केदारनाथ की तर्ज पर विश्वनाथ मंदिर को भी संवारा जाए

संवाद सूत्र, गुप्तकाशी: देश-विदेश से केदारनाथ यात्रा पर आने वाले भक्तों की यात्रा काशी-विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी के दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है। मंदिर की पौराणिकताएं केदारनाथ मंदिर से जुड़ी हुई हैं। इसके बावजूद इसकी सुध न सरकार ले रही है और न ही मंदिर समिति। स्थानीय लोगों ने मंदिर का केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर पुनर्निर्माण की मांग की है।

देश के अन्य दो स्थानों वाराणसी और उत्तरकाशी के बाद देश की तीसरी काशी विश्वनाथ का मंदिर गुप्तकाशी में है। यहां भोले बाबा के दर्शन और गुप्त दान का विशेष महत्व है। केदारनाथ के कपाट बंद होने पर केदार बाबा की डोली यहां रात्रि विश्राम भी करती है। लेकिन, मंदिर को तीर्थाटन और सुविधाओं से जोड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। गौरीकुंड हाईवे पर गुप्तकाशी में भगवान काशी विश्वनाथ का प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर अ‌र्द्धनारीश्वर स्वरूप में है। मान्यता है कि यहां मणिकर्णिका जलकुंड है। इसमें गंगा, यमुना की जलधाराएं वर्षभर बहती रहती हैं। बाबा केदार के दर्शन कर लौटने वाले श्रद्धालु इन जलधाराओं के पवित्र जल को अपने साथ ले जाते हैं। बीते वर्ष यहां मंदिर परिसर के निकट प्राचीन जलकुंड भी मिला है। वर्ष 1991 के बाद आए भूकंप से विश्वनाथ मंदिर की दीवारें कमजोर हो गई हैं, जबकि कई जगहों पर लगी मूíतयां स्थान छोड़ चुकी हैं। मणिकर्णिका कुंड और मंदिर पहुंच मार्ग की भी जर्जर स्थिति है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख ऊखीमठ ममता नौटियाल ने कहा कि जिस तरह सरकार केदानाथ धाम में कार्य कर रही है, उसी तरह यहां भी मंदिर में पुनर्निर्माण कार्य कराए जाए। मंदिर समिति के कार्याधिकारी एमपी जमलोकी ने कहा कि मंदिर समिति के तहत आने वाले सभी मंदिरों की देखरेख समिति करती है। जो भी आवश्यक होगा इस संबंध में कदम उठाया जाएगा।

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