रियांसी गांव में ग्रामीण ने युवक का हाथ काट डाला, गंभीर हालत में हल्द्वानी रेफर

रंजिश को लेकर नवीन सिंह खड़ायत ने गांव के ही ललित सिंह खड़ायत पर हमला कर दिया। नवीन ने खुकरी से प्रहार कर ललित का हाथ काटकर शरीर से अलग कर दिया। नवीन का आक्रोश यही नहीं रू का उसने ललित के सिर पर खुकरी से प्रहार कर दिया।

Prashant MishraFri, 15 Oct 2021 06:44 PM (IST)
उसकी गंभीर हालत को देखते हुए हल्द्वानी रेफर कर दिया है। इस घटना से क्षेत्र में दहशत बनी हुई है।

जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़ : जिला मुख्यालय से आठ किमी. दूर रियांसी गांव में एक ग्रामीण ने गांव के ही युवक का हाथ काटकर अलग कर दिया। हमलावर ने युवक के सिर पर धारदार हथियार से हमला कर उसे गंभीर रू प से घायल कर दिया। युवक को हल्द्वानी रेफर कर दिया गया है। 

देर रात पौने नौ बजे पुरानी रंजिश को लेकर नवीन सिंह खड़ायत ने गांव के ही ललित सिंह खड़ायत पर हमला कर दिया। नवीन ने खुकरी से प्रहार कर ललित का हाथ काटकर शरीर से अलग कर दिया। नवीन का आक्रोश यही नहीं रू का उसने ललित के सिर पर खुकरी से प्रहार कर दिया। हमले की इस घटना से गांव में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर वड््डा चौकी प्रभारी जसवीर सिंह पुलिस बल लेकर गांव पहुंचे। उन्होंने हमलावर को गिरफ््तार कर लिया। उन्होंने बताया कि हत्या के प्रयास के तहत धारा 307 और 326 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। हमलावर से पूछताछ की जा रही है। घायल ललित सिंह को तत्काल अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए हल्द्वानी रेफर कर दिया है। इस घटना से क्षेत्र में दहशत बनी हुई है।

पूर्व सैनिक संगठन ने दी बहिष्कार की चेतावनी 

पिथौरागढ : पूर्व सैनिक संगठन ने प्रदेश में निकाली जाने वाली सैनिक सम्मान यात्रा से पूर्व पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान की मांग की है। संगठन ने कहा है कि पूर्व सैनिकों के नाम पर कोरी राजनीति न की जाए। संगठन के अध्यक्ष ललित सिंह ने कहा है कि बेलतड़ी गांव के लोग पिछले 20 दिनों से दो किमी. सड़क की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। धरने पर बैठने वालों में बड़ी तादात पूर्व सैनिकों की है, लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिले के एकमात्र अशोक चक्र विजेता शहीद बहादुर सिंह के नाम पर वर्ष 2009 में सड़क स्वीकृत हुई थी, जो आज तक धरातल पर नहीं उतरी। कई शहीदों के गांवों तक पहुंचने के लिए आठ से दस किमी. की पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है।

पूर्व सैनिक दूरस्थ क्षेत्रों में सैन्य कैंटीन खोलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक कैंटीनें नहीं खुली हैं। बुजुर्ग पूर्व सैनिक जिला मुख्यालय स्थित सैन्य कैंटीनों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सैनिकों के गांवों की समस्याओं का समाधान ही उनका असली सम्मान होगा। सम्मान यात्रा से पूर्व समस्याओं का समाधान नहीं होने पर पूर्व सैनिक यात्रा का बहिष्कार करेंगे।

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