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विज्ञान के क्षेत्र में आगे आएं महिलाएं

जासं, नैनीताल : समाज का विकास विज्ञान के बिना संभव नहीं है। इस दिशा में महिलाओं को आगे आकर अपना योगदान देना होगा। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर आर्यभटट् प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के पूर्व निदेशक प्रो. रामसागर ने यह विचार व्यक्त किए। इस मौके पर स्पेस साइंस में महिलाओं की भूमिका व भारत की प्रगति पर प्रकाश डाला गया। महान वैज्ञानिक सीबी रमन के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

शुक्रवार एरीज सभागार में विज्ञान व महिलाएं विषय पर आधारित सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रो. रामसागर ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान का शुभारंभ 1609 में हुई और आज हम सृष्टि को कुछ हद तक समझ पाने में कामयाब हुए हैं। पूर्व निदेशक डॉ. वहाबदद्ीन ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के करियर की अपार संभावनाएं हैं। परंतु इसके लिए वैज्ञानिक सोच का होना बेहद जरूरी है। डॉ. स्नेह लता ने कहा कि भारत का अतीत महिलाओं के लिए बेहद सम्मानजनक रहा है। माता सीता व झांसी की रानी तमाम ऐसे नाम हैं, जो महिलाओं का गौरव बढ़ाता है। डॉ. कुंतल मिश्रा ने विश्व स्तर पर महिला वैज्ञानिकों की जीवनी पर प्रकाश डाला। डॉ. नीलम पवार ने एरीज द्वारा किए जा रहे शोध कायरें पर प्रकाश डाला। डॉ. हरतिमा व डॉ. अंजषा ने विज्ञान के प्रति सोच विकसित किए जाने को लेकर व्याख्यान प्रस्तुत किए। इसके बाद स्कूली बच्चों को सोलर टेलीस्कोप से सूर्य की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शशिभूषण पांडे ने किया। इस अवसर पर सेंट मैरी कॉलेज की शिक्षिका आरती सिंह, आस्था शर्मा, डॉ. उमेश दुम्का, हरीश तिवारी, शोधार्थी व विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी मौजूद थे।

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