धारचूला से हल्द्वानी का टैक्सी किराया हुआ दो हजार रु पये

धारचूला से हल्द्वानी का टैक्सी किराया हुआ दो हजार रु पये

सवारियां आधी और किराया दोगुना होने से धारचूला के लोगों का जिला मुख्यालय तक आना जाना महंगा हो चुका है।

JagranSat, 17 Apr 2021 10:38 PM (IST)

संसू, धारचूला : सवारियां आधी और किराया दोगुना होने से धारचूला के लोगों का जिला मुख्यालय तक आना जाना महंगा हो चुका है।

धारचूला से पिथौरागढ़ तक टैक्सी का प्रति व्यक्ति किराया तीन सौ रु पये है। इधर नए निर्देशों के तहत अब वाहन में सवारियों की संख्या आधी ही रहेगी। सवारियां कम होने से किराया दुगुना हो जाएगा। धारचूला से पिथौरागढ़ का किराया छह सौ रु पये हो जाएगा। धारचूला से हल्द्वानी का एक तरफ का प्रति व्यक्ति किराया दो हजार रु पये हो जाएगा। पूरे जिले का यातायात टैक्सियों पर आश्रित है। ऐसे में लोगों को सफर करना काफी महंगा साबित होने वाला है। दूसरी तरफ शासन ने वाहनों में पचास प्रतिशत ही सवारी बैठाना अनिवार्य है किराया में किसी तरह की वृद्धि नहीं की गई है। मनमाना किराया लेने पर परिवहन विभाग ने हेल्पलाइन नंबर भी दिया है। ======= दोगुना हुआ टैक्सियों का किराया, यात्री परेशान

पिथौरागढ़: कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए वाहनों में 50 फीसद सवारी बैठाने के फैसले के बाद किराया दोगुना हो गया है। इससे रोजाना वाहनों में सफर करने वाले यात्री परेशान हैं।

जिला मुख्यालय के आस पास के क्षेत्र गुरना, चंडाक, वड्डा, सातशिलिंग आदि क्षेत्रों से हर रोज बड़ी संख्या में लोग काम धंधे के जिला मुख्यालय आते हैं। अब तक इन क्षेत्रों से आने यात्री 20 से 30 रुपये तक किराया दे रहे थे। अब सरकार ने वाहनों में स्वीकृत क्षमता से आधी सवारी ही बैठाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इस निर्देश के जारी होते ही टैक्सी चालकों ने अपना किराया दोगुना कर दिया है अब लोगों को 40 से 50 रुपये तक किराया देना पड़ रहा है। ये सभी क्षेत्र जिला मुख्यालय से पांच से दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।

इन ग्रामीणों क्षेत्रों से तमाम लोग दूध, सब्जी आदि लेकर जिला मुख्यालय आते हैं, इसी से उनकी आजीविका चलती है। कई लोग मुख्यालय में अन्य छोटे-मोटे काम धंधे करते हैं, किराया बढ़ जाने से अब ऐसे लोगों के समक्ष परेशानी खड़ी हो गई है। परेशान लोगों ने इस समस्या का हल निकाले जाने की मांग की है। टैक्सी चालकों का अपना तर्क है कि सवारीयों की संख्या कम कर दिए जाने से किराया बढ़ाना उनकी मजबूरी है। 50 फीसद सीटों पर पुरानी दर से किराया लिए जाने पर उनका तेल का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है।

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