हें बुलाया जाएगा।

यह है पूरी घटना 

घटनाक्रम में बताया जाता है कि सिक्किम को रेल  से जोड़ने के लिए सेवक रंगपो रेल परियोजना पर तेजी से काम हो रहा है यह रेल परियोजना सुरंग के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। चल रहे काम के दौरान कलिंगपोंग से 25 किलोमीटर डोर भालू खुला के निकट गुरुवार रात्रि करीब 11:00 बजे अचानक भूस्खलन के कारण काम करने आए 7 मजदूर इसमें दब गए। राहत बचाव कार्य और पुलिस की मदद से सभी मजदूरों को सुरंग से बाहर निकाल कर कालिमपोंग जिला अस्पताल लाया गया। जिसमें दो की हालत गंभीर थी। इलाज के दौरान ही दोनों की मौत अस्पताल में हो गई। अन्य पांच मजदूरों में दो की हालत गंभीर होता देख शुक्रवार की सुबह दो और मजदूरों को नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भेजा गया। अन्य तीन मजदूर कालिमपोंग अस्पताल में ही इलाज करा रहे हैं। घायल मजदूरों का कहना है। अचानक तेज आवाज के साथ मिट्टी गिरते देखा और उसके बाद उन्हें कुछ भी पता नहीं है।

सांसद ने किया दु:ख व्यक्त

दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने भूस्खलन के कारण मारे गए झारखंड के मजदूरों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में वह मजदूर परिवारों के साथ हैं। जो घायल हैं उनकी उचित चिकित्सा हो और वह जल्द से जल्द स्वस्थ हो इसके लिए जिला प्रशासन से बात करेंगे।इस प्रकार की घटना कैसे हुई इसके लिए हुए रेल मंत्रालय से बातचीत करेंगे। दोबारा इस प्रकार की घटना ना घटे इसके लिए भी काम करने वाली एजेंसी और रेल मंत्रालय से बातचीत की जाएगी।

क्या है सेवक रंगपो परियोजना

सेवक से सिक्किम के रंगपो के बीच 44. 96 किमी लम्बी रेल लाइन बिछाई जा रही है। इसका 41.55 किमी हिस्सा बंगाल तथा 3. 41 किमी हिस्सा सिक्किम में होगा। महानंदा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी होकर रेल लाइन गुजारे जाने के कारण वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी मिलने के बाद काम तेजी कराया जा रहा है। 44.96 किमी लम्बी रेल परियोजना में 14 सुरंग, 13 पुल भी बनाया जा रहा है। सुरंग की कुल लंबाई 3555 मीटर होगी। जानकारी के मुताबिक चीन से बढ़ते तनाव के बीच इस परियोजना का काम तेजी से कराए जाने का निर्णय लिया गया था। परियोजना 2022 तक पूरा करा लिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार 8,900 करोड़ की अनुमानित बजट वाले इस परियोजना में अब तक 335.52 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।

2020-21 के लिए 607 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन कंपनी (इरकॉन) के द्वारा निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इस अनुभाग में 14 सुरंगें, 13 पुल व पांच स्टेशन बनाए जाएंगे। जिनमें सेवक, रियांग, तीस्ता बाजार, मल्ली, रंगपो स्टेशन शामिल है। नवीनतम प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर निर्माण कार्य चल रहा है। इस रेलखंड पर 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलेंगी। इस संपूर्ण परियोजना में 38,555 मीटर सुरंग का कार्य किया जाएगा। हालांकि, कठिन क्षेत्र व दीर्घाकालीन मानसून के मौसम के कारण कार्य में प्राय: ही दिक्कतें आ रही है। इसके अलावा कोविड-19 से संबंधित प्रतिबंधों के कारण भी तीन महीने कार्य प्रभावित हुआ। इसे दिसंबर 2022 तक पूर्ण किया जाना है। बताते चलें कि रेल परियोजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब केंद्र में खेल मंत्री थी तो प्रारंभ की थी।

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