थल रामगंगा नदी घाट में लगा गंदगी का अंबार

थल रामगंगा नदी घाट में लगा गंदगी का अंबार

थल रामगंगा घाट में चारों ओर फैली गंदगी से शवदाह करने आ रहे लोग खासे परेशान है।

JagranSun, 13 Dec 2020 07:20 AM (IST)

थल, जेएनएन : जहां एक ओर पूरे देश में स्वच्छता अभियान अभियान चलाया जा रहा है। निर्मल गंगा मिशन के तहत लाखों की धनराशि खर्च की जा रही है, वहीं पर्वतीय अंचलों में यह अभियान सिर्फ कागजों पर रही चलते दिखाई दे रहे हैं। थल स्थित रामगंगा नदी घाट में लंबे समय से गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जबकि वर्तमान कोरोना काल में सबसे ज्यादा जोर स्वच्छता पर ही दिया जा रहा है। बावजूद इसके यहां साफ-सफाई को लेकर कोई पहल नहीं की जा रही है। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।

थल स्थित त्रिवेणी रामगंगा घाट में डीडीहाट, मुवानी, बेरीनाग, पांखू, दशौली क्षेत्रों के लगभग 25 दर्जन से अधिक गांव के लोग शवदाह के लिए आते हैं। इसके अलावा विभिन्न तीज-त्योहारों पर यहां श्रद्धालुओं का स्नान के लिए तांता लगा रहता है। उत्तरायणी पर्व शुरू होने में अब महज एक माह का समय शेष है। इसके साथ ही माघ माह भी शुरू हो जाएगा। पूरे माघ माह में स्नान के लिए यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे, मगर यहां स्थित तीनों घाटों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। =========== वर्तमान कोरोना काल में भी स्वच्छता को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों द्वारा श्रमदान के जरिए घाटों की साफ-सफाई की जाती है। प्रशासन के स्तर पर घाटों पर साफ-सफाई को लेकर कोई अभियान नहीं चलाया जाता है।

-गंगा सिंह मेहता, पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष, थल। ====== शवदाह को आने वाले लोग घाटों पर गंदगी ज्यादा फैला रहे हैं। घाटों पर अधजली लकड़ियां व कपड़े छोड़ दिए जाते हैं। शवदाह को लेकर साफ-सफाई के लिए नियम बनाने की जरू रत है।

-चिंतामणी जोशी, सामाजिक कार्यकर्ता ========== रामगंगा नदी के किनारे प्रसिद्ध बालेश्वर मंदिर भी है। रामगंगा नदी का जल मंदिर में चढ़ाया जाता है। घाटों पर गंदगी लगने से नदी प्रदूषित हो रही है। लोगों को स्वच्छता को लेकर जागरू क होना पड़ेगा।

- मनोज कार्की, अध्यक्ष, ग्राम प्रधान संगठन, पांखू। ======= तीनों घाटों पर अधजली लकड़ियां व कपड़े पड़े हैं। शवदाह को आने वाले लोगों को मुंह में रू माल बांधकर नदी तट पर जाना पड़ रहा है। नदी तट पर गंदगी होने से बीमारी का खतरा बना हुआ है।

- बसंत लोहनी, सामाजिक कार्यकर्ता दड़मोली।

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