पर्यटकों के लिए बंद हुआ जू तो वन्यजीवों को दखल से मिली निजात, चिड़ियाघर में जी रहे प्राकृतिक जीवन

पर्यटकों के लिए जू बंद हुआ तो वन्यजीवों को दखल से मिली निजात, चिड़ियाघर में जी रहे प्राकृतिक जीवन

कोरोना काल में संक्रमण के खतरे को देखते हुए नैनीताल चिड़ियाघर को पहली मई से बंद कर दिया गया है। ऐसे में पर्यटकों समेत अन्य की आवाजाही बंद होने से वन्यजीवों की निजता में दखल कम हो गई है और अब वो पूरी तरह से प्राकृतिक जीवन जी रहे हैं।

Skand ShuklaTue, 18 May 2021 08:07 AM (IST)

नैनीताल, किशोर जोशी : कोरोना काल में संक्रमण के खतरे को देखते हुए नैनीताल चिड़ियाघर को पहली मई से बंद कर दिया गया है। ऐसे में पर्यटकों समेत अन्य की आवाजाही बंद होने से वन्यजीवों की निजता में दखल कम हो गई है और अब वो पूरी तरह से प्राकृतिक जीवन जी रहे हैं। बाघ, तेंदुए, हिमालयन भालू इन दिनों स्वच्छंद होकर बाड़े में विचरण कर रहे हैं। पिछले साल भी लॉकडाउन के दौरान जू के वन्यजीवों को प्रकृतिक जीवन जीने का अवसर मिला था। इससे उनके आहार व्यवहार में भी बदलाव साफ नजर आ रहा है।

जू में बाघ-तेंदुए समेत 219 वन्य जीव जंतु

समुद्र तल से 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित भारतरत्न जीबी पंत चिड़ियाघर का क्षेत्रफल 4.693 हेक्टेयर है। यहां फिलहाल तीन बंगाल टाइगर, सात तेंदुए, चार हिमालयन भालू, घुरड़, काकड़, मारखोर, सात रेड पांडा, सफेद मोर, आस्ट्रेलियाई खूबसूरत पक्षी कॉकाटेल के अलावा दुर्लभ चीर फिजेंट, फिजेंट समेत 219 वन्य जीव जंतु हैं। हर साल लाखों पर्यटक जू में वन्य जीवों के दीदार के लिए खींचे चले आते हैं। इससे चिड़ियाघर की कमाई भी खूब होती है मगर पर्यटकों व वन कर्मचारियों की आवाजाही से वन्य जीवजंतुओं के प्राकृतिक जीवन जीने में खलल पड़ता है।

 

अक्सर चिड़चिड़ापन बनता है गुस्से की वजह

चिड़ियाघर में अक्सर पर्यटकों द्वारा बाघ, भालू व लैपर्ड के बाड़े के पास से फोटोग्राफी, पास बुलाने के लिए आवाज देने के साथ ही हाथ से इशारे किये जाते हैं। बाड़े में विचरण करते समय भीड़ का रवैया बाघ, गुलदार को पसंद नहीं आता। अक्सर गुस्से से बाघ घूरने लगता तो कभी दहाड़ने लगता। यहां तक कि उसे अपने आवास में छिपना पड़ता था। यही हाल हिमालयन भालू का होता था। आम तौर पर भालू शांत रहता है मगर भीड़ के चिढ़ाने पर गुफा में छिप जाता था। कभी कभार उसे प्यास लगने के बाद भी गुस्से में प्यासा रहना होता है। अब पर्यटकों की आवाजाही बंद होने के बाद यह जंगल सा प्राकृतिक जीवन जी रहे हैं।

 

 

दखल कम होने से वन्यजीवों का व्यवहार भी बदला

डिप्टी रेंजर दीपक तिवारी कहते हैं, 'वाकई बाघ व लेपर्ड के व्यवहार में इन दिनों बदलाव देखने को मिल रहा है। वह शांत हैं। उनका चिड़चिड़ापन गायब है। जब मन आये स्वच्छंद होकर बाड़े में विचरण कर रह रहे, या आराम से धूप सेंक रहे हैं। भोजन शाम को चार बजे दिया जाता है तो वह इंतजार कर रहे हैं। हिमालयन भालू भी बाड़े में धूप सेंकने के साथ ही कलाबाजी दिखा रहे हैं। यह उनके प्राकृतिक जीवन जीने का हिस्सा है। जानवरों का बदला व्यवहार वाकई हैरत में डाल रहा है। वह क्षेत्राधिकारी अजय रावत के अनुसार बाघ, भालू के साथ अन्य जानवरों के व्यवहार में खासी तब्दीली दिख रही है। वह शांत हैं और जंगल सा जी रहे हैं। वह आजकल भोजन सुकून से ग्रहण कर रहे हैं। बाघ, भालू आदि ही नहीं घुरड़, काकड़ भी आराम से बाड़े में घास व पत्तियां खा रहे हैं। जू के पशुचिकित्सक डॉ हिमांशु पांगती के अनुसार वन्य जीवों का बदला व्यवहार सुखद है।

 

संक्रमण से बचाव को कर खास जतन

चिड़ियाघर में आवाजाही बंद होने के बाद भी वन्य जीवों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए चिड़ियाघर प्रबंधन द्वारा खास जतन किये जा रहे हैं। निदेशक व डीएफओ बीजुलाल टीआर के अनुसार सेंट्रल जू अथॉरिटी की गाइडलाइन के अनुसार कर्मचारी ड्यूटी दे रहे हैं। दिनभर निश्चित अंतराल में बाड़ों के आसपास सेनेटाइज किया जा रहा है। कर्मचारियों को मास्क व ग्लब्ज दिए गए हैं। पीपीई किट भी उपलब्ध कराई गई है। हैदराबाद चिड़ियाघर में बाघ के संक्रमित होने के बाद अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। मांसाहारी जानवरों को गर्म पानी में साफ करने या उबालने के बाद ही मांस दिया जा रहा है।

 

 

अंगीकृत कर सकते हैं वन्य जीवों को

कोरोना काल मे कमाई ठप होने से चिड़ियाघर के वन्य जीवों की जरूरत पूरी करने वाले कर्मचारियों की पगार का संकट पैदा हो गया है। हर माह जानवरों के आहार व कर्मचारियों की पगार के लिए करीब 15 लाख की जरूरत होती है। घाटे को देखते हुये चिड़ियाघर प्रबंधन की ओर से वन्य जीवों को अंगीकृत करने के लिए सार्वजनिक नोटिस भी जारी किया था, नियमों को भी शिथिल किया गया है। बाघ, भालू को सालाना चार लाख में अंगीकृत किया जाता है। अब इसे घटाकर दो लाख किया गया है। एक से अधिक व्यक्ति भी एडॉप्ट कर सकते हैं। पक्षी आदि तो तमाम लोगों व संस्थाओं द्वारा अंगीकार किये गए मगर बड़े वन्य जीवों को अंगीकार करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। नैनीताल चिड़ियाघर में प्रवेश शुल्क भी वयस्कों के लिए सौ व बच्चों के लिए 50 रुपये है।

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