उत्तराखंड बनेगा देश का एग्री एक्सपोर्ट हब, निर्यात को बढ़ावा मिलने के साथ सुधरेगी किसानों की दशा

कृषि उपज के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विवि व भारत सरकार वाणिज्य मंत्रालय के एपेडा के साथ मंगलवार को एमओयू होगा। इसके तहत विज्ञानी व विद्यार्थी बासमती व अन्य फसलों पर शोध करेंगे और उत्पाद तैयार किए जाएंगे जिससे विदेशों में मानक के दायरे में उत्पाद आ सके।

Prashant MishraTue, 12 Oct 2021 12:38 PM (IST)
निर्यात की जाने वाले उत्पाद मानक पर खरा न उतरने से वापस कर दिया जाता रहा पर अब नहीं होगा।

अरविंद कुमार सिंह, पंतनरग। हरित क्रांति का श्रेय लेने वाले  गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि अब एग्री एक्सपोर्ट में क्रांति लाने में जुट गया है। इसके लिए एग्रीकल्चरल एंड प्रासेस्ड फूड्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट आफ अथारिटी यानी एपेडा व विवि के बीच आज करार होगा। इससे न केवल उत्तराखंड एग्री एक्सपोर्ट हब बनेगा और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसान कंपनी के रूप में कार्य कर आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। यह विवि की बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। कृषि विज्ञानियों का दावा है कि देश का यह पहला कृषि विवि है, जिसके साथ एग्री एक्सपोर्ट के लिए करार होने जा रहा है।

देश को न केवल अन्न में पंत विवि ने आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि अन्न निर्यात भी होता है। विवि ने कृषि क्षेत्र में कई विभिन्न प्रजातियां विकसित की हैं तो कई कृषि यंत्र भी ईजाद किए हैं। कृषि उपज के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विवि व भारत सरकार वाणिज्य मंत्रालय के एपेडा के साथ मंगलवार को एमओयू होगा। इसके तहत विज्ञानी व विद्यार्थी बासमती व अन्य फसलों पर शोध करेंगे और निर्यात के हिसाब से उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जिससे विदेशों में मानक के दायरे में उत्पाद आ सके। जबकि सामान्यत यहां से निर्यात की जाने वाले उत्पाद मानक पर खरा न उतरने से वापस कर दिया जाता रहा है।

जांच में उत्पाद में मानक से ज्यादा केमिकल पाया जाता था। इसलिए मानक के दायरे में निर्यात के लिए पंत विवि उत्पाद तैयार करेगा। लैब में एक बार जांच हो गई और मानक के दायरे में उत्पाद आ गया तो फिर उसे कहीं जांच कराने की जरुरत नहीं होगी। करार के तहत राज्य के मेडिसिनल प्लांट, जैविक, प्राकृतिक खेती, शहद, चावल, मक्का व अन्य उत्पादों को निर्यात के हिसाब से तैयार किया जाएगा। सेंटर स्थापित करने में करीब 30 से 40 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद जताई जा रही है। करार के बाद वर्कआउट तैयार होगा। इस सुविधा से राज्य के उत्पादों को निर्यात किया जाएगा तो राज्य की अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी। किसानों के दिन भी बहुरेंगे और पहाड़ से पलायन रुकेगा और खेती के प्रति रुचि बढग़ी।

विवि में स्थापित होगा बासमती व मिलेट एक्सपोर्ट फाउंडेशन सेंटर

एपेडा की ओर से सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसमें निर्यात के लिए मानक के दायरे में उत्पाद तैयार किए जाएंगे। किसानों से निर्यात के हिसाब से खेती कराई जाएगी। विज्ञानियों की देखरेख में ट्रेङ्क्षनग दी जाएगी।

एग्री एक्सपोर्ट रिसर्च स्कूल होगा स्थापित

करार के तहत पंत विवि में एग्री एक्सपोर्ट रिसर्च स्कूल स्थापित होगा। इसमें शोध कार्य किए जाएंगे। बासमती सहित अन्य चावल, शहद, मेडिसिनल प्लांट, प्राकृतिक व जैविक खेती आदि फसल उगाई जाएगी। निर्यात के हिसाब से उत्पाद तैयार किए जाएंगे। यह भी पता लगाया जाएगा कि जो प्रजातियां हैं, इन्हें किसने ईजाद की है।

इन्यूबेटर व एक्सीलेंट सेंटर बनेंगे

विवि व एपेडा के बीच हुए एमओयू के तहत विवि में इन्क्यूबेटर व एक्सीलेंट सेंटर स्थापित होंगे। इससे विवि के विद्यार्थी या बाहरी विद्यार्थियों व युवाओं को स्टार्टअप व उद्योग लगाने की जानकारी दी जाएगी। शोध निदेशक डा. अजित सिंह नैन ने बताया कि एपेडा व विवि के बीच आज एमओयू होगा। जिससे चावल व अन्य उत्पादों का एक्सपोर्ट किया जा सके। किसानों की खेती करने,निर्यात के हिसाब से उत्पाद तैयार करने की ट्रेङ्क्षनग आदि की जानकारी दी जाएगी। उत्पादों की जांच के लिए लैब स्थापित होगी।

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