27 दिन से उपनलकर्मियों का धरना जारी, ताली-थाली बजाकर किया विरोध-प्रदर्शन

समान कार्य समान वेतन व नियमितिकरण की मांग को लेकर उपनलकर्मियों का धरना जारी है। 27 दिन से कोई सुनवाई नहीं होने पर अब कर्मियों ने आंदोलन को तेज कर दिया। रविवार को बुद्ध पार्क में ताली-थाली बजाकर सरकार को जगाने की कोशिश की।

Skand ShuklaSun, 26 Sep 2021 02:45 PM (IST)
27 दिन से उपनलकर्मियों का धरना जारी, ताली-थाली बजाकर किया विरोध-प्रदर्शन

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : समान कार्य समान वेतन व नियमितिकरण की मांग को लेकर उपनलकर्मियों का धरना जारी है। 27 दिन से कोई सुनवाई नहीं होने पर अब कर्मियों ने आंदोलन को तेज कर दिया। रविवार को बुद्ध पार्क में ताली-थाली बजाकर सरकार को जगाने की कोशिश की।

प्रतिदिन की तरह रविवार को भी डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय के 300 से अधिक उपनल कर्मचारी बुद्ध पार्क में एकत्रित हो गए थे। उन्होंने ताली-थाली बजाई और सरकार के रवैये पर आक्रोश जताया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि हम शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। जबकि हमने सभी जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई। बार-बार अनुरोध किया। अधिकारियों को भी अवगत कराया। ज्ञापन सौंपा। इसके बावजूद हमारे बारे में नहीं सोचा जा रहा है।

कैबिनेट बैठक में भी हमारे मुद्दे को नहीं लाया जा रहा है। जबकि हमें इसके लिए हर बार आश्वासन दिया जाता है। इस तरह की स्थिति से सभी कर्मचारियों में निराशा है। एसटीएच उपनल कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पीएस बोरा ने कहा, आखिर सरकार हमारी मांग कब सुनेगी?

बच्चों की फीस देना तक हुआ मुश्किल

बुद्ध पार्क में धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि 10 से 15 वर्ष से कार्यरत हैं। हमारा वेतन नाममात्र का है। हमसे सभी तरह का कार्य कराया जाता है। स्थायी नियुक्ति वाले भी यही काम करते हैं, जबकि उनका वेतन कहीं अधिक है। कम वेतन में हमारे परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो गया है। घर का किराया देना संभव नहीं हो पा रहा है। बच्चों की फीस भरने में दिक्कत है। इस तरह की स्थिति से सभी जनप्रतिनिधियों को जानकारी है। इसके बावजूद अनदेखी की जा रही है। समान कार्य समान वेतन व नियमितिकरण की जायज मांग को सरकार को मानना चाहिए।

एसटीएच का काम प्रभावित

हड़ताल की वजह से एसटीएच का काम प्रभावित हो रहा है। सफाई नहीं हो पा रही है। ऑपरेशन से लेकर भर्ती मरीजों को दिक्कतें हो रही हैं। चंद स्थायी कर्मचारियों के ऊपर काम का पूरा लोड है।

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