चीनी मिल शुरू न होने पर धरने पर बैठे किसान

बाजपुर में कई बार आश्वासन देने के बावजूद चीनी मिल का संचालन शुरू न होने से किसान गुस्से में।

JagranMon, 29 Nov 2021 05:38 PM (IST)
चीनी मिल शुरू न होने पर धरने पर बैठे किसान

संवाद सहयोगी, बाजपुर : कई बार आश्वासन देने के बावजूद चीनी मिल का संचालन शुरू न होने से किसान आक्रोशित हो गए। उन्होंने मिल के चीफ इंजीनियर को एक घंटे तक बंधक बनाया रखा। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। बाद में मिल के प्रधान प्रबंधक कैलाश चंद्र टोलिया की ओर से मंगलवार सुबह 10 बजे तक मिल चला देने के आश्वासन पर किसान शांत हुए। किसानों ने तय समय तक मिल शुरू न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

सोमवार को पूर्वाह्न करीब 11 बजे किसान भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कर्म सिंह पड्डा की अगुवाई में किसान चीनी मिल के चेन यार्ड में पहुंच गए। बड़ी मशीन के साथ ही पहले से संचालित छोटी मशीन भी बंद होने से भड़क उठे। मिल के अधिकारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। चेनयार्ड के सामने धरने पर बैठ गए। मौके पर पहुंचे प्रभारी चीफ इंजीनियर अभिषेक कुमार सिंह को किसानों ने घंटेभर तक बंधक बनाए रखा। इस बीच ठेकेदार को भी मौके पर बुला लिया गया। काफी हंगामे के बाद चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक कैलाश चंद्र टोलिया ने मंगलवार की सुबह 10 बजे तक प्लांट का संचालन करवाने का भरोसा दिया। तब जाकर किसान शांत हुए। सूचना पर सीओ वंदना वर्मा, एसएसआइ राहुल राठी भी मय फोर्स के चीनी मिल पहुंच गए थे। धरने पर भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष अजीत प्रताप सिंह रंधावा, जिला महामंत्री बिजेंद्र सिंह डोगरा, ब्लॉक अध्यक्ष प्रताप सिंह संधू, इंदरप्रीत सिंह सिद्धू, तेजेश्वर सिंह चीमा, रणजोत सिंह गिल, जितेंद्र सिंह, जगविदर सिंह, जसवीर सिंह भुल्लर, जगमोहन सिंह, दर्शन लाल गोयल, राजेंद्र बेदी, तेजपाल सिंह, रवतेज सिंह, हरमीत सिंह, नोनू सिंह, मोनू आदि शामिल थे।

--------- नौ माह में दो करोड़ खर्च के बाद भी मरम्मत का काम पूरा नहीं

भाकियू नेता पड्डा ने बताया कि सहकारी चीनी मिल की हर वर्ष मरम्मत होती है। उन्हें अधिकारियों से जानकारी मिली है कि करीब नौ माह मिल बंद रही और इस बीच दो करोड़ रुपये केवल मरम्मत में खर्च कर दिए गए, फिर भी कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। मिल प्रशासन व ठेकेदार के बीच समन्वय की कमी भी देखने को मिली है। इस वजह से नवीन पेराई सत्र के शुभारंभ होने के लगभग 10 दिन पश्चात भी प्लांट संचालित नहीं हो पाया है। 30 नवंबर की दोपहर तक मिल चालू नहीं हुई तो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।

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एक-दूसरे पर दोषारोपण करते नजर आए अधिकारी व ठेकेदार मिल का संचालन समय से शुरू होने में आ रही समस्या के लिए जहां चीफ इंजीनियर ने ठेकेदार के माध्यम से श्रमिक उपलब्ध नहीं होने का कारण बताया, वहीं ठेकेदार ने चीफ इंजीनियर द्वारा बगास आदि उपलब्ध नहीं करा पाने की बात कही। किसानों के सामने दोनों एक-दूसरे पर दोषारोपण करते रहे। उनमें गहमागहमी बढ़ती देख किसानों ने बीच में पड़कर आपस में बहसबाजी करने के बजाय मिल कैसे शुरू करें, इस पर मंथन करने को कहा गया। तब जाकर मामला शांत हुआ।

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