आंगन में उगी झाड़ियां बन रही वन्यजीवों का आशियाना

जागरण संवाददाता पौड़ी पहाड़ी क्षेत्रों में पहले श्रमदान की संस्कृति थी तो गांवों में हर मा

JagranFri, 25 Jun 2021 03:00 AM (IST)
आंगन में उगी झाड़ियां बन रही वन्यजीवों का आशियाना

जागरण संवाददाता, पौड़ी : पहाड़ी क्षेत्रों में पहले श्रमदान की संस्कृति थी तो, गांवों में हर माह ग्रामीण आपसी समन्वय बनाकर गांव के मार्गों, पानी के स्रोतों की सफाई के अलावा जगह-जगह उगी झाड़ियों को काट स्वच्छता अभियान चलाते थे। वक्त बदला, नजरिया भी बदला। श्रमदान की संस्कृति से आमजन दूर होता गया तो, घर गांवों में आंगन भी झाड़ियों से पटने लगे। आज कई बार यही झाड़ियां जंगली जानवरों के आशियाना बनने लगे हैं। फिलवक्त आबादी क्षेत्रों में गुलदार की दस्तक का एक कारण यह भी माना जा रहा है।

विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पौड़ी जनपद की बात करें तो यहां मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष किसी से छिपा नहीं है। लेकिन, घटनाओं को रोकने का स्थायी ठोर फिलवक्त दिखता नहीं। जंगली जानवरों की ओर से जानलेवा हमला करना। और बाद में कई बार गुलदार को आदमखोर घोषित कर मार दिया जाना। घटनाओं की रोकथाम के लिए दावे भी बहुत होते दिखे तो जन-जागरूकता अभियान का दौर भी चला। इस सब के बीच एक सच यह भी है कि पहले भी जंगली जानवर हुआ करते थे। तब इतनी घटनाएं शायद कम ही देखने को मिलती थी। इसकी एक वजह यह भी कि तब गांवों में श्रमदान की पद्धति थी। ग्रामीण हर माह गांव में श्रमदान कर गांवों के पानी के नालों, संपर्क मार्गों के अलावा झाडि़यों का कटान कर गांवों को स्वच्छ रखते थे। लेकिन, अब गांवों में कम ही श्रमदान देखने को मिलता है। तो दूसरी ओर पलायन से गांवों की रौनक भी कम हो गई है। हश्र यह हो रहा है कि कई गांव और शहरों में आंगन तक उगी झाड़ियों को काटने की जहमत तक लोग नहीं उठा रहे हैं। यही झाड़ियां जंगली जानवर खासकर गुलदार का आशियाना भी बनने लगी हैं। आबादी क्षेत्रों में सांय ढलते ही गुलदार के दिखाई देने का एक प्रमुख कारण यह भी है। खुद गांवों में रहने वाले बुजुर्ग भी इस बात को मान रहे हैं। डेढ़ साल में छह बने निवाला

पौड़ी जनपद में गढ़वाल वन प्रभाग के अधीन डेढ़ साल के भीतर जंगली जानवरों के हमले में छह व्यक्तियों ने जान गंवाई। जबकि विभिन्न क्षेत्रों में चालीस घायल भी हुए। स्कूल के प्रांगण में दिखा गुलदार

श्रीनगर मेडिकल कालेज परिसर के अलावा पौड़ी शहर के कंडोलिया, नागदेव क्षेत्र के बाद बीते बुधवार शाम को गुलदार शहर के बीआर मार्डन स्कूल परिसर में देखा गया। गुलदार यहां लगे सीसीटीवी में दिखता नजर आया। अगले रोज फुटेज देखी गई तो सब के होश उड़ गए। जबकि शहर के गडोली में कई बार शाम ढलते गुलदार ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। सही बात है पहले गांवों में श्रमदान की संस्कृति थी तो घटनाएं कम होती थी। अब तो गांवों में ग्रामीण उगी झाड़ियों को काटने तक तैयार नहीं हैं। आबादी क्षेत्रों में ही जगह-जगह झाड़ियां गुलदार का आशियाना बन रही हैं। इस मामले में आमजन को जागरूक होना पड़ेगा। तभी काफी हद तक घटनाओं को रोक जा सकता है।

लक्ष्मण सिंह रावत, पूर्व प्रभागीय वनाधिकारी, गढ़वाल वन प्रभाग पौड़ी।

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