जर्जर पेयजल लाइनों को उपचार की दरकार

जागरण संवाददाता कोटद्वार कोटद्वार क्षेत्र में नलकूपों की बाढ़ तो आई है। लेकिन इन नलकूपो

JagranWed, 08 Dec 2021 04:30 PM (IST)
जर्जर पेयजल लाइनों को उपचार की दरकार

जागरण संवाददाता, कोटद्वार: कोटद्वार क्षेत्र में नलकूपों की बाढ़ तो आई है। लेकिन, इन नलकूपों के पानी को घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी जिन पेयजल लाइनों की है, वे बदहाल हैं। हालात यह हैं कि क्षेत्र में 385 किमी लाइनें इस कदर जर्जर हैं कि इन लाइनों से घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

'जल' पर्याप्त है, जरूरत है उसके नियोजित वितरण की। बात हो रही है कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र की, जहां मौसम कोई भी हो, नलकूप फुंकने के बाद पेयजल किल्लत होना आम है। हालांकि, जल संस्थान की ओर से कई नलकूपों को आपस में पेयजल लाइनों के जरिये जोड़कर व्यवस्था को सुचारू रखने का प्रयास किया जाता है। लेकिन, गर्मियों में जब पेयजल खपत अधिक होती है, ऐसे में तमाम व्यवस्थाएं धरी की धरी रह जाती हैं। दरअसल, विभाग की 'बूढ़ी' पेयजल लाइनें हांफ रही हैं और खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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यह हैं मौजूदा संसाधन

कोटद्वार-भाबर क्षेत्र की पौने दो लाख जनता को पेयजल मुहैया कराने के लिए वर्तमान में 64 नलकूपों से आपूर्ति होती है। इनमें से 29 नलकूप/मिनी नलकूप जल संस्थान के पास हैं, जिनमें से 11 नलकूप (जेनरेटर फीटेड) हैं। लाइनों की बात करें तो विभाग के पास वर्तमान में 385 किमी पेयजल लाइनें पूरी तरह बदहाल हैं। पिछले करीब एक दशक से बजट के अनुरूप पेयजल लाइनों का पुनर्गठन किया जा रहा है, लेकिन विभाग को अवमुक्त होने वाला बजट ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।

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यह है वर्तमान स्थिति

विभाग की ओर से पेयजल लाइनों के पुनर्गठन को 880 लाख की लागत से ये प्रस्ताव कुछ समय पूर्व शासन में भेजे गए थे। इनमें से तीन प्रस्तावों पर शासन ने मुहर लगाते हुए पुरानी लाइनों को बदलने के लिए 224.84 लाख की धनराशि स्वीकृत करते हुए प्रथम चरण में 89.94 लाख की धनराशि अवमुक्त कर दी है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता संतोष उपाध्याय ने बताया कि उक्त धनराशि से नगर क्षेत्र की दो और सनेह क्षेत्र की एक लाइन बदली जाएगी।

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