नवरात्रि के पहले दिन हुई शैलपुत्री की पूजा

नवरात्रि के पहले दिन हुई शैलपुत्री की पूजा

पहले नवरात्रि पर श्रद्धालुओं ने मंगलवार को घरों में पूजन व घटस्थापित कर पूजा अर्चना की।

JagranTue, 13 Apr 2021 11:00 PM (IST)

जागरण टीम, गढ़वाल: पहले नवरात्रि पर श्रद्धालुओं ने मंगलवार को घरों में पूजन व घटस्थापित कर देवी से सुख-स्मृद्धि की कामना कर शैलपुत्री की पूजा की। हालांकि इस बार कोरोना संक्रमण के चलते पिछले वर्षो की अपेक्षा इस बार कम ही श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचे।

पौड़ी में मंगलवार से पाबौ में तीन दिवसीय खुंडेश्वर मेला शुरू हुआ। मेले में मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)डॉ.धन सिंह रावत ने मेले के आयोजन के लिए पांच लाख की धनराशि देने की घोषणा की। मेले के पहले दिन जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण ने शिवजी कैलाश रंदिना, माता भवानी जागरों व व मोहना तेरी मुरली बाजी आदि लोकगीतों की शानदार प्रस्तुतियां दी। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष देवेंद्र रावत, नरेंद्र सिंह रावत, गेंदालाल, आशुतोष पोखरियाल, पुष्पा देवी, सुरेंद्र नौटियाल, कर्मवीर भंडारी, सुधीर रावत, मातबर चौहान, जयप्रकाश रौथाण, विमल नेगी, दीपेश्वरी कठैत, धनबीर नेगी, विवेक नेगी, विक्रम भंडारी आदि शामिल थे। उधर मुख्यालय में देवप्रयाग मोटर मार्ग पर स्थित वैष्णो देवी मंदिर में चंडी , रुद्री पाठ शुरू हो गए। मंदिर समिति के संरक्षक राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि धार्मिक आयोजन में हर बार पौड़ी ही नहीं बल्कि श्रीनगर, ऋषिकेश, कोटद्वार, देवप्रयाग से भी काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कहा कि इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए मंदिर में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को कोविड गाइड लाइन का अनुपालन करने को कहा जा रहा है।

कोटद्वार में चैत्र नवरात्र के पहले दिन

मंगलवार को श्रद्धालुओं ने माता के प्रथम रूप शैलपुत्री की पूजा अर्चना की। क्षेत्र के सुखरो देवी मंदिर, दुर्गा देवी मंदिर, संतोषी माता मंदिर, नव दुर्गा मंदिर, सिदूरा देवी मंदिर, शिवालिक नगर सहित अन्य मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालु माता के गुणगान करते हुए पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचे। हालांकि, कोरोना के प्रकोप के चलते मंदिरों में श्रद्धालुओं की तादाद अन्य वर्षों के मुकाबले कम ही नजर आ रही थी। उधर, ज्वाल्पा धाम सिद्धपीठ में सुबह से ही श्रद्धालु बड़ी संख्या में माता के दर्शनों को पहुंच रहे थे।

नई टिहरी : नवरात्रि पर सिद्धपीठ माता ज्वालामुखी की मूर्ति को कलश यात्रा के साथ मूल मंदिर तिसरियाड़ा से ज्वालामुखी मंदिर में लाया गया जहां श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए। इस अवसर पर सिद्धपीठ में अष्टादश पुराण शुरू हो गई है। दस दिनों तक सिद्धपीठ में माता के दर्शनों के लिए दूर-दराज क्षेत्र मे बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे। पहले दिन देवप्रयाग संगम पर सुबह स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। डालगांव, चानी, तिसरियाड़ा, सौला, कुंडियाली, खवाड़ा, भेटी, बूढ़ाकेदार के ग्रामीण मूल मंदिर में पहुंचे जहां से ढोल-नगाड़ों के साथ माता की मूर्ति को सिद्धपीठ ज्वालामुखी देवढुंग में लाकर मंदिर में रखी गई। मेला समिति के अध्यक्ष बचल सिंह रावत व उपाध्यक्ष अमन भट्ट ने बताया कि कोरोना के चलते इस बार बाहर से दुकानदार यहां नहीं पहुंचे। इस मौके पर सोहनलाल रतूड़ी, अमर सिंह राणा, गिरीश नौटियाल, राहुल बिष्ट, लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, हिम्मत रौतेला, भूपेंद्र नेगी आदि मौजूद थे। वहीं नई टिहरी शक्तिपीठी दुर्गा मंदिर सहित सिद्धपीठों में भी पूजा के लिए श्रद्धालु पहुंचे।

पहले की तुलना में कम संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

श्रीनगर गढ़वाल: मंगलवार से चैत्र नवरात्रि शुरू होने पर सिद्धपीठ मां धारी देवी मंदिर के साथ ही देवलगढ़ स्थित सिद्धपीठ राजराजेश्वरी और गौरा देवी मंदिर के साथ ही श्रीनगर के कंसमर्दनी मंदिर, भक्तियाना सीतलामाता मंदिर, बगलामुखी मंदिर में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की विशेष पूजा अर्चना की। कोरोना महामारी का असर भी श्रद्धालुओं की संख्या में देखने को मिला है। पिछले वर्षों में जहां नवरात्रों पर इन मंदिरों में भक्तों की लंबी-लंबी लाइन सुबह से ही लगी रहती थी वह लाइन इस समय देखने को नहीं मिली। मंदिरों में पुजारी द्वारा भक्तों से मास्क लगाने के साथ ही पर्याप्त शारीरिक दूरी बनाए रखने का भी विशेष अनुरोध किया जा रहा था। सिद्धपीठ मां धारी देवी मंदिर में मुख्य पुजारी लक्ष्मी प्रसाद पांडे और पुजारी राजेश पांडे, मनीष पांडे ने प्रात: पांच बजे आरती करने के साथ ही हरियाली भी बोई। देवलगढ़ के राजराजेश्वरी मंदिर में पुजारी केपी उनियाल ने पूजा करायी।

संदेश : 13 कोटपी 1

कोटद्वार में नवरात्रि के पहले दिन सुखरो देवी मंदिर में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु

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