सुशीला तिवारी अस्पताल में चार दिन तक लावारिश पड़ा रहा चालक, तड़प-तड़प कर मौत, परिजनों को नहीं ढूंए पाई पुलिस

सुशीला तिवारी अस्पताल में चार दिन तक लावारिश पड़ा रहा चालक, तड़प-तड़प कर मौत, परिजनों को नहीं ढूंए पाई पुलिस

पुलिस की लापरवाही से तीन किमी दूर घर होने के बावजूद एक ट्रैक्टर चालक ने डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में लावारिस हालत में दम तोड़ दिया। सोशल मीडिया की मदद से ट्रैक्टर चालक के एसटीएच में होने का पता चलने पर मंगलवार को परिजन पहुंचे पर देर हो चुकी थी।

Publish Date:Wed, 13 Jan 2021 07:30 AM (IST) Author: Skand Shukla

हल्द्वानी, जागरण संवाददाता : पुलिस की लापरवाही से तीन किमी दूर घर होने के बावजूद एक ट्रैक्टर चालक ने डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में लावारिस हालत में दम तोड़ दिया। सोशल मीडिया की मदद से ट्रैक्टर चालक के एसटीएच में जख्मी होने का पता चलने पर मंगलवार को परिजन पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। चालक के लावारिस हालत में दम तोडऩे से हल्द्वानी के साथ ही ऊधम सिंह नगर पुलिस की कार्यप्रणाली कठघरे में खड़ी हो गयी है।

 

रामपुर रोड स्थित हैड़ागज्जर की हरिपुर शिवदत्त कालोनी निवासी 40 वर्षीय गणेश बोरा पुत्र राम बहादुर गौला में ट्रैक्टर चलाते थे। आठ जनवरी की शाम करीब पांच बजे वह घर से रुद्रपुर में रहने वाली बहन की बेटी के नामकरण में शामिल होने के लिए बाइक से निकले। गणेश बोरा न तो रुद्रपुर पहुंचे और न ही घर लौटे। परेशान परिजनों ने नौ जनवरी की सुबह से ही गणेश की तलाश शुरू कर दी। भंडारी पेट्रोल पंप में लगे सीसीटीवी फुटेज देखने पर गणेश बाइक में तेल भराते दिख गए।

 

उसी देर शाम बेटे ने कोतवाली पहुंचकर पिता की गुमशुदगी दर्ज कराई। 10 जनवरी को बेलबाबा में लगे पुलिस के सीसीटीवी कैमरे की जांच में आठ की शाम छह बजे गणेश मंदिर के पास दो लोगों से काफी देर तक बात करते और फिर रुद्रपुर की ओर जाते दिखे। इसके बावजूद पुलिस ने गणेश की तलाश आगे नहीं बढ़ायी। वहीं परेशान परिजनों से वाट्सएप, फेसबुक आदि सोशल मीडिया में चालक की फोटो डालकर लोगों से ढूंढने की गुहार लगायी।

 

बेटे हर्षित बोरा ने बताया कि सोशल मीडिया में पोस्ट देखकर मंगलवार को किच्छा के व्यक्ति का फोन आया और पिता की शक्ल से मिलते व्यक्ति एसटीएच के सर्जिकल वार्ड में भर्ती होने की जानकारी दी। दोपहर में परिजन एसटीएच पहुंचे तो स्टाफ ने बताया कि जिस व्यक्ति को वह देखने आए हैं, उसकी सोमवार की रात ही मृत्यु हो चुकी है। पुलिस ने लावारिस में दाखिल कर शव मोर्चरी में रखवाया है। परिजन मोर्चरी में पहुंचे तो वहां रखे गणेश के शव को पहचान लिया।

 

