वन कानून बना पुल निर्माण की राह में रोड़ा

पिछले पांच साल में पांच व्यक्तियों की जान ले चुके कोटद्वार-दुगड्डा के मध्य गिरने वाले बरसाती गदेरे पर पुल निर्माण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को हरी झंडी तो मिल गई है लेकिन वन कानून पुल निर्माण की राह में रोड़ा बन गया है।

JagranThu, 29 Jul 2021 03:00 AM (IST)
वन कानून बना पुल निर्माण की राह में रोड़ा

जागरण संवाददाता, कोटद्वार: पिछले पांच साल में पांच व्यक्तियों की जान ले चुके कोटद्वार-दुगड्डा के मध्य गिरने वाले बरसाती गदेरे पर पुल निर्माण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को हरी झंडी तो मिल गई है, लेकिन वन कानून पुल निर्माण की राह में रोड़ा बन गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को निर्माण शुरू करने से पूर्व वन मंत्रालय से हरी झंडी का इंतजार है।

नजीबाबाद-बुआखाल राष्ट्रीय राजमार्ग-534 पर कोटद्वार से करीब आठ किलोमीटर आगे सड़क में गिरने वाला बरसाती गदेरा इस बरसात में भी कोई जिदगी लील लेगा, कहा नहीं जा सकता। दरअसल, पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश होने पर बरसाती गदेरा राजमार्ग से होकर खोह नदी की ओर जाता है। कई मर्तबा वाहन चालक इस गदेरे के तेज बहाव का अंदाजा नहीं लगा पाते और पानी के तेज बहाव में बहते हुए सड़क के दूसरी ओर खड्ड में जा गिरते हैं। जिस तरह पिछले पांच वर्षों से यह गदेरा लगातार जिदगी लील रहा है, राजमार्ग विभाग को इस गदेरे पर पुल बना देना चाहिए था। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। महकमे ने कुछ समय पूर्व एक चेतावनी बोर्ड लगाया, लेकिन आज वह बोर्ड भी गायब हो चुका है।

वन कानूनों में फंसा पुल

राष्ट्रीय राजमार्ग पर गिरने वाले बरसाती गदेरे पर राजमार्ग विभाग की ओर से पुल बनाया जाना है। पुल की विस्तृत कार्ययोजना को केंद्र से मंजूरी मिल गई। लेकिन अब मामला वन कानूनों में फंस गया है। दरअसल, जिस जगह पुल का निर्माण किया जाना है, वह लैंसडौन वन प्रभाग की दुगड्डा रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र में है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से हरी झंडी दिखाए बिना राजमार्ग विभाग पुल का निर्माण नहीं कर सकता।

पूर्व में हुई दुर्घटनाएं

16 अगस्त 2015 : बाइक बही, सवार की मौत

21 जुलाई 2016 : कार बही, कार में सवार एक परिवार बाल-बाल बचा

26 जुलाई 2016 : बाइक बही, सवार की मौत

16 अगस्त 2017 : कार बही, बाल-बाल बचा सवार

21 जुलाई 2020 : कार बही, तीन लोगों की मौत

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बरसाती गदेरे मे पुल की डीपीआर को स्वीकृति मिल गई है। वन विभाग के साथ मिलकर संयुक्त निरीक्षण भी करवाया जा चुका है। वन विभाग से अनापत्ति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। ..नवनीश पांडे, अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग, धुमाकोट खंड

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