रुद्रपुर से काठगोदाम एनएच- 87 की राह में बजट का रोड़ा

रुद्रपुर से काठगोदाम एनएच- 87 की राह में बजट का रोड़ा

एनएच-87 को बनाने की राह में छह माह से बजट का रोड़ा अटका हुआ है। कार्यदायी संस्था ने काम शुरू करने के लिए 80 करोड़ रुपये लोन मांगा है।

Publish Date:Mon, 30 Nov 2020 11:33 PM (IST) Author: Jagran

ज्ञानेंद्र शुक्ल, रुद्रपुर : एनएच-87 को बनाने की राह में छह माह से बजट का रोड़ा अटका हुआ है। कार्यदायी संस्था ने एनएचएआइ से करीब 80 करोड़ रुपये का लोन देने की मांग की है। रामपुर के हिस्से में करीब 65 फीसद काम पूरा हो चुका है। वहीं रुद्रपुर से काठगोदाम तक करीब 43 किलोमीटर पर निर्माण कार्य शुरू होना है।

मालूम हो कि एनएचएआइ की तरफ से रामपुर से रुद्रपुर लगभग 44 किलोमीटर व रुद्रपुर से काठगोदाम तक करीब 43 किलोमीटर तक एनएच-87 का निर्माण होना है। इसके लिए निर्माण कंपनी सद्भाव को 1100 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है। बीच-बीच में बजट की कमी के चलते काम प्रभावित होता रहा। बीते साल भी बजट खत्म होने पर कंपनी ने पीएनबी से करीब 50 करोड़ रुपये लोन लिया था। तब जाकर रुद्रपुर की तरफ कुछ भाग पर काम शुरू हुआ। बाद में काम फिर लटक गया। इस साल मार्च के बाद कोरोना काल ने काम पर ब्रेक लगा दिया। ढील के बाद काम करने के लिए कंपनी ने एनएचएआइ के प्रोजेक्ट मैनेजर योगेंद्र शर्मा को करीब 80 करोड़ रुपये के लोन के लिए पत्र दिया, जो अभी तक नहीं मिल पाया है। ----------

रामपुर से रुद्रपुर व रुद्रपुर से काठगोदाम तक समान बजट

रामपुर से रुद्रपुर व रुद्रपुर से काठगोदाम तक दोनों तरफ समान दूरी का एनएच 87 बनाया जाना है। इसके लिए समान बजट खर्च हो रहा है। सद्भाव कंपनी के लायजनिग आफीसर दिनेश कुमार की मानें तो अब तक 800 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। कुल 1100 करोड़ रुपये का ठेका कंपनी को मिला है। कोरोना काल से पहले रामपुर के हिस्से तक 65 फीसद काम जहां पूरा हो चुका है। वहीं रुद्रपुर से काठगोदाम करीब एनएच -87 की लंबाई 43 किलोमीटर की लंबाई है। इसमें सिडकुल की तरफ कुछ भाग में निर्माण हो चुका है। इधर, बार्डर से सोनिया होटल तक का हिस्सा पिछले साल बन गया है। बाद में बजट की कमी के चलते काम शुरू नहीं हो सका। रुद्रपुर से काठगोदाम तक करीब 550 करोड़ रुपये का बजट खर्च होने की उम्मीद है। रामपुर में टोल प्लाजा बनाए जाने के कारण बजट का काफी हिस्सा कंपनी ने वहां पर खर्च कर दिया। ऐसे में बजट की कमी पड़ गई।

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