बैठक में किसान-राइस मिलर्स भिड़े, अभद्रता

कच्चे आढ़ती के माध्यम से धान खरीद के लिए किसान व राइस मिलर्स की बैठक बुलाई गई।

JagranSat, 23 Oct 2021 12:14 AM (IST)
बैठक में किसान-राइस मिलर्स भिड़े, अभद्रता

संवाद सहयोगी, बाजपुर : कच्चे आढ़ती के माध्यम से धान खरीद के लिए किसान व राइस मिलर्स की बैठक बुलाई गई। मगर मामला सुलझने से पहले उलझ गया। बैठक में ही किसान व राइस मिलर्स भिड़ गए और गहमागहमी के बीच अभद्र भाषा का भी प्रयोग कर दिया गया। इससे हंगामा खड़ा हो गया और बैठक बिना किसी नतीजे पर पहुंचे समाप्त करनी पड़ी।

शुक्रवार को कच्चे आढ़ती के माध्यम से धान खरीद के लिए उचित व्यवस्था बनाने को भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह पड्डा की अगुवाई में किसानों व राइस मिलर्स एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों की बैठक कृषि उत्पादन मंडी समिति सभागार में हुई। इसमें दोनों ही पक्षों द्वारा अपनी-अपनी समस्याओं को रखा गया। इस बीच व्यापारियों व किसानों में गहमागहमी शुरू हो गई। तभी अभद्र भाषा का प्रयोग कर दिया गया, जिससे राइस मिलर्स आक्रोशित हो उठे और हंगामा काटना शुरू कर दिया। गहमागहमी इतनी बढ़ गई कि नौबत हाथापाई तक जा पहुंची, लेकिन वहां मौजूद दोनों पक्षों के लोगों ने किसी तरह मामला शांत कराया। इसके बाद व्यापारी बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल आए, जिससे कार्रवाई अधर में ही लटक गई। राइस मिलर्स ने इन परिस्थितियों में काम नहीं करने व अपने कच्चा आढ़ती के लाइसेंस सरेंडर करने की बात कही है। भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह पड्डा ने घटना पर खेद व्यक्त करते हुए मिल-बैठकर समस्याओं का समाधान निकलने की बात कही है। इस मौके पर भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष अजीत प्रताप सिंह रंधावा, जिला महामंत्री बिजेंद्र सिंह डोगरा, ब्लॉक अध्यक्ष प्रताप सिंह संधू, बबलू नामधारी, तेजेश्वर सिंह चीमा, जगमोहन सिंह, उपकार सिंह व व्यापारियों की तरफ से राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्यवान गर्ग, महामंत्री सौरभ अग्रवाल, कोषाध्यक्ष राकेश चौहान, श्रीनिवास गर्ग, निरंजन दास गोयल, अमित सिघल, चंद्रभान यादव, मनीष सिघल, विपिन गर्ग, सुभाष यादव मौजूद थे।

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खरीद की गति धीमी से भी परेशान हैं किसान

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कर्म सिंह पड्डा ने बताया कि क्षेत्र में धान खरीद के लिए 19 क्रय केंद्र स्थापित हैं। नियमानुसार प्रत्येक सेंटर को अधिकतम 700 क्विटल धान खरीद करने के निर्देश हैं, जिससे यदि एक अक्टूबर से जारी खरीद का हिसाब लगाया जाए तो लगभग 2 लाख 64 हजार क्विटल धान अब तक तुलना चाहिए था, लेकिन इन 21 दिनों में मात्र 54 हजार क्विटल धान की खरीद हो पाई है। यह दर्शाती है कि धान की गति काफी धीमी है। इससे कहीं न कहीं किसानों के साथ नाइंसाफी हो रही है।

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