पिथौरागढ़ का जनशून्य थली गांव फिर होगा आबाद, देवभूमि पलायन एवं बेरोजगारी उन्मूलन समिति ने लिया गोद

पिथौरागढ़ जिले के जनशून्य हो चुके थली गांव जल्द ही आबाद होगा।

JagranFri, 23 Jul 2021 09:41 PM (IST)
पिथौरागढ़ का जनशून्य थली गांव फिर होगा आबाद, देवभूमि पलायन एवं बेरोजगारी उन्मूलन समिति ने लिया गोद

संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़: सीमांत जिले के जनशून्य हो चुके थली गांव जल्द ही आबाद होगा। देवभूमि पलायन एवं बेरोजगारी उन्मूलन समिति ने इस गांव को गोद ले लिया है। समिति प्रवासियों की मदद से गांव के टूटे-फूटे मकानों का जीर्णोद्धार करने के साथ ही वापस लौटने वाले परिवारों के लिए रोजगार के भी इंतजाम करेगी।

समिति ने प्रदेश में जनशून्य हो चुके गांवों को फिर से आबाद करने का निर्णय लिया है। इसकी शुरू आत पिथौरागढ़ जिले के थली गांव से होगी। यह गांव पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से 12 किमी. दूर स्थित है। गांव में रहने वाले दर्जन भर परिवार संसाधनों के अभाव में गांव छोड़ चुके हैं।

देहरादून से पहुंचे समिति के अध्यक्ष अनिल जोशी ने पिथौरागढ़ जिले के वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी राजेंद्र भट्ट को साथ लेकर शुक्रवार को गांव का दौरा किया। गांव पहुंचे समिति के अवतार सिंह बिष्ट, नरेश चंद्र भट्ट, रेखा जोशी ने खूबसूरत गांव के जनशून्य होने पर चिंता जताई। समिति के सदस्यों ने कहा कि पहाड़ के गांवों का जनशून्य होना सीमा क्षेत्र के लिए उचित नहीं है। समिति अब प्रदेश के पर्वतीय जिले के जनशून्य हो चुके गांवों को आबाद करेगी। इसके लिए अमेरिका, इंग्लैंड, जापान और जर्मनी देशों में बस चुके उत्तराखंड मूल के प्रवासियों से मदद ली जा रही है। गांवों के जर्जर हो चुके भवनों का जीर्णोद्धार करने के साथ ही पलायन कर चुके लोगों से वार्ता कर उन्हें वापस लौटने के लिए प्रेरित किया जाएगा। वापस लौटने वाले लोगों के लिए रोजगार के इंतजाम भी किए जाएंगे। गांवों को आबाद करने के लिए सरकारी योजनाओं की मदद भी ली जाएगी। राज्य आंदोलनकारी राजेंद्र भट्ट ने समिति की इस पहल को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पहाड़ से हो रहे पलायन का असर राजनैतिक ताकत पर भी पड़ रहा है। परिसीमन में पहाड़ की सीटें लगातार कम हो रही हैं। पलायन थमने से पहाड़ की राजनैतिक ताकत बनी रहेगी।

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