कनिष्ठ ब्लाक प्रमुख, हल्द्वानी श्रीकांत पांडे का कहना है कि मंडी चौकी, कोतवाली व टीपीनगर चौकी में परिजनों के चक्कर लगाने के बाद भी पुलिस को ट्रैक्टर चालक को नहीं तलाशना काफी निराशाजनक है। अस्पताल से मेडिकल चौकी में अज्ञात व्यक्ति जख्मी हालत में आने की सूचना भी भेजी गयी थी। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा होता है। अगर पुलिस तलाशी में सजगता दिखाती तो चालक की जान बच सकती थी। एसपी सिटी हल्द्वानी अमित श्रीवास्तव ने बताया कि परिजनों के गणेश की गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद पुलिस तलाश में जुटी थी। मंगलवार को परिजनों के सूचना देने पर पुलिस भी एसटीएच साथ गयी। अगर तलाश में लापरवाही की बात उठ रही है, तो जांच करा ली जाएगी।

 

रुद्रपुर जिला अस्पताल से 108 से लाया गया था युवक

परिजनों ने पड़ताल शुरू की तो पता चला कि गणेश बोरा आठ जनवरी की शाम ही जख्मी हो गए थे। टांडा जंगल में हादसा होने की जानकारी परिजनों को मिली है। दो लोग गणेश को जख्मी हालत में रुद्रपुर जिला अस्पताल छोड़कर चले गए थे। जहां से रेफर करने पर 108 एंबुलेंस से उसी रात एसटीएच लाया गया था। यहां अज्ञात में भर्ती करने के बाद एसटीएच प्रशासन ने मेडिकल कालेज चौकी पुलिस को भी लिखित जानकारी दी। वहीं पुलिस ने अज्ञात युवक के परिजनों को तलाशने की जहमत नहीं उठायी।

 

नैनीताल के साथ ऊधम सिंह नगर पुलिस भी सवालों के घेरे में

टांडा जंगल में जिस स्थान पर हादसे की जानकारी मिल रही है, वह ऊधम सिंह नगर जिला पुलिस के अधीन है। हादसे के बाद गणेश की बाइक भी क्षतिग्रस्त हुई होगी। गणेश के शव के शिनाख्त करने के बाद टीपीनगर चौकी पुलिस ने हरकत में आकर बाइक में बारे में पता लगाया। परिजनों को पुलिस से जानकारी मिली कि बाइक लावारिस हालत में रुद्रपुर जिला अस्पताल में मिल गयी है और उसे सिडकुल चौकी ले आया गया है। वहीं पांच दिन से बाइक लावारिस हालत में पड़े होने व रुद्रपुर पुलिस के चालक की तलाश नहीं करना भी पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहा है।

 

कौन थे बेलबाबा में मिले दो लोग?

परिजनों के मुताबिक आठ की शाम जो दो लोग गणेश बोरा से बेलबाबा में मिले, वह बाइक पर सवार थे। गणेश की बाइक के साथ ही दोनों भी अपनी बाइक से रुद्रपुर की ओर रवाना हुए थे। सीसीटीवी फुटेज की मदद से परिवहन विभाग से बाइक के बारे में पता लगाया तो वह जसपुर के एक व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड है। परिजनों ने पुलिस को उस बाइक की जानकारी भी दी, लेकिन दोनों लोगों के बारे में पता नहीं लगाया गया।

 

उठ रहे सवाल

सीसीटीवी फुटेज में आठ जनवरी की शाम बेलबाबा से जाते दिखने के बाद भी आगे तलाश क्यों नहीं की गयी। बेलबाबा में जो दो बाइक सवार गणेश को मिले, वह भी रुद्रपुर की ओर गए। उस बाइक का नंबर दिखने के बावजूद दोनों का पता नहीं लगाया गया। एसटीएच प्रशासन के अज्ञात घायल आने की सूचना पुलिस को देने के बाद भी उसकी पहचान की कोशिश नहीं की गयी। टांडा जंगल में बाइक हादसा होने के बावजूद नंबर से चालक के बारे में पता नहीं लगाया गया। गणेश की शिनाख्त होने पर अचानक पुलिस को जिला अस्पताल में बाइक लावारिस हालत में मिल गयी।

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