ग्रामीणों ने कहा, बर्बाद हो रहे जलश्रोतों का प्रबंधन कर प्रशासन ग्रामीणों तक पहुंचाए

ग्रामीणों ने कहा, बर्बाद हो रहे जलश्रोतों का प्रबंधन कर प्रशासन ग्रामीणों तक पहुंचाए

नैनीताल जिले के पर्वतीय गांवों में गर्मी के साथ ही जल संकट गहरा गया है। एक ओर गांव के गांव जल संकट से जूझ रहे हैं वहीं दूसरी ओर रानीखेत खैरना स्टेट हाईवे तथा अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर जगह-जगह प्राकृतिक जल स्रोतों का पानी दिनभर बहकर बर्बाद हो रहा है।

Skand ShuklaFri, 16 Apr 2021 10:22 AM (IST)

गरमपानी, संवाद सहयोगी : नैनीताल जिले के पर्वतीय गांवों में गर्मी के साथ ही जल संकट गहरा गया है। एक ओर गांव के गांव जल संकट से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रानीखेत खैरना स्टेट हाईवे तथा अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर जगह-जगह प्राकृतिक जल स्रोतों का पानी दिनभर बहकर बर्बाद हो रहा है। लोगों ने बहते पानी को एकत्र कर गांवों को आपूर्ति किए जाने की पुरजोर मांग उठाई है ताकि पेयजल संकट दूर हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्राकृतिक जलश्रोतों को संयोजित कर इसका पानी ग्रामीणों तक पहुंचाया जाए तो संकट खतम हो सकता है। 

बेतालघाट के साथ ही आसपास के ताडी़खेत तथा रामगढ़ ब्लॉकों के गांवों में पानी को हाहाकार मचा हुआ है। ग्रामीण दिनभर पेयजल व्यवस्था में जुटे रहते हैं। दूरदराज के क्षेत्रों से सिर पर पानी ढोना मजबूरी बन चुका है वहीं दूसरी ओर रानीखेत खैरना स्टेट हाईवे तथा अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर जगह-जगह प्राकृतिक जल स्रोतों का पानी दिनभर बह कर बर्बाद हो रहा है लोग दूर-दराज से पानी लेने इन स्रोतों पर पहुंचते हैं। आवाजाही कर रहे यात्री भी ठंडे ठंडे पानी का लुफ्त उठाते हैं। उसके बाद भी पानी दिन भर बहकर बर्बाद होते रहता है। 

अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर गरमपानी मुख्य बाजार में शेर का धारा, लोहाली क्षेत्र में स्थित करीब पांच स्थानों पर प्राकृतिक जल स्रोत से दिन भर पानी बहता रहता है। वहीं रानीखेत खैरना स्टेट हाईवे पर भी तल्ला व मल्ला पातली व उपराडी़  आदि क्षेत्रों में भी कई स्थानों पर प्राकृतिक जल स्रोतों से लगातार दिन भर पानी बहता है। लोगों ने प्राकृतिक जल स्रोतों से दिनभर बहते पानी को एकत्र कर आसपास के गांवों में आपूर्ति किए जाने की मांग की है। कहा है कि यदि दिनभर बहते पानी को टैंक बना कर एकत्र कर लिया जाए तो निश्चित रूप से तमाम गांवों में पेयजल संकट दूर होगा। साथ ही लोगों को भी राहत मिलेगी। प्राकृतिक जल स्रोतों से लगातार बहते पानी को एकत्र कर गांवों में पेयजल आपूर्ति किए जाने की क्षेत्रवासियों ने पुरजोर मांग की है।

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