महामारी से लड़ने को अभी माकूल इंतजाम नहीं, जानें- जिलों में वेंटिलेटर और कोविड सेंटरों में बेड की स्थिति

पहाड़ों में दम तोड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच कोरोना महामारी से लड़ने की तैयारी भी अपर्याप्त है। एक साल का समय मिलने के बावजूद सरकारी सिस्टम सभी अस्पतालों में माकूल इंतजाम नहीं कर पाया। पहाड़ों में ऑक्सीजन आइसीयू बेड वेंटिलेटर और प्रशिक्षित स्टॉफ की सबसे अधिक कमी है।

Raksha PanthriPublish:Sun, 09 May 2021 04:37 PM (IST) Updated:Sun, 09 May 2021 04:37 PM (IST)
महामारी से लड़ने को अभी माकूल इंतजाम नहीं, जानें- जिलों में वेंटिलेटर और कोविड सेंटरों में बेड की स्थिति
महामारी से लड़ने को अभी माकूल इंतजाम नहीं, जानें- जिलों में वेंटिलेटर और कोविड सेंटरों में बेड की स्थिति

शैलेंद्र गोदियाल, उत्तरकाशी। पहाड़ों में दम तोड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच कोरोना महामारी से लड़ने की तैयारी भी अपर्याप्त है। एक साल का समय मिलने के बावजूद सरकारी सिस्टम सभी अस्पतालों में माकूल इंतजाम नहीं कर पाया। पहाड़ों में ऑक्सीजन, आइसीयू बेड, वेंटिलेटर और प्रशिक्षित स्टाफ की सबसे अधिक कमी है। पहाड़ के पांचों जिलों में अस्पतालों के पास ऑक्सीजन प्लांट तो लगे हैं, लेकिन अभी ये प्लांट संचालित नहीं हुए हैं। अभी तक केवल नरेंद्र नगर अस्पताल का प्लांट ही संचालित किया गया है। ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए देहरादून, हरिद्वार की एजेंसियों पर निर्भरता है। 

पहाड़ों के गांवों में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर जिस तेजी के साथ फैल रही है उस तेजी से सैंपलिंग और ट्रेसिंग होगी तो कोरोना संक्रमितों का भयावह आंकड़ा सामने आएगा। अधिकांश गांवों में ग्रामीण बीमार पड़े हुए हैं। कई ग्रामीण बिना उपचार के ही दम तोड़ रहे हैं। पहाड़ों में वर्तमान में चल रही सैंपलिंग के अनुपात में औसतन 25 फीसद व्यक्ति संक्रमित मिल रहे हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन बेड उपलब्ध नहीं हैं। अगर पहाड़ों में समय पर इंतजाम कि होते तो आज यह स्थिति न आती। दरअसल, पहाड़ के सभी जनपद के जिला अस्पतालों में ऑक्सीजन सपोर्टेड बेडों के लिए कोरोना संक्रमण के दौरान वर्ष 2020 में 50-50 लाख के ऑक्सीजन प्लांट लगे हैं।

अस्पताल के सभी बेडों तक आक्सीजन की लाइन भी बिछी हुई है, लेकिन इन प्लांटों में ऑक्सीजन बनाने वाली मशीन अभी तक नहीं आई है। कुछ दिन पहले उत्तरकाशी के दौरे पर आए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से मीडिया ने यह सवाल किया तो केवल जल्द सभी प्लांटों को संचालित करने का जबाव मिला। लेकिन, अभी टिहरी के नरेंद्र नगर को छोड़कर दूसरे अस्पतालों में अभी तक ऑक्सीजन प्लांट संचालित नहीं हो पाए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्लांट लगाने वाली कंपनी के कर्मचारी अन्य राज्यों के जनपदों में व्यस्त हैं। उत्तरकाशी में भी लगा ऑक्सीजन प्लांट संचालित नहीं हो पाया है। 

आइसीयू बेड की नहीं अच्छी स्थिति

देहरादून हरिद्वार को छोड़कर गढ़वाल मंडल पांच जनपदों में वेंटिलेटर की तरह ही आइसीयू बेड की संतोषजनक स्थिति नहीं है। चमोली जनपद में केवल छह आइसीयू बेड हैं। भले ही ये सभी बेड अभी खाली हैं। सुमन अस्पताल नरेंद्र नगर में दस आइसीयू बेड हैं, सरकारी पोर्टल पर भी दर्ज हैं। लेकिन इनको संचालित करने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ ही नहीं है। उत्तरकाशी में स्वास्थ्य विभाग ने आइसीयू बेडों की संख्या बढ़ायी है। वर्तमान 25 आइसीयू बेड है। लेकिन जिला अस्पताल छोड़कर अन्य अस्पतालों में आइसीयू को संचालित करने वाला स्टाफ नहीं है। गढ़वाल मंडल में पौड़ी जनपद के श्रीनगर मेडिकल कालेज और संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार की स्थिति अन्य जनपदों के सापेक्ष सही सही।

गढ़वाल के जनपदों में वेंटिलेटर की स्थिति

पौड़ी-191

टिहरी-20

चमोली-12

रुद्रप्रयाग-4

उत्तरकाशी-29

गढ़वाल के जिला कोविड हेल्थ सेंटरों में बेड की स्थिति

पौड़ी- 930

टिहरी- 450

चमोली- 400

रुद्रप्रयाग-144

उत्तरकाशी-120

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