बाघ से सुरक्षा नहीं मिलने पर ग्रामीण खफा, 25 फरवरी को अधिकारियों का करेंगे घेराव

आज तक एक भी पिजरा गांव के अंदर नहीं लगाया गया। जिससे गांव में ग्रामीणों के अंदर रोष व्याप्त है।

कार्बेट प्रशासन से जंगली जानवरों से इंसानों व फसलों की सुरक्षा की मांग भी की गई थी। कॉर्बेट प्रशासन द्वारा आश्वासन दिया गया कि बाघ को पकड़ने के लिए तीन पिजरे गांव में लगाए जाएंगे और गश्‍त की जाएगी पर हुआ कुछ नहीं।

Prashant MishraTue, 23 Feb 2021 04:05 PM (IST)

जागरण संवाददाता, रामनगर : कॉर्बेट प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने 25 फरवरी को कार्बेट के अधिकारियों के घेराव का निर्णय लिया है। कानिया गांव में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि 15 दिन से गांव में बाघ का आतंक है। बाघ एक महिला को मार चुका है। चार पांच लोगों पर हमला कर चुका है। इसके बावजूद कॉर्बेट प्रशासन चुप बैठा हुआ है। विभागीय अनदेखी से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ रहा है।

ग्रामीणों की ओर से पूर्व में कॉर्बेट प्रशासन को दिए ज्ञापन में बाघ को तत्काल पकड़ने की मांग की गई थी। कार्बेट प्रशासन से जंगली जानवरों से इंसानों व फसलों की सुरक्षा की मांग भी की गई थी। कॉर्बेट प्रशासन द्वारा आश्वासन दिया गया कि बाघ को पकड़ने के लिए तीन पिजरे गांव में लगाए जाएंगे। गांव की सुरक्षा के लिए कर्मचारियों द्वारा गश्त दिन रात की जाएगी। लेकिन आज तक एक भी पिजरा गांव के अंदर नहीं लगाया गया। जिससे गांव में ग्रामीणों के अंदर रोष व्याप्त है।

महिला एकता मंच की संयोजिका ललिता रावत ने कहा कि आजकल गांव के अंदर जंगली जानवरों का आतंक दिन और रात लगातार बढ़ता जा रहा है। लोग घास के लिए जंगलों में नहीं जा पा रहे हैं। जिससे कि उनके पालतू जानवर भूख के कारण मरने के कगार पर आ चुके हैं।  इको सिस्टम जोन विरोधी संघर्ष समिति के संयोज ललित उप्रेती ने कहा की सरकार और कॉर्बेट प्रशासन का रवैया ग्रामीणों के विरुद्ध रहा है। बैठक में कनिया, हिम्मतपुर डोटियाल सेमलखलिया, सांवलदे, चोरपानी, गोजानी के ग्रामीण मौजूद रहे।

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