हड़ामडीह में नहीं पहुंचा कोरोना

बर्नपुर इस समय कोरोना महामारी से पूरा विश्व जूझ रहा है। भारत में भी कोरोना की दूसरे लह

JagranSun, 09 May 2021 09:21 PM (IST)
हड़ामडीह में नहीं पहुंचा कोरोना

बर्नपुर: इस समय कोरोना महामारी से पूरा विश्व जूझ रहा है। भारत में भी कोरोना की दूसरे लहर से अधिक लोग कोरोना संक्रमित हो रहे है, बहुत लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत भी हो चुकी है। आसनसोल नगर निगम के वार्ड नंबर 98 के आदिवासी गांव हड़ामडीह एक ऐसा गांव है, जहां अभी तक कोरोना दस्तक नहीं दे पाया है। गांव पूरे नगर निगम क्षेत्र में एक मिसाल बन रहा है। इस गांव से लोगों को सीख लेनी चाहिए।

इस गांव के ग्रामीणों का कहना है कि वह लोग प्रकृति का आदर करते है। चारों ओर वृक्ष की भरमार है, जिससे गांव में प्राण वायु की कमी नहीं होती है। ग्रामीणों ने कृषि को ही अपना प्रमुख साधन बना लिया है, जिसके कारण अधिकतर ग्रामीण गांव में ही रहते है। गांव में बाहर से कोई जाता है तो मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते है और शारीरिक दूरी का भी ख्याल रखते है। गांव में लगभग 95 घर है, जिनमें वृद्ध, बच्चे, युवा महिला सहित लगभग 450 लोगों की आबादी है। ऐसे में यहां कोरोना की दो लहर का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। ग्रामीण हीरालाल सोरेन, मोतीलाल सोरेन, रवि सोरेन, लखन हांसदा, मंगली माड्डी, शंभु हेम्ब्रम, मंगल हेम्ब्रम, चांद मुर्मू, सुनील राय, राम माड्डी आदि ने बताया कि कोरोना ने ग्रामीणों के जीवन में बहुत परिवर्तन ला दिया है।

ग्रामीणों को आर्थिक समस्या तो हो रही है, लेकिन दूसरी सुकून देने वाली बात यह है कि लोग अपनी मिट्टी से जुड़कर खेती की ओर ध्यान दे रहे है। जो ग्रामीण खेती करना नहीं जानते थे, वह भी खेती की बारीकियों को सीख गए है। कोरोना संक्रमण के कारण लोग दूर से अपने बड़े बुजुर्ग को प्रणाम कर रहे है। पहले भाग दौड भरी जिदगी में लोगों को अपनों के साथ समय बिताने का मौका नहीं मिलता था। आज पूरे परिवार के लोग एक साथ बैठकर अपने सुख दुख पर चर्चा करते है। प्रकृति हरियाली और ग्रामीणों की खेत में मेहनत का ही नतीजा है कि इस गांव में कोरोना का कोई प्रकोप नहीं है। अब गांव के लोग बाहर रोजगार करने की बात नहीं करते है। ग्रामीण गांव की मिट्टी यानी की खेती करने में समय बिता रहे है।

मोतीलाल सोरेन ने बताया कि आदिवासी गांव होने के कारण लॉकडाउन के पहले रोजाना ग्राम सभा का आयोजन होता था, जिसमें गांव की गतिविधि पर चर्चा होती थी, मगर अब कुछ दिनों के अंतराल में होती है, शारीरिक दूरी का पालन भी होता है। गांव की पुरानी परंपरा भी लौट आयी है। गांव में लोग समय बिता रहे है, जो खेती नहीं करना जानते थे वह खेती करना सीख गए। गांव को हरा भरा बना रहे है। पेड़-पौधा और लगा रहे है।

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