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आज दोपहर बाद खुलेगा देश का पहला न्यू जनरेशन ब्रिज

जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी: गंगोत्री नेशनल हाइवे पर गंगोरी के पास असी गंगा नदी पर बने देश के पहले न्यू जनरेशन ब्रिज की भार क्षमता की जांच की जा रही है। शनिवार शाम से शुरू हुई यह जांच सोमवार दोपहर तक चलेगी। इसके बाद ब्रिज पर वाहनों की आवाजाही सुचारु कर दी जाएगी। यह ब्रिज गंगोत्री धाम सहित भारत-चीन सीमा और उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी ब्लॉक स्थित 80 गांवों को जोड़ता है।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि गंगोत्री हाइवे पर जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से पांच किमी गंगोत्री की ओर गंगोरी में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने कुछ दिन पूर्व न्यू जनरेशन ब्रिज तैयार किया है। जिसकी भार क्षमता जांचने के लिए टीम आई हुई हैं। बताया कि बीआरओ की ओर से भार क्षमता जांचने के लिए पहले रविवार शाम सात बजे तक का समय मांगा गया था। लेकिन, जांच टीम ने इस समय को पर्याप्त नहीं माना और सोमवार दोपहर तक का समय मांगा गया है। दोपहर एक बजे तक पुल पर यातायात सुचारु करने की बात भी बीआरओ ने कही है। बताया कि बीआरओ की मांग पर कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) कंपनी ने न्यू जनरेशन ब्रिज का डिजाइन और कलपुर्जे तैयार किए।

सीमा सड़क संगठन के कमांडर (उत्तरकाशी) विनोद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि भार क्षमता जांचने के लिए ब्रिज पर सौ टन का भार रखा गया है। नियमानुसार कम से कम 24 घंटे तक यह भार ब्रिज पर रहेगा। रविवार शाम तक की रिपोर्ट सकारात्मक आई है और सोमवार दोपहर तक ब्रिज को वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा। विदित हो कि इस ब्रिज का विधिवत उद्घाटन नहीं हुआ है। लेकिन, इस पर वाहनों का संचालन मई से शुरू हो गया था।

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इसलिए दिया न्यू जनरेशन ब्रिज नाम

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि बेली ब्रिज की भार क्षमता 20-25 टन और चौड़ाई 3.75 मीटर होती है। बेली ब्रिज के निर्माण में सिर्फ लोहे का उपयोग होता है, लेकिन गंगोरी के पास बीआरओ ने जो न्यू जनरेशन ब्रिज बनाया है, उसमें स्टील और लोहे के कलपुर्जो का भी उपयोग हुआ है। इसी कारण बेली ब्रिज की तुलना में न्यू जनरेशन ब्रिज का भार कम होता है। बताया कि इस पुल की चौड़ाई 4.25 मीटर और भार क्षमता 70 टन है। हाइवे के पक्के मोटर पुल की भार क्षमता भी 70 टन के आसपास होती है। सिर्फ इस पुल को जोड़ने की तकनीक बेली ब्रिज की तरह है, जो 30 दिनों के अंतराल में तैयार हो जाता है। इसलिए पुल का डिजाइन तैयार करने वाली जीआरएसई कंपनी ने इसे न्यू जनरेशन ब्रिज नाम दिया है।

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