मार्ग न बनने से छह माह से दुश्वारियां झेल रहे बांसबगड़ क्षेत्र के 40 हजार लोग

मार्ग न बनने से छह माह से दुश्वारियां झेल रहे बांसबगड़ क्षेत्र के 40 हजार लोग

विकास खंड मुनस्यारी की बांसबगड़ क्षेत्र की लगभग चालीस हजार की आबादी छह माह से दुश्वारियां झेल रही है।

JagranThu, 07 Jan 2021 11:06 PM (IST)

जागरण टीम, नाचनी (पिथौरागढ़) : विकास खंड मुनस्यारी की बांसबगड़ क्षेत्र की लगभग चालीस हजार की आबादी छह माह से दुश्वारियां झेल रही है। आपदा से 26 जुलाई को बंद नाचनी -बांसबगड़ मार्ग 11 किमी अब बड़े वाहनों के लिए नहीं खुल सका है। मार्ग पर चलने वाले छोटे वाहनों को हुपुली नामक स्थान पर वाहनों से उतार कर पार किया जाता है। आम जरूरत सहित सरकारी खाद्यान्न भी क्षेत्र तक पहुंचाना कठिन बना हुआ है।

दो माह पूर्व मार्ग का निरीक्षण करने आए अधीक्षण अभियंता का स्थानीय जनता द्वारा घेराव करने के बाद विभाग को मार्ग ठीक करने की सुध आई। दो माह के अंतराल में विभाग क्षतिग्रस्त डेढ़ सौ मीटर हिस्से को ठीक नहीं कर पाई है। जबकि यह सड़क प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क है। क्षेत्र की जनता की लाइफ लाइन है। ========= सड़क से प्रभावित क्षेत्र

तल्ला भैंस्कोट, खेत भराड़, बांसबगड़, धामीगांव, माणीधारी, गूटी, सेलमाली, कोटा, पंद्रहपाला, राया, बजेता, डुंगरी ग्राम पंचायतों के चार दर्जन गांव। ====== नाचनी तक ही संचालित हो रही रोडवेज बस दूरस्थ क्षेत्र की जनता के लिए रोडवेज द्वारा बांसबगड़ से दिल्ली तक रोडवेज की बस सेवा दी गई है। लाकडाउन के बाद बस सेवा बंद रही। लगभग दो माह पूर्व से रोडवेज बस सेवा प्रारंभ की गई परंतु भुजगड़ नदी घाटी के बांसबगड़ क्षेत्र की जनता को बस सेवा से मात्र सड़क बड़े वाहनों के लिए नहीं चलने के कारण वंचित होना पड़ रहा है। रोडवेज बस नाचनी तक ही चलती है। ======== क्षेत्र तक खाद्यान्न पहुंचना हुआ मुश्किल बांसबगड़ से लेकर 15 किमी दूर कोटा पंद्रहपाला, 12 किमी दूर धामीगांव क्षेत्र तक आवश्यक सामान और खाद्यान्न पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। हुपुली तक बड़े वाहन से खाद्यान्न और सामान पहुंचाना पड़ता है। जहां पर सामान उतार कर मजदूरों से डेढ़ सौ मीटर दूर ढुलान होता है फिर छोटे वाहनों से सामान बांसबगड़, कोटा पंद्रहपाला और धामी गांव पहुंचाया जाता है। बांसबगड़ के व्यापारी चंद्र सिंह पवार बताते हैं कि विगत छह माह से क्षेत्र के व्यापारी लगातार आर्थिक क्षति उठा रहे हैं। ========= मुनस्यारी क्षेत्र में मानसून काल में सर्वाधिक आपदा आई। आपदा को लेकर प्रदेश सरकार कितनी संवेदनहीन है इसका दृष्टांत नाचनी-बांसबगड़ मार्ग बना है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से लेकर सरकार तक बात की गई । धरना तक दिया गया, परंतु सड़क खोलने का कार्य आज तक पूरा नहीं हुआ है। शीतकाल में यदि जनता को कष्ट उठाना पड़ा तो फिर से आंदोलन किया जाएगा।

- हरीश धामी, विधायक, धारचूला ======== आपदा काल में पीएमजीएसवाइ की सर्वाधिक सड़कें क्षतिग्रस्त हुई। विभाग संसाधन जुटा कर एक-एक कर सड़कों को खोल रहा है। हुपुली के पास मार्ग वासआउट जैसी स्थिति पर पहुंचा था। यहां पर कार्य चल रहा है। छोटे वाहनों के लिए मार्ग तभी खोल दिया गया था। शीघ्र ही अब बड़े वाहनों की आवाजाही भी होने लगेगी। कार्य तेजी के साथ किया जा रहा है।

- इं. केएस ऐरी, ईई, पीएमजीएसवाइ, धारचूला

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