बाबा केदार के दर पर सबकी चांदी ही चांदी, ऐसा क्यों कह रहे हैं इस खबर में पढ़ें

रुद्रप्रयाग, बृजेश भट्ट। केदारनाथ धाम में यात्रियों की रेकॉर्ड आमद होने से अब तक तीन अरब से अधिक का कारोबार हो चुका है। हेली कंपनियां, घोड़ा-खच्चर संचालक और होटल व्यवसाइयों जहां खूब मुनाफा कमाया है, वहीं स्थानीय युवाओं की भी केदारपुरी समेत पैदल मार्ग के पड़ावों पर टैंट कॉलोनी लगाकर अच्छी आमदनी हुई है। दूसरी ओर प्रशासन के सहयोग से दो हजार से अधिक महिला समूहों ने भी प्रसाद योजना के तहत यात्रा से जुड़कर स्वरोजगार के द्वार खोले हैं। 

वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ यात्रा पूरी तरह पटरी से उतर गई थी और भविष्य पूरी तरह अंधकारमय नजर आ रहा था। लेकिन, धीरे-धीरे हालात बदलते गए और अब तो लगता ही नहीं है कि कभी धाम में आपदा भी आई होगी। इस वर्ष यात्रा के रंगत में लौटने से अभी तक 8.73 लाख यात्री बाबा के दर्शनों को पहुंच चुके हैं, जबकि बीते वर्षों के दौरान इस अवधि में यह संख्या चार से पांच लाख के बीच हुआ करती थी। यात्रियों की आमद बढऩे से स्थानीय व्यापारी भी खूब मुनाफा कमा रहे हैं।

पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए मंदिर समिति भी अब तक 13 करोड़ से अधिक की आय अर्जित कर चुकी है। यही नहीं, इस बार स्थानीय महिलाएं भी यात्रा से सीधे जुड़कर अपनी आर्थिकी संवार रही हैं। जिला प्रशासन ने प्रसाद योजना के तहत दो हजार से अधिक महिला समूहों को स्थानीय उत्पादों से प्रसाद बनाने का जिम्मा सौंपा था। इन समूहों ने भी चार करोड़ से अधिक का कारोबार किया। 

इस बार घोड़ा-खच्चर और पालकी संचालकों की भी खूब चांदी कट रही है। अब तक तीन लाख 35 हजार 568 यात्री घोड़ा-खच्चर व पालकी से बाबा के दर्शनों को पहुंच चुके हैं। इससे उन्हें लगभग 70 करोड़ रुपये की कमाई हुई। जबकि, हेली सेवा से 71 हजार 727 यात्री केदारनाथ पहुंचे हैं, इससे कंपनियों को 50.20 करोड़ की आमदनी हुई। 

छोटे-बड़े व्यापारियों को मिली खुशी 

अब तक की यात्रा से होटल, लॉज, और टैंट कारोबारी भी केदारनाथ और गौरीकुंड में ही डेढ़ अरब से अधिक का कारोबार कर चुके हैं। इसके अलावा छोटे व्यापारियों को भी अच्छी कमाई हुई। तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती कहते हैं कि स्थानीय लोगों के पूरे वर्ष की आजीविका यात्रा काल में हुई कमाई से ही चलती है। इस बार यात्रियों की संख्या में हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने भविष्य के लिए भी संभावनाओं के द्वार खोले हैं। 

यात्रा से हुई कमाई (19 सितंबर तक) 

हेली कंपनी : 50 करोड़ 20 लाख 89 हजार रुपये 

घोडा-खच्चर व पालकी संचालक : 69 करोड़ 82 लाख 64 हजार रुपये 

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति : 13 करोड़ रुपये 

प्रसाद योजना: चार करोड़ रुपये 

होटल, लॉज और टैंट कारोबारी: डेढ़ अरब रुपये से अधिक 

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जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल का कहना है कि केदारनाथ यात्रा से स्थानीय महिलाओं व युवाओं को जोडऩे का प्रयास किया गया, जो काफी हद तक सफल रहा है। केदारघाटी की बड़ी आबादी का रोजगार केदारनाथ यात्रा से जुड़ा हुआ है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने प्रसाद योजना के तहत बेहतरीन प्रदर्शन किया है। यह भविष्य के लिए अच्छा संकेत है। होटल, लॉज, घोड़ा-खच्चर और पालकी व्यवसायियों की आमदनी बढ़ने से घाटी की आर्थिकी मजबूत हुई है। 

